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AI की रेस में भारत से कितना आगे है अमेरिका? वहां 757 अरब डॉलर तो भारत में सिर्फ 15 अरब डॉलर का निवेश

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में भारत तेजी से आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन निवेश के मामले में अमेरिका और चीन से काफी पीछे है। 2013 से 2025 के बीच भारत में AI में 15 अरब डॉलर से ज्यादा निजी निवेश हुआ, जबकि अमेरिका में 757 अरब डॉलर लगा। अब सरकार के साथ अडानी, रिलायंस और टाटा जैसे बड़े कारोबारी समूह भी इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहे हैं।

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2026 में भारतीय फैमिली ऑफिस और एंजेल निवेशकों का AI कंपनियों में निवेश करीब 50% बढ़कर 76 करोड़ डॉलर पहुंच गया।
2026 में भारतीय फैमिली ऑफिस और एंजेल निवेशकों का AI कंपनियों में निवेश करीब 50% बढ़कर 76 करोड़ डॉलर पहुंच गया।

In Short

  • AI में भारत का निवेश 15 अरब डॉलर से ज्यादा, अमेरिका में 757 अरब डॉलर।
  • सरकार ने AI को बढ़ावा देने के लिए 10,371 करोड़ रुपये का मिशन शुरू किया।
  • अडानी, रिलायंस और टाटा जैसे बड़े समूह AI सेक्टर में निवेश बढ़ा रहे हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन निवेश के मामले में अमेरिका और चीन से काफी पीछे है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की AI इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 से 2025 के बीच भारत में AI सेक्टर में 15 अरब डॉलर से ज्यादा का निजी निवेश हुआ। वहीं, अमेरिका में 757 अरब डॉलर और चीन में करीब 132 अरब डॉलर का निवेश हुआ।

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AI को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा प्लान

भारत सरकार ने AI को बढ़ावा देने के लिए 10,371 करोड़ रुपये का IndiaAI Mission शुरू किया है। इसके तहत AI के लिए जरूरी कंप्यूटिंग सुविधाएं बढ़ाने, डेटा उपलब्ध कराने और देश में अपने AI मॉडल विकसित करने पर काम किया जा रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सरकारी निवेश से AI सेक्टर को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। इसके लिए निजी कंपनियों और बड़े निवेशकों की भागीदारी भी जरूरी है।

AI कंपनियों में बढ़ रहा निजी निवेश

भारत में बड़े कारोबारी परिवार और निवेशक अब AI कंपनियों में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक फैमिली ऑफिस और एंजेल निवेशकों की AI कंपनियों में फंडिंग करीब 50% बढ़कर 76 करोड़ डॉलर पहुंच गई है।

अजीम प्रेमजी से जुड़ी निवेश कंपनी Premji Invest ने जून में AI प्लेटफॉर्म Pramaana Labs की 2.7 करोड़ डॉलर की फंडिंग में हिस्सा लिया।

वहीं, रंजन पई की Claypond Capital ने जुलाई में AI कोडिंग प्लेटफॉर्म Emergent की 13 करोड़ डॉलर और सितंबर में Flam की 4 करोड़ डॉलर की फंडिंग में निवेश किया।

अडानी, रिलायंस और टाटा भी बढ़ा रहे निवेश

भारत के बड़े कारोबारी समूह भी AI सेक्टर में निवेश बढ़ा रहे हैं। गौतम अडानी, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा ग्रुप डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में पैसा लगा रहे हैं।

इन निवेशों से AI कंपनियों को जरूरी तकनीकी सुविधाएं मिल सकेंगी और स्टार्टअप्स को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

अमेरिका और चीन की बराबरी करना बड़ी चुनौती

भारत के सामने AI सेक्टर में निवेश की कमी के साथ आधुनिक तकनीकी सुविधाओं और विशेषज्ञों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां भी हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, AI कंपनियों को आगे बढ़ने के लिए लंबे समय तक निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में सरकारी मदद के साथ निजी निवेश बढ़ाना जरूरी है।

अगर भारत इन चुनौतियों से निपटता है, तो भारतीय AI कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत जगह बना सकती हैं।

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