अब मोबाइल से बने वीडियो बताएंगे सड़क पर कहां हैं गड्ढे, सरकार कर रही AI सिस्टम की टेस्टिंग
देश की ग्रामीण सड़कों पर गड्ढों और दरारों का पता लगाने के लिए सरकार एक नए AI सिस्टम की टेस्टिंग कर रही है। यह सिस्टम स्मार्टफोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो की मदद से सड़कों की खराबियों की पहचान करेगा। शुरुआती जांच के बाद अब देशभर में इसका ट्रायल शुरू हो गया है। जानिए यह तकनीक कैसे काम करेगी और इससे क्या बदलाव हो सकता है।

In Short
- ग्रामीण सड़कों पर गड्ढों और दरारों की पहचान के लिए सरकार AI सिस्टम की टेस्टिंग कर रही है।
- स्मार्टफोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो की मदद से AI सात तरह की खराबियों का पता लगाएगा।
- AI की रिपोर्ट की जांच इंजीनियर करेंगे और देशभर में ट्रायल के बाद सिस्टम लागू करने पर फैसला होगा।
देश की ग्रामीण सड़कों पर गड्ढों और दरारों का पता लगाने के लिए सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए एक नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जो स्मार्टफोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो की मदद से सड़कों की खराब हालत का पता लगा सकेगा। शुरुआती टेस्टिंग के बाद अब इस सिस्टम की देशभर में जांच की जा रही है।
क्या है सरकार का नया AI सिस्टम?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी सड़कों की जांच के लिए AI आधारित सिस्टम के ट्रायल को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
इस सिस्टम को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) और नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एजेंसी (NRIDA) मिलकर तैयार कर रहे हैं।
इसकी देशभर में जांच 1 सितंबर से शुरू हुई है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने संबंधित इकाइयों की पहचान की है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
फिलहाल PMGSY के तहत सड़कों की हालत जानने के लिए अधिकारी मौके पर जाकर जांच करते हैं। इसके बाद वे eMARG मोबाइल ऐप पर लोकेशन के साथ तस्वीरें अपलोड करते हैं।
नए सिस्टम में गाड़ियों पर लगे स्मार्टफोन से सड़कों के वीडियो रिकॉर्ड किए जाएंगे। AI इन वीडियो की जांच करके सड़क पर मौजूद सात तरह की खराबियों का पता लगाएगा।
इनमें गड्ढे, सड़क पर लंबी और आड़ी दरारें, किनारों का टूटना, सड़क की सतह का धंसना, मरम्मत वाले हिस्से और पेड़-पौधों के कारण रास्ते में आने वाली रुकावटें शामिल हैं।
फिलहाल वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए पहले से उपलब्ध मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल किया जा रहा है। आगे चलकर इसके लिए अलग से डैशकैम लगाने पर भी विचार किया जा सकता है।
क्या इंजीनियरों की जगह लेगा AI?
यह सिस्टम इंजीनियरों की जगह नहीं लेगा। AI की रिपोर्ट आने के बाद इंजीनियर मौके पर जाकर सड़क की खराबियों की जांच करेंगे। अगर AI और इंजीनियर की रिपोर्ट में अंतर मिलता है, तो उसकी दोबारा जांच की जाएगी। बड़े स्तर पर सिस्टम लागू करने से पहले जांच और समीक्षा की प्रक्रिया तय की जाएगी।
मंत्रालय इस बात पर भी विचार कर रहा है कि भविष्य में हर तीन महीने में सड़कों की हालत की जांच की जा सके। हालांकि, अभी इसकी अवधि तय नहीं हुई है।
कहां-कहां हो चुकी है टेस्टिंग?
इस साल की शुरुआत में पुणे, लखनऊ, असम के कामरूप और मेघालय के री-भोई जिले की छह सड़कों पर शुरुआती टेस्टिंग की गई थी। इसके बाद कानपुर जिले और भोपाल के बैरसिया ब्लॉक की सात सड़कों पर बेहतर AI मॉडल की जांच की गई।
देशभर में इस सिस्टम को लागू करने का फैसला मौजूदा जांच के नतीजों, तैयारियों और जरूरी मंजूरियों के बाद लिया जाएगा।

