
Apple और Intel फिर आए साथ! अब अमेरिका में बनाएंगे चिप - ट्रंप ने कही ये बड़ी बात
ट्रंप ने एप्पल और इंटेल के बीच एक नई डील का ऐलान किया है। अब एप्पल के चिप्स अमेरिका में ही बनेंगे, जिससे इंटेल को काफी फायदा होगा। इस कदम से अमेरिका की अपनी चिप बनाने की क्षमता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी। पढ़ें पूरी खबर।

अमेरिकी चिप मार्केट में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि एप्पल और इंटेल के बीच एक समझौता हुआ है। इसके तहत अब एप्पल और इंटेल मिलकर अमेरिका में ही चिप्स की डिजाइनिंग और उन्हें बनाने का काम करेंगे। इंटेल के लिए यह सालों बाद मिली सबसे बड़ी डील मानी जा रही है।
साझेदारी से इंटेल को मिलेगी मजबूती
ट्रंप ने अभी यह नहीं बताया है कि इस डील में कितना पैसा खर्च होगा या इंटेल कौन-से चिप्स बनाएगा। इसके बावजूद, इस समझौते को इंटेल के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

इंटेल लंबे समय से चिप बनाने के कारोबार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है और ताइवान की कंपनी TSMC से मुकाबला कर रही है। ऐसे में एप्पल के साथ साझेदारी से इंटेल को अपना मैन्युफैक्चरिंग कारोबार बढ़ाने और बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
एप्पल को क्या फायदा होगा?
अभी Apple अपने आईफोन और मैक के लिए चिप्स TSMC से बनवाता है। लेकिन आजकल NVIDIA और AMD जैसी कंपनियों की वजह से TSMC पर बहुत काम का दबाव है।
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इंटेल के साथ जुड़ने से Apple को चिप्स बनाने के लिए एक और ऑप्शन मिल जाएगा और उसे TSMC पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह कदम अमेरिका में चिप्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए ट्रंप सरकार के प्लान का भी हिस्सा है।
इंटेल और एप्पल का पुराना रिश्ता
एप्पल और इंटेल पहले भी साथ काम कर चुके हैं। करीब 15 साल तक इंटेल एप्पल के मैक कंप्यूटरों के लिए चिप्स बनाता था। फिर 2020 में एप्पल ने खुद के चिप्स (एम-सीरीज) बनाने शुरू कर दिए, जो TSMC बनाती थी।
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उस समय एप्पल ने इंटेल का साथ छोड़ दिया था, लेकिन अब ये दोनों कंपनियां फिर से साथ आ गई हैं।
सरकार का पूरा समर्थन
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इंटेल में अमेरिकी सरकार की 10% हिस्सेदारी है, इसलिए सरकार उसे पूरी मदद दे रही है। इससे पहले टेस्ला जैसी बड़ी कंपनियां भी इंटेल के साथ जुड़ चुकी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डील पिछले एक साल से चल रही बातचीत के बाद फाइनल हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह साझेदारी अमेरिकी चिप इंडस्ट्री को किस मुकाम पर ले जाती है।

