UPI पेमेंट पर लग सकता है चार्ज! संसद में पेश हुआ प्रस्ताव- ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर लग सकती है फीस
UPI से पेमेंट अभी दुकानदारों के लिए पूरी तरह मुफ्त है, लेकिन जल्द यह व्यवस्था बदल सकती है। सरकार कानून में ऐसा बदलाव करने जा रही है, जिससे बड़े कारोबारियों और ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जा सकेगा। क्या अब UPI पेमेंट भी महंगा हो जाएगा? पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने का कानूनी रास्ता खुल सकता है।
- रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% फीस लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
- छोटे कारोबारियों और ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट मुफ्त रखा जा सकता है।
भारत में UPI से भुगतान करने की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। सरकार पेमेंट से जुड़े कानूनों में संशोधन की तैयारी कर रही है, जिससे कुछ डिजिटल ट्रांजैक्शन पर दुकानदारों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वसूलने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल UPI पेमेंट पर मर्चेंट से कोई फीस नहीं ली जाती।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पेमेंट से जुड़े कानूनों में प्रस्तावित बदलाव मंगलवार को संसद में पेश किए गए। इन बदलावों से डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने के लिए कानूनी आधार तैयार हो सकता है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि फीस कितनी होगी और किन पेमेंट पर लागू की जाएगी।
कानून में बदलाव से खुलेगा MDR का रास्ता
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। इंडस्ट्री और रेगुलेटरी सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव के बाद डिजिटल पेमेंट पर MDR लगाने का कानूनी रास्ता खुल सकता है।
MDR वह फीस होती है, जो दुकानदार डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों को देते हैं। भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर करीब 1.5% और डेबिट कार्ड पर 0.9% तक MDR लगता है। फिलहाल UPI पेमेंट दुकानदारों के लिए मुफ्त है।
जुलाई में हुए 23.6 अरब UPI ट्रांजैक्शन
UPI दुनिया के सबसे बड़े रियल टाइम पेमेंट नेटवर्क में से एक है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में UPI के जरिए 23.6 अरब ट्रांजैक्शन किए गए। इनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये रही।
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भारत के UPI पेमेंट बाजार में वॉलमार्ट की फोनपे और अल्फाबेट की गूगल पे का दबदबा है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि UPI ट्रांजैक्शन पर फीस नहीं मिलने के कारण पेमेंट कंपनियों के लिए लगातार निवेश करना मुश्किल होता जा रहा है।
सरकार के सामने दो ऑप्शन
सूत्रों के मुताबिक, सरकार दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला विकल्प एक तय रकम से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का है। दूसरा विकल्प दुकानदार के सालाना टर्नओवर के आधार पर फीस तय करने का है।
एक प्रस्ताव के तहत केवल बड़े दुकानदारों से फीस ली जा सकती है। इससे छोटे कारोबारियों और ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट मुफ्त बना रहेगा।
₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर लग सकता है चार्ज
सरकार ऐसे दुकानदारों पर 0.3% से 0.5% MDR लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह चार्ज 2,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर लगाया जा सकता है।
जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन कुल मर्चेंट पेमेंट की संख्या का केवल 4% हैं, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में उनकी हिस्सेदारी करीब 67% है। इस कदम से पेमेंट इंडस्ट्री के लिए 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक का रेवेन्यू तैयार हो सकता है।
