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EPF की भूली हुई बचत, 30.91 लाख खातों में पड़े हैं ₹9,330 करोड़

देश में कई लोगों की रिटायरमेंट सेविंग्स आज भी पुराने EPF खातों में पड़ी हैं। एक RTI जवाब से इससे जुड़ी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, जो बताती है कि भूली हुई PF रकम का मामला कितना बड़ा है। पूरी रिपोर्ट में जानिए इसकी वजह और आंकड़े।

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In Short

  • एक साल में करीब 92,000 खाते कम हुए हैं और इनमें पड़ी रकम भी 851 करोड़ रुपये घटी है।
  • 30.91 लाख पुराने EPF खातों में 9,330 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम पड़ी है, जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ।
  • यह पैसा कर्मचारियों और उनके परिवारों का है, लेकिन नौकरी बदलने, खाता ट्रांसफर न कराने या नॉमिनी की प्रक्रिया पूरी न होने से रकम अटक जाती है।

देश में कई लोगों की रिटायरमेंट सेविंग्स अब भी पुराने EPF खातों में पड़ी हैं। नौकरी बदलने, खाता ट्रांसफर न कराने या परिवार को जानकारी न होने की वजह से ये पैसे सालों तक खाते में ही रह जाते हैं। अब एक RTI जवाब से इससे जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है। सबसे पहले जानिए ऐसे कितने खाते हैं और उनमें कितनी रकम जमा है।

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30.91 लाख EPF खातों में 9,330 करोड़ रुपये

EPFO के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक देशभर में 30,91,862 ऐसे EPF खाते थे, जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ। इन खातों में कुल 9,330 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जमा है। यह पैसा उन लोगों का है, जिन्होंने नौकरी के दौरान PF जमा किया था, लेकिन बाद में उसे न निकाला और न ही नए खाते में जोड़ा।

कई बार नौकरी बदलने के बाद पुराना PF खाता पीछे छूट जाता है। कुछ लोगों को पुराने खाते की डिटेल याद नहीं रहती। कई मामलों में कर्मचारी की मौत के बाद परिवार या नॉमिनी जरूरी कागजी काम पूरा नहीं कर पाते। इसी वजह से यह रकम खाते में पड़ी रह जाती है।

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पिछले साल से कम हुए खाते और रकम

31 मार्च 2025 तक EPFO के पास ऐसे 31.83 लाख खाते थे। इन खातों में 10,181 करोड़ रुपये जमा थे। यानी एक साल में करीब 92,000 खाते कम हुए हैं। इसी दौरान इस तरह पड़ी रकम भी 851 करोड़ रुपये घट गई है।

हालांकि कमी जरूर आई है, लेकिन 9,330 करोड़ रुपये अब भी बहुत बड़ी रकम है। यह पैसा सीधे कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़ा है। अगर लोगों को सही जानकारी और आसान रास्ता मिले, तो यह पैसा अपने असली मालिकों तक पहुंच सकता है।

3 IIT बनाने जितनी बड़ी रकम

9,330 करोड़ रुपये कितनी बड़ी रकम है, इसे इस तरह समझ सकते हैं कि इससे करीब तीन IIT बनाए जा सकते हैं। साल 2014 के एक सरकारी अनुमान के हिसाब से एक IIT बनाने पर करीब 1,750 करोड़ रुपये खर्च होते थे। महंगाई जोड़कर 2026 में यह खर्च करीब 2,934 करोड़ रुपये माना जा सकता है।

इस हिसाब से EPF खातों में पड़ी रकम से तीन IIT बनने के बाद भी 500 करोड़ रुपये से ज्यादा बच सकते हैं। यह तुलना सिर्फ यह समझाने के लिए है कि खातों में पड़ी रकम कितनी बड़ी है।

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RTI में पूरी जानकारी नहीं मिली

RTI में पिछले पांच साल का डेटा मांगा गया था, लेकिन EPFO ने सिर्फ 2025 और 2026 की जानकारी दी। EPFO का कहना है कि इस तरह के खातों को देखने वाली अलग सेल 2025-26 में बनी है, इसलिए पुराने सालों का डेटा उसके पास नहीं है।
 
EPFO ने यह भी नहीं बताया कि इनमें से कितने खाते आधार से जुड़े हैं और उनमें कितनी रकम पड़ी है। संगठन ने कहा कि यह जानकारी अलग तरीके से रखी जाती है, इसलिए साझा नहीं की गई। कुल मिलाकर PF सिस्टम को आसान और डिजिटल बनाने की कोशिश हो रही है, लेकिन लोगों को उनकी भूली हुई बचत से जोड़ना अब भी बड़ा काम है।
 

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।