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AI का बढ़ रहा क्रेज, फिर भी भारत की 75% कंपनियां इस्तेमाल से दूर- क्या है वजह?

भारत में AI को लेकर संभावनाएं बड़ी हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल अभी हर कंपनी और कर्मचारी तक नहीं पहुंचा है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में AI अपनाने की मौजूदा स्थिति, नौकरियों पर इसके असर और भारत के सामने मौजूद अवसरों को लेकर कई अहम बातें बताई हैं।

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In Short

  • भारत की करीब 75% कंपनियां अभी भी AI का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं।
  • 14% भारतीय कर्मचारी ऐसी नौकरियों में हैं, जहां AI उनके काम और प्रोडक्टिविटी को बेहतर कर सकता है।
  • वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारत के पास AI के लिए मजबूत आधार है, लेकिन सही पॉलिसी और ज्यादा इस्तेमाल जरूरी होगा।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर तेजी से चर्चा बढ़ रही है, लेकिन कंपनियों के स्तर पर इसका इस्तेमाल अभी भी सीमित है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारत में करीब 75% कंपनियां अब भी AI का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं। देश में AI को अपनाने और जरूरत के हिसाब से ढालने के लिए मजबूत आधार मौजूद है, लेकिन अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों में इसका इस्तेमाल एक जैसा नहीं है।

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भारत के पास AI के लिए मजबूत आधार

वर्ल्ड बैंक ने अपने India Development Update में कहा कि भारत के पास बड़ा IT सेक्टर, मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और अच्छी तरह स्थापित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है। ये सभी चीजें देश में AI को अपनाने और उसके इस्तेमाल को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, अभी AI का इस्तेमाल मुख्य रूप से फॉर्मल कंपनियों के बीच बढ़ रहा है। छोटी कंपनियां, खासकर इनफॉर्मल सेक्टर की फर्म और बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी भी AI का सीमित इस्तेमाल कर रहे हैं।

14% भारतीय कर्मचारियों के काम में मदद कर सकता है AI

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारत के 14% कर्मचारी ऐसी नौकरियों में हैं, जहां AI उनके काम में मदद कर सकता है और उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है। हालांकि, बैंक ने यह भी साफ किया कि किसी नौकरी का AI के संपर्क में होना जरूरी नहीं कि उस नौकरी को AI से बदल दिया जाएगा।

जनरेटिव AI के आने के बाद AI से ज्यादा प्रभावित सेक्टर्स में नौकरियां गई भी हैं और नई नौकरियां बनी भी हैं। खासतौर पर एंट्री-लेवल नौकरियों में बदलाव ज्यादा दिखाई दे रहा है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, अभी तक की स्थिति बड़े स्तर पर नौकरियां खत्म होने के बजाय वर्कफोर्स एडजस्टमेंट और काम के बंटवारे में बदलाव की तरफ इशारा करती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

AI से बढ़ सकती है प्रोडक्टिविटी

वर्ल्ड बैंक का कहना है कि AI कर्मचारियों और कंपनियों को काम ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से करने में मदद कर सकता है। इससे प्रोडक्टिविटी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इसका फायदा अपने आप नहीं मिलेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि AI को कितने बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, कर्मचारियों के पास जरूरी स्किल्स कितनी हैं और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर कितना उपलब्ध है।

भारत को इन क्षेत्रों पर करना होगा काम

भारत में AI की क्षमता का पूरा फायदा उठाने के लिए वर्ल्ड बैंक ने तीन क्षेत्रों पर जोर दिया है—AI को ज्यादा से ज्यादा अपनाना, उसके इस्तेमाल को तेजी से अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ाना और चुनिंदा फ्रंटियर डेवलपमेंट पर काम करना।

इसके लिए ज्यादा फॉर्मल और इनफॉर्मल कंपनियों के साथ कर्मचारियों को AI से जोड़ना होगा। साथ ही देशभर में AI एप्लिकेशन का इस्तेमाल बढ़ाने और कंप्यूट व डेटा सेंटर क्षमता जैसे क्षेत्रों में प्राइवेट निवेश आकर्षित करने की जरूरत होगी। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारत AI से फायदा उठाने की मजबूत स्थिति में है, लेकिन सही पॉलिसी इसमें बड़ा अंतर पैदा करेगी।

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