शेयर बेचकर मिले 87 करोड़ रुपये, अब कंपनी के मेडिकल डिवाइस कारोबार में दोबारा निवेश की तैयारी- स्टॉक में हलचल
प्रमोटर की शेयर बिक्री के बाद कंपनी में अब एक बड़ा री-इन्वेस्टमेंट प्लान सामने आया है। शेयर बेचकर मिली रकम का इस्तेमाल कंपनी के मेडिकल डिवाइस कारोबार को बढ़ाने में किया जा सकता है।

हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी और टेक सेक्टर में काम करने वाली कंपनी, लॉर्ड्स मार्क इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Lords Mark Industries Ltd) ने आज अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी देते हुए बताया कि प्रमोटर सचिदानंद एच. उपाध्याय ने 18 सितंबर 2026 को कंपनी के 1,03,56,983 इक्विटी शेयर बेचे थे। इन शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये प्रति शेयर थी। यह बिक्री BSE पर ब्लॉक डील/ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए की गई, जिससे प्रमोटर को कुल 87.38 करोड़ रुपये की नेट रकम मिली और यह पैसा उनके बैंक खाते में जमा हो गया।
अब प्रमोटर ने कंपनी को इस रकम के इस्तेमाल को लेकर पुष्टि और प्रस्ताव दिया है। प्रमोटर ने कहा है कि शेयर बिक्री से मिली रकम के अधिकांश हिस्से को कंपनी की मेडिकल डिवाइस यूनिट के विस्तार में दोबारा निवेश किया जाएगा। यह निवेश कंपनी के मेडिकल डिवाइस कारोबार को बढ़ाने के लिए व्यावहारिक और स्वीकार्य तरीके से किया जाएगा। यानी शेयर बेचकर मिली बड़ी रकम का इस्तेमाल कंपनी के विस्तार और मेडिकल डिवाइस यूनिट को मजबूत करने में किया जा सकता है।
Lords Mark Industries Share Price
कंपनी का शेयर सुबह 10:28 बजे तक बीएसई पर 0.27% या 0.26 रुपये गिरकर 96 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
हाल ही में कंपनी दी थी ये जानकारी
कंपनी ने हाल ही में अपने फाइलिंग में बताया था कि उसने Centre for Materials for Electronic Technology (C-MET) के साथ मिलकर AI आधारित और रेडिएशन-फ्री ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग तकनीक को क्लिनिकल ट्रायल के अंतिम चरण तक पहुंचा दिया है। कंपनी के मुताबिक, इस तकनीक में हाई-प्रिसिजन थर्मल सेंसर और AI आधारित तापमान मैपिंग का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ब्रेस्ट में कैंसर से जुड़ी असामान्य तापमान गतिविधियों की पहचान की जा सके।
यह तकनीक नॉन-इनवेसिव, दर्द रहित और पोर्टेबल है। भारत में इसके क्लिनिकल ट्रायल पूरे हो चुके हैं और ट्रायल के दौरान जांच किए गए मामलों की सटीक पहचान हुई है।
कंपनी ने बताया कि कैंसर की सेल-लेवल डिटेक्शन के लिए Phase 2 ट्रायल जनवरी 2027 से भारत, अमेरिका, यूरोप और ग्रेट ब्रिटेन में शुरू करने की योजना है। इसमें करीब 98% एक्यूरेसी का लक्ष्य रखा गया है। टेक्निकल कमेटी ने अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और यूरोप में फाइनल क्लिनिकल ट्रायल कराने को मंजूरी दे दी है, हालांकि संबंधित देशों की रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करना होगा। कई मान्यता प्राप्त मेडिकल डिवाइस कंपनियों ने भी ट्रायल में शामिल होने में रुचि दिखाई है।

