AI की रेस में अमेरिका-चीन के बाद जापान और दक्षिण कोरिया ने दिखाई ताकत! भारत कहां खड़ा है? BCG रिपोर्ट में खुलासा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक रेस में अब सिर्फ अमेरिका और चीन ही नहीं, बल्कि जापान और दक्षिण कोरिया भी अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। BCG की AI Maturity Matrix 2026 रिपोर्ट में 79 अर्थव्यवस्थाओं की तैयारियों का आकलन किया गया है। इस मुकाबले में भारत के पास क्या अवसर हैं और किन चुनौतियों से निपटना होगा? जानिए रिपोर्ट की अहम बातें।

In Short
- जापान और दक्षिण कोरिया AI के अग्रणी देशों की कैटेगरी में शामिल।
- BCG ने 79 अर्थव्यवस्थाओं की AI तैयारियों का आकलन किया।
- भारत के लिए AI स्किल्स और उद्योगों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक रेस में अब अमेरिका और चीन के अलावा जापान और दक्षिण कोरिया भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। Boston Consulting Group (BCG) की नई रिपोर्ट में इन दोनों देशों को AI के लिए सबसे ज्यादा तैयार अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है। वहीं, भारत के सामने AI टैलेंट को आर्थिक फायदे में बदलने की चुनौती है।
दुनिया भर में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब कंपनियां सिर्फ AI पर पैसा नहीं लगा रहीं, बल्कि इससे कमाई और कामकाज की रफ्तार भी बढ़ा रही हैं। BCG की AI Maturity Matrix 2026 रिपोर्ट में 79 अर्थव्यवस्थाओं का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में कंपनियों का AI निवेश पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो गया।
जापान और दक्षिण कोरिया ने कैसे मारी बाजी?
BCG ने जापान और दक्षिण कोरिया को अमेरिका, चीन, कनाडा, सिंगापुर और ब्रिटेन के साथ AI के अग्रणी देशों की कैटेगरी में रखा है।
जापान ने डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक कंपनियों के साथ साझेदारी पर जोर दिया है। वहीं, दक्षिण कोरिया अपने AI मॉडल और कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने में निवेश कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के मुकाबले आठ अर्थव्यवस्थाएं AI तैयारी की बेहतर कैटेगरी में पहुंची हैं।
AI की रेस में भारत कहां खड़ा है?
भारत के पास बड़ी संख्या में तकनीकी विशेषज्ञ हैं, लेकिन चुनौती AI को अलग-अलग उद्योगों तक पहुंचाने की है। रिपोर्ट में भारत के Yuva AI for ALL कार्यक्रम का जिक्र है, जिसका लक्ष्य एक करोड़ लोगों को AI की शुरुआती ट्रेनिंग देना है।
इसके अलावा IndiaAI FuturesSkills के जरिए छोटे शहरों में AI लैब और प्रोफेशनल ट्रेनिंग की सुविधाएं बढ़ाने की योजना है। भारत के लिए IT, बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ाना अहम होगा।
AI से नौकरियों पर कितना असर पड़ेगा?
BCG के अनुमान के मुताबिक, अमेरिका में अगले दो से तीन साल में करीब आधी नौकरियों के काम करने का तरीका बदल सकता है। लंबी अवधि में लगभग 10% नौकरियों पर खत्म होने का खतरा हो सकता है।
हालांकि, ये अनुमान अमेरिकी बाजार के लिए हैं, भारत के लिए नहीं।
आगे कौन से देश होंगे मजबूत?
रिपोर्ट के मुताबिक, AI में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ अच्छे मॉडल बनाना काफी नहीं होगा। डेटा सेंटर, आधुनिक चिप, सस्ती बिजली, निवेश और सरकारी नीतियां भी जरूरी होंगी।
भारत के लिए असली चुनौती AI में उपलब्ध टैलेंट और निवेश का फायदा पूरी अर्थव्यवस्था तक पहुंचाना और कर्मचारियों को नई तकनीक के लिए तैयार करना है।

