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भारत की 5G और 6G टेक्नोलॉजी के पीछे IITian अभय करंदीकर, छात्र से वैज्ञानिक और नीति निर्माता तक का सफर जानिए

IIT Kanpur के छात्र से लेकर NITI Aayog के सदस्य तक अभय करंदीकर का सफर भारत की टेलीकॉम क्रांति से जुड़ा रहा है। वायरलेस नेटवर्क और ब्रॉडबैंड पर उनकी रिसर्च ने 5G टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में मदद की। अब वह भारत में 6G, AI और नई टेक्नोलॉजी के विकास से जुड़े अहम क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं।

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अभय करंदीकर
अभय करंदीकर

In Short

  • अभय करंदीकर ने IIT Kanpur से पढ़ाई के बाद IIT Bombay में करीब तीन दशक तक रिसर्च और टीचिंग की।
  • उनकी Frugal 5G रिसर्च का लक्ष्य कम लागत में ग्रामीण इलाकों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाना था।
  • अब NITI Aayog में वह टेलीकॉम, AI, सेमीकंडक्टर और 6G जैसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।

भारत की 5G और आने वाली 6G टेक्नोलॉजी के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले प्रोफेसर अभय करंदीकर का सफर एक छात्र से वैज्ञानिक, प्रोफेसर और फिर नीति निर्माता तक पहुंचा है। IIT Kanpur से शुरू हुई उनकी यात्रा IIT Bombay के रिसर्च लैब, टेलीकॉम स्टैंडर्ड और सरकारी जिम्मेदारियों से होते हुए अब NITI Aayog तक पहुंच चुकी है।

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IIT Kanpur से शुरू हुआ टेक्नोलॉजी का सफर

अभय करंदीकर ने 1988 में IIT Kanpur से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में MTech किया और 1994 में वहीं से PhD पूरी की। उनकी रिसर्च का क्षेत्र कम्युनिकेशन नेटवर्क था, जो आगे चलकर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट टेक्नोलॉजी का अहम हिस्सा बना।

1997 में वह IIT Bombay के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े। करीब तीन दशक तक उन्होंने वहां प्रोफेसर के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्होंने IIT Bombay के कंप्यूटर सेंटर का नेतृत्व किया, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख रहे और IIT Bombay रिसर्च पार्क के पहले Professor-in-Charge भी बने।

उनका रिसर्च वायरलेस नेटवर्क, नेटवर्क डिजाइन, सॉफ्टवेयर आधारित नेटवर्किंग और ग्रामीण इलाकों तक सस्ती इंटरनेट सुविधा पहुंचाने पर केंद्रित रहा।

Frugal 5G से भारत की टेलीकॉम टेक्नोलॉजी को मिली नई दिशा

करंदीकर की रिसर्च का एक अहम हिस्सा Frugal 5G था। इसका उद्देश्य कम लागत में ऐसे नेटवर्क तैयार करना था, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाया जा सके।

उन्होंने भारत की टेलीकॉम स्टैंडर्ड बॉडी Telecom Standards Development Society India (TSDSI) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसके शुरुआती सदस्यों में शामिल रहे।

उनकी टीम ने वायरलेस नेटवर्क और ब्रॉडबैंड आर्किटेक्चर से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी काम किया। ग्रामीण ब्रॉडबैंड से जुड़े उनके काम को 2017 में Mozilla Open Innovation Challenge अवॉर्ड भी मिला।

IIT Kanpur के डायरेक्टर से विज्ञान नीति तक का सफर

2018 में अभय करंदीकर IIT Bombay से अस्थायी रूप से IIT Kanpur के डायरेक्टर बने। उन्होंने सितंबर 2023 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली।

उनके कार्यकाल में IIT Kanpur में रिसर्च सुविधाओं, इनोवेशन और इंडस्ट्री सहयोग को बढ़ाने पर काम किया गया। संस्थान में रिसर्च और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए भी कई पहल की गईं।

अक्टूबर 2023 में उन्होंने केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) के सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में Anusandhan National Research Foundation और National Quantum Mission जैसे कार्यक्रम आगे बढ़े।

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अब NITI Aayog में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर फोकस

अप्रैल 2026 में अभय करंदीकर को NITI Aayog का सदस्य नियुक्त किया गया। यहां वह टेलीकम्युनिकेशन, वायरलेस नेटवर्किंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों से जुड़े काम देख रहे हैं।

IIT Kanpur के छात्र से IIT Bombay के प्रोफेसर और फिर देश की टेक्नोलॉजी नीति बनाने वाली संस्थाओं तक पहुंचा उनका सफर दिखाता है कि कैसे रिसर्च और शिक्षा का अनुभव राष्ट्रीय स्तर की टेक्नोलॉजी योजनाओं को दिशा दे सकता है।