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AI ने बदला शुरुआती नौकरियों का रास्ता, कंपनियों के सामने नई टेंशन

एआई अब सिर्फ काम आसान करने वाला टूल नहीं रह गया है, बल्कि यह नौकरियों और करियर की शुरुआत का तरीका भी बदल रहा है। सवाल यह है कि जब शुरुआती रोल्स ही बदलने लगेंगे, तो आगे चलकर बड़े लीडर कहां से तैयार होंगे? पूरी रिपोर्ट पढ़िए।

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AI Generated Image

In Short

  • एआई की वजह से शुरुआती नौकरियों में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है।
  • पैसे, कम्युनिकेशन, ऑफिस के काम और पढ़ाई-लिखाई से जुड़े क्षेत्रों में एआई का असर ज्यादा दिख सकता है।
  • अगर छोटे रोल कम हुए, तो आगे अच्छे मैनेजर और बड़े लीडर तैयार करना मुश्किल हो सकता है।

हर बड़े करियर की शुरुआत अक्सर छोटे रोल से ही होती है। इसी दौर में लोग काम सीखते हैं, गलतियां सुधारते हैं और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। लेकिन अब एआई के आने से काम करने का तरीका बदल रहा है। ऐसे में सवाल है कि इसका सबसे ज्यादा असर शुरुआती नौकरियों पर कैसे पड़ सकता है?

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एआई से शुरुआती नौकरियों पर असर

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई का सबसे ज्यादा असर शुरुआती नौकरियों पर दिख सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 37 फीसदी युवा ऐसे काम कर रहे हैं, जिनमें एआई आने से काम करने का तरीका बदल सकता है।

कुछ जगहों पर यह बदलाव और ज्यादा दिख सकता है। पूर्वी एशिया में 75 फीसदी, उत्तरी अमेरिका में 69 फीसदी और यूरोप में 63 फीसदी युवा कर्मचारियों के काम पर एआई का असर पड़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी की नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन कई काम पहले जैसे नहीं रहेंगे।

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इन जगहों में ज्यादा बदलाव दिख सकता है

रिपोर्ट के मुताबिक, पैसे और बैंक से जुड़े काम, जानकारी और कम्युनिकेशन वाले काम, ऑफिस से जुड़ी सेवाएं, साइंस और पढ़ाई-लिखाई से जुड़े कामों में एआई का असर ज्यादा दिख सकता है। इन जगहों पर डेटा देखना, रिपोर्ट बनाना, रिसर्च करना, ईमेल लिखना और रोज के कई छोटे-छोटे काम एआई से जल्दी कराए जा सकते हैं।

वहीं खेती, मकान-सड़क बनाने वाले काम और खाने-पीने से जुड़ी सेवाओं में एआई का असर कम दिख सकता है। इसकी वजह यह है कि इन कामों में लोगों का मौके पर मौजूद रहकर काम करना ज्यादा जरूरी होता है।

काम तेज हुआ, लेकिन दबाव भी बढ़ा

एआई से काम जल्दी जरूर होने लगा है, लेकिन इससे कर्मचारियों की परेशानी पूरी तरह कम नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 68 फीसदी शुरुआती लेवल के कर्मचारियों ने माना कि एआई की मदद से उनका काम करने का तरीका बेहतर हुआ है।

लेकिन 45 फीसदी कर्मचारियों का कहना है कि एआई आने के बाद उनसे पहले से ज्यादा काम करने की उम्मीद की जा रही है। यानी एआई मदद तो कर रहा है, लेकिन साथ में काम का बोझ भी बढ़ा रहा है।

आगे के लीडर कैसे तैयार होंगे?

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कंपनियों के सामने अब बड़ा सवाल यह है कि कौन सा काम एआई से कराया जाए और कौन सा काम नए लोगों को सीखने के लिए दिया जाए। अगर कंपनियां शुरुआती नौकरियों को सिर्फ खर्च समझकर कम करने लगेंगी, तो आगे चलकर अच्छे मैनेजर और बड़े अधिकारी तैयार करना मुश्किल हो सकता है।

कई बड़े कारोबारी भी मानते हैं कि जूनियर रोल्स को खत्म करना सही रास्ता नहीं है। इन्हीं छोटे रोल्स से नए लोग काम सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं। इसलिए एआई का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन नए लोगों को सीखने और बढ़ने का मौका देना भी उतना ही जरूरी है।