AI को लेकर Sam Altman ने मानी अपनी गलती कहा इकॉनमी में बदलाव उम्मीद से धीमा
सैम ऑल्टमैन का कहना है कि AI कितनी तेज़ी से बिज़नेस और अर्थव्यवस्था में बदलाव लाएगा, इस बारे में उनकी सोच गलत थी. उनका मानना है कि नई टेक्नोलॉजी को अपनाने में समाज की धीमी रफ़्तार, AI की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को आसान बना सकती है.

In Short
- Sam Altman ने माना कि उन्होंने AI से बिजनेस और इकॉनमी में तेज बदलाव की उम्मीद ज्यादा लगा ली थी
- उन्हें लगा था कि 2023 में GPT-4 के बाद सॉफ्टवेयर बिजनेस में तेजी से उथल-पुथल होगी
- Altman के मुताबिक AI तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन लोग और कंपनियां इसे अपनाने में ज्यादा समय ले रहे हैं
OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने माना है कि उन्होंने इस बात को लेकर जरूरत से ज्यादा उम्मीद लगा ली थी कि AI कितनी जल्दी बिजनेस और पूरी इकॉनमी को बदल देगा। उनका कहना है कि AI टेक्नोलॉजी उम्मीद से भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ी है, लेकिन लोग और कंपनियां इसे अपनाने में उतनी तेजी नहीं दिखा रहे हैं।
पॉडकास्टर डेविड सेनरा के साथ हाल ही में हुई बातचीत में ऑल्टमैन ने अपनी पुरानी भविष्यवाणियों पर बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने इकॉनमी में मौजूद बदलाव के प्रति जड़ता को कम करके आंका था। नई टेक्नोलॉजी आने के बाद भी लोग अक्सर पुराने प्रोडक्ट, पुराने टूल और काम करने के जाने-पहचाने तरीकों को ही इस्तेमाल करते रहते हैं।
GPT-4 के बाद बड़े बदलाव की थी उम्मीद
सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि 2023 में GPT-4 लॉन्च होने के तुरंत बाद सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में बड़े बदलाव दिखने लगेंगे। उन्हें लगा था कि AI की वजह से कई सॉफ्टवेयर बिजनेस जल्दी बदलेंगे और कंपनियों के लिए अपने प्रोडक्ट में बड़े बदलाव करना आसान हो जाएगा।
हालांकि ऐसा उतनी तेजी से नहीं हुआ। ऑल्टमैन के मुताबिक समस्या AI टेक्नोलॉजी की क्षमता में नहीं थी बल्कि इकॉनमी और समाज के बदलने की रफ्तार में थी।
लोग जल्दी नहीं बदलते काम करने का तरीका
ऑल्टमैन ने कहा कि कंपनियों के पास पहले से इस्तेमाल हो रहे सॉफ्टवेयर होते हैं। कर्मचारियों के काम करने के अपने तय तरीके होते हैं और ग्राहक भी उन्हीं प्रोडक्ट को इस्तेमाल करना पसंद करते हैं जिनके साथ वे सहज हैं।
उनके मुताबिक यही वजह है कि एक मजबूत नई टेक्नोलॉजी आने के बाद भी उसका असर पूरी इकॉनमी में दिखने में समय लगता है।
धीमा बदलाव हो सकता है फायदेमंद
ऑल्टमैन का मानना है कि AI को धीरे-धीरे अपनाया जाना पूरी तरह खराब बात नहीं है। इससे बिजनेस और समाज को यह समझने का ज्यादा समय मिल सकता है कि AI को रोजमर्रा के काम में किस तरह इस्तेमाल किया जाए।
उन्होंने कहा कि लोग उसी कंपनी से खरीदारी करते रहते हैं और अपने टूल का इस्तेमाल भी पुराने तरीके से करना चाहते हैं। यही जड़ता बदलाव को ज्यादा आसान और धीरे-धीरे होने वाला बना सकती है।
AI का असर कम नहीं होगा
ऑल्टमैन का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि AI का असर कम रहने वाला है। उनके मुताबिक AI बड़ा बदलाव लाएगा लेकिन यह बदलाव उनकी शुरुआती उम्मीद से ज्यादा समय ले सकता है।
उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी तेजी से बेहतर हो रही है लेकिन समाज और इकॉनमी इसे धीरे-धीरे अपनाएंगे। यही अंतर आने वाले समय में AI बूम के अगले दौर की दिशा तय कर सकता है।
