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इंश्योरेंस खरीदना होगा आसान, IRDAI ने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नए बदलावों का प्रस्ताव रखा

IRDAI ने इंश्योरेंस सेक्टर में बड़े सुधारों का प्रस्ताव रखा है। नए कंसल्टेशन पेपर में कमीशन पारदर्शिता, मिस-सेलिंग पर रोक, डिजिटल इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म और ग्राहक सुरक्षा से जुड़े कई बदलाव सुझाए गए हैं। रेगुलेटर का कहना है कि इन कदमों से बीमा खरीदने की प्रक्रिया आसान, ज्यादा पारदर्शी और ग्राहकों के लिए बेहतर हो सकती है।

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मिस-सेलिंग रोकने के लिए बिक्री को व्यक्ति से जोड़ने और वॉल्यूम इंसेंटिव पर रोक का प्रस्ताव।
मिस-सेलिंग रोकने के लिए बिक्री को व्यक्ति से जोड़ने और वॉल्यूम इंसेंटिव पर रोक का प्रस्ताव।

In Short

  • IRDAI ने इंश्योरेंस वितरण व्यवस्था में बदलाव के लिए नया कंसल्टेशन पेपर जारी किया है।
  • कमीशन की जानकारी, मिस-सेलिंग रोकने और ग्राहक सुरक्षा बढ़ाने के प्रस्ताव शामिल हैं।
  • Bima Sugam जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इंश्योरेंस खरीदना और सर्विस लेना आसान बनाने की योजना है।

भारतीय बीमा नियामक IRDAI ने इंश्योरेंस बेचने और सर्विस देने के तरीके में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। रेगुलेटर ने “Recalibrating Economics of Insurance Distribution” नाम से एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसका मकसद बीमा वितरण व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और ग्राहकों के लिए आसान बनाना है। IRDAI ने इन प्रस्तावों पर 25 अक्टूबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं।

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पॉलिसी बेचने वाले की जानकारी और कमीशन में बढ़ेगी पारदर्शिता

IRDAI ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है, ताकि ग्राहकों को साफ पता चल सके कि वह अपनी पॉलिसी किस माध्यम या एजेंट के जरिए खरीद रहे हैं।

इसके अलावा रेगुलेटर ने इंश्योरेंस कंपनियों और बड़े डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म से कमीशन स्ट्रक्चर की जानकारी आसान भाषा में बताने का प्रस्ताव रखा है। कुछ कमर्शियल इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में कमीशन की जानकारी देना भी जरूरी किया जा सकता है।

IRDAI का कहना है कि इससे ग्राहक समझ सकेंगे कि इंश्योरेंस प्रीमियम में डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट कितनी शामिल है और वे ज्यादा जानकारी के साथ फैसला ले पाएंगे।

कमीशन तय करने के तरीके में भी बदलाव का प्रस्ताव है। इसमें इंश्योरेंस का प्रकार, प्रोडक्ट की जटिलता, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल और ग्राहक को दी जाने वाली सर्विस जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।

मिस-सेलिंग पर रोक और डिजिटल इंश्योरेंस को बढ़ावा देने की तैयारी

IRDAI ने गलत तरीके से इंश्योरेंस बेचने यानी मिस-सेलिंग को रोकने के लिए भी कई कदम सुझाए हैं। प्रस्ताव में ग्राहक की जरूरत और उपयुक्तता को रिकॉर्ड करने, सभी तरह के इंसेंटिव को कमीशन के दायरे में लाने और मिस-सेलिंग के मामलों में जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।

रेगुलेटर ने बैंक और NBFC कर्मचारियों को इंश्योरेंस बेचने पर वॉल्यूम या रिवॉर्ड आधारित इंसेंटिव पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा पॉलिसी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान को पॉलिसी से जोड़ने और मिस-सेलिंग मामलों की जानकारी सार्वजनिक करने का सुझाव भी दिया गया है।

IRDAI ने इंश्योरेंस को दूसरे वित्तीय प्रोडक्ट्स के साथ जबरदस्ती जोड़ने यानी फोर्स्ड बंडलिंग पर भी सख्ती का प्रस्ताव रखा है। इससे ग्राहकों को ज्यादा विकल्प और स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है।

रेगुलेटर ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इसमें Bima Sugam जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और Public Insurance Registry के इस्तेमाल को बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। इससे ग्राहक इंश्योरेंस खरीदने, तुलना करने और सर्विस लेने की प्रक्रिया को आसान तरीके से पूरा कर सकेंगे।

IRDAI का कहना है कि इन बदलावों से इंश्योरेंस सेक्टर में लागत कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ये अभी सिर्फ प्रस्ताव हैं और अंतिम नियम बनने से पहले हितधारकों के सुझावों पर विचार किया जाएगा।

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।