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Nvidia ने AI चिप खरीदने वालों की जांच बढ़ाई, जानिए भारतीय कंपनियों पर क्या होगा असर

Nvidia ने AI चिप खरीदने वाले ग्राहकों की जांच सख्त कर दी है। इसका मकसद इन चिप्स को दूसरे रास्तों से चीन पहुंचने से रोकना है। भारत में चिप की सप्लाई रुकने की उम्मीद कम है, लेकिन कंपनियों को खरीद के लिए ज्यादा कागजात देने पड़ सकते हैं और प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

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In Short

  • Nvidia अब चिप खरीदने वाली कंपनी और उसके इस्तेमाल की भी जांच कर सकती है।
  • भारत में AI चिप की खरीद पर रोक की संभावना कम है, लेकिन प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
  • छोटे AI स्टार्टअप्स पर ज्यादा कागजी काम और देरी का असर पड़ सकता है।

Nvidia AI Chips: बेहद तेज AI चिप्स अब सिर्फ टेक कंपनियों के काम की चीज नहीं रह गई हैं। इनका इस्तेमाल जनरेटिव AI, अपने-आप काम करने वाले सिस्टम, सेना से जुड़े उपकरण और देश की सुरक्षा तक में हो रहा है। इसी वजह से कई देश इन चिप्स की बिक्री और इस्तेमाल पर ज्यादा कड़ी नजर रख रहे हैं।

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बिजनेस टुडे ने फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि Nvidia ने एशिया के कुछ हिस्सों में मंजूर ग्राहकों की एक सूची तैयार की है।। इसका मकसद यह रोकना है कि कंपनी की AI चिप्स दूसरे रास्तों से चीन तक न पहुंचें।

अब सिर्फ देश नहीं, खरीदार की भी होगी जांच

पहले ज्यादा ध्यान इस बात पर रहता था कि चिप किस देश में भेजी जा रही है। अब यह भी देखा जा सकता है कि चिप कौन खरीद रहा है, उसे कहां लगाया जाएगा और उसका इस्तेमाल किस काम के लिए होगा।

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इस वजह से खरीद के समय ग्राहकों को ज्यादा जानकारी और कागजात देने पड़ सकते हैं। कंपनियों को यह भी बताना पड़ सकता है कि उनका मालिक कौन है, उनके ग्राहक कौन हैं और चिप का इस्तेमाल किस काम में होगा।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

यह कदम मुख्य रूप से सिंगापुर, मलेशिया और जापान जैसे बाजारों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। फिर भी भारत की क्लाउड कंपनियों और दूसरी फर्मों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

जानकारों का कहना है कि भारत में चिप मिलना तुरंत बंद होने की उम्मीद कम है। लेकिन खरीद में ज्यादा समय लग सकता है। कंपनियों को KYC, कॉन्ट्रैक्ट की जांच और जरूरत पड़ने पर मौके पर जांच जैसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इससे कागजी काम, कानूनी तैयारी और खरीद का खर्च भी बढ़ सकता है।

छोटे स्टार्टअप्स के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?

बड़ी कंपनियों के पास आमतौर पर अलग कानूनी और नियमों से जुड़े काम देखने वाली टीमें होती हैं। इसलिए वे नई जांच को आसानी से संभाल सकती हैं।

लेकिन छोटे AI स्टार्टअप्स और नए GPU क्लाउड प्रोवाइडर्स के लिए यह मुश्किल हो सकता है। ज्यादा कागजी काम और देरी से उन्हें जरूरी चिप मिलने में समय लग सकता है।

इसका असर मॉडल तैयार करने, नया प्रोडक्ट लॉन्च करने और ग्राहकों से किए वादे पूरे करने पर पड़ सकता है।

IndiaAI मिशन पर कितना असर होगा?

जानकारों का मानना है कि IndiaAI मिशन पर अभी बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि यह सरकार के सहारे चलने वाला प्रोग्राम है और तय कंपनियों के जरिए काम करता है।

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इससे चिप किसकी है, कहां लगी है और किस काम में इस्तेमाल होगी, यह बताना आसान हो सकता है। भारत Nvidia के लिए बड़ा AI बाजार है, इसलिए पहले से तय GPU लगाने की योजनाओं पर बड़ी रोक की उम्मीद कम है।

क्या बाकी चिप कंपनियां भी यही तरीका अपनाएंगी?

अगर Nvidia की यह सूची और जांच का तरीका सफल रहता है, तो दूसरी चिप कंपनियां भी ऐसा कर सकती हैं।

आने वाले समय में AMD, Intel और दूसरी कंपनियां भी खरीदार की पहचान और चिप के इस्तेमाल की जांच बढ़ा सकती हैं। ऐसे में AI चिप खरीदने के लिए सिर्फ पैसा होना काफी नहीं होगा। खरीदार को पूरी जानकारी देनी होगी और जरूरी मंजूरी भी लेनी पड़ सकती है।