नेशनल हाईवे पर खत्म होगा टोल का झंझट? सरकार ने चुना नया सिस्टम, GPS पर क्यों अटका बड़ा फैसला
नेशनल हाईवे पर टोल प्लाजा की लंबी लाइनें जल्द बीते दिनों की बात हो सकती हैं। सरकार ने बिना गाड़ी रोके टोल काटने वाले सिस्टम पर बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए नई टेक्नोलॉजी का ट्रायल शुरू हो चुका है, लेकिन एक प्रस्तावित विकल्प को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठे हैं।

In Short
- सरकार ने GPS के बजाय FASTag, ANPR कैमरे और AI एनालिटिक्स से बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन लागू करने का फैसला किया है।
- यह सिस्टम 17 टोल प्लाजा के लिए मंजूर हो चुका है, जिनमें से 5 पर सुविधा शुरू हो गई है और 104 अन्य प्लाजा के लिए बिड्स मांगी गई हैं।
- जून 2026 तक 77 लाख से ज्यादा FASTag Annual Pass जारी हुए, जबकि नेशनल हाईवे का 98% से अधिक टोल कलेक्शन अब FASTag से हो रहा है।
FASTag: नेशनल हाईवे पर सफर करते समय टोल प्लाजा की लंबी लाइनें लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती हैं। कई बार कुछ मिनट का सफर टोल पर रुकने की वजह से काफी लंबा हो जाता है। इसी परेशानी को कम करने के लिए सरकार टोल कलेक्शन के तरीके में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है।
नई व्यवस्था का मकसद टोल की प्रक्रिया को ज्यादा आसान और तेज बनाना है, ताकि लोगों को बार-बार रुकना न पड़े और हाईवे पर ट्रैफिक भी बिना रुकावट आगे बढ़ सके। लेकिन इस बदलाव के बीच GPS टेक्नोलॉजी को लेकर सरकार ने तुरंत फैसला क्यों नहीं लिया?
GPS टेक्नोलॉजी पर अभी होगा और विचार
केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे पर बिना बैरियर के टोल वसूलने के लिए फिलहाल GPS टेक्नोलॉजी को नहीं चुना है। इसके बजाय FASTag, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR और AI बेस्ड एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि इंडस्ट्री और पढ़ाई-लिखाई के क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट्स वाली एपेक्स कमेटी और हाई-लेवल एम्पावर्ड कमेटी ने GPS बेस्ड सिस्टम पर अभी और चर्चा करने की सलाह दी है।
कमेटियों ने लोगों की निजी जानकारी, डेटा लीक होने के खतरे और पूरे सिस्टम को संभालने के तरीके को लेकर सवाल उठाए हैं। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि FASTag और कैमरों की मदद से बिना रुके टोल कैसे कटेगा?
बिना रुके कट जाएगा टोल
सरकार मल्टी-लेन फ्री फ्लो यानी MLFF सिस्टम लागू कर रही है। इसमें FASTag की RFID टेक्नोलॉजी, ANPR कैमरे और AI एनालिटिक्स मिलकर गाड़ी की पहचान करेंगे।
इस सिस्टम के शुरू होने के बाद गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकने या स्पीड कम करने की जरूरत नहीं होगी। गाड़ी जैसे ही टोल से गुजरेगी, FASTag और नंबर प्लेट की मदद से टोल की रकम अपने आप कट जाएगी।
लेकिन यह नई व्यवस्था देश के किन टोल प्लाजा पर शुरू होने जा रही है और अब तक कितने कॉन्ट्रैक्ट दिए जा चुके हैं?
17 टोल प्लाजा के कॉन्ट्रैक्ट जारी
सरकार ने देश के 17 टोल प्लाजा पर यह सिस्टम लगाने के कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। इनमें से पांच टोल प्लाजा पर यह सुविधा शुरू हो चुकी है। इस लिस्ट में गुजरात के सूरत का चोरयासी, दिल्ली का मुंडका, हरियाणा का घरौंडा और राजस्थान के मनोहरपुरा और दौलतपुरा टोल प्लाजा शामिल हैं।
बाकी जगहों में राजस्थान का शाहजहांपुर, तमिलनाडु के नेमिली-श्रीपेरंबुदूर, चेन्नासमुद्रम और परानूर, आंध्र प्रदेश के कासेपल्ली, अमाकथाडु और मरूर शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के चालाकवाड़ी और हिवरगांव पवासा, हरियाणा का बदरपुर-फरीदाबाद, गुजरात का बोरैच और असम का मदनपुर भी इस लिस्ट में हैं।
लेकिन क्या यह सिस्टम सिर्फ इन 17 टोल प्लाजा तक सीमित रहेगा, या सरकार इसे और जगहों पर भी शुरू करने की तैयारी कर रही है?
104 और टोल प्लाजा पर तैयारी
सड़क परिवहन मंत्रालय ने 104 और टोल प्लाजा पर इस टेक्नोलॉजी को शुरू करने के लिए बिड्स मांगी हैं। इससे पता चलता है कि सरकार बिना बैरियर वाले टोल सिस्टम को देश के ज्यादा हिस्सों तक ले जाने की तैयारी कर रही है।
लेकिन टोल सिस्टम में बदलाव के बीच FASTag Annual Pass को अब तक लोगों से कैसा रिस्पॉन्स मिला है?
77 लाख FASTag Annual Pass जारी
15 अगस्त 2025 को शुरू किए गए FASTag Annual Pass को लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। जून 2026 तक नॉन-कमर्शियल कार, जीप और वैन के लिए 77 लाख से ज्यादा Annual Pass जारी किए जा चुके हैं। इन पास के जरिए नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर 63 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए हैं।
कार, जीप और वैन से होने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल ट्रांजैक्शन में Annual Pass की हिस्सेदारी करीब 33% हो गई है। वहीं नेशनल हाईवे पर अब 98% से ज्यादा टोल कलेक्शन FASTag के जरिए किया जा रहा है।

