Indiabulls को लेकर बड़ी खबर, EOW ने कहा सभी 197 लोन चुकाए गए; शेयर में हलचल
कंपनी ने आज अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में बाजार खुलने से थोड़ी देर पहले निवेशकों को बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट में कंपनी के प्रमोटर से जुड़े मामले की सुनवाई के बीच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 11 अगस्त 2026 को अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है।

Indiabulls Ltd का शेयर आज निवेशकों के रडार पर है। कंपनी ने आज अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में बाजार खुलने से थोड़ी देर पहले निवेशकों को बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट में कंपनी के प्रमोटर से जुड़े मामले की सुनवाई के बीच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 11 अगस्त 2026 को अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। यह मामला 2019 में Citizens Whistle Blower Forum की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है।
कंपनी का शेयर आज बीएसई पर 1.67% या 0.45 रुपये गिरकर 26.51 रुपये पर बंद हुआ और एनएसई पर शेयर 2.41% या 0.65 रुपये टूटकर 26.33 रुपये पर बंद हुआ।
फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि याचिका में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन Indiabulls Housing Finance Limited (अब Sammaan Capital Limited) ने पांच उधारकर्ता समूहों को लोन देने में अनियमितताएं कीं और तत्कालीन प्रमोटर के साथ कथित quid pro quo था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 फरवरी 2024 को इन आरोपों को सबूतों से साबित नहीं माना और याचिका खारिज कर दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इस मामले से जुड़ी जांच में दिल्ली EOW ने 15 दिसंबर 2025 को IPC की धारा 420, 406 और 120-B के तहत FIR भी दर्ज की थी।
EOW की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के सभी 197 लोन अकाउंट पूरी तरह चुका दिए गए हैं और बंद हो चुके हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट N.D. Kapur & Co. के 11 दिसंबर 2025 के प्रमाणपत्र के आधार पर यह पुष्टि हुई कि सभी लोन की रकम कंपनी के बैंक खातों में वापस आई। कंपनी ने इन लोन से ब्याज और फीस के तौर पर 2,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हासिल की।
DLF, Vatika, Chordia और Americorp समूहों से जुड़े मामलों में EOW ने कहा कि कंपनी को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। लोन देने और वापस मिलने की पूरी प्रक्रिया कंपनी की किताबों और बैंक खातों में दर्ज मिली। SEBI की जांच, उसके Investigation Department और forensic accounting wing की जांच तथा National Housing Bank की Special Audit में भी लोन की रकम के डायवर्जन या असामान्य तरीके से रोके जाने का कोई सबूत नहीं मिला।
कथित quid pro quo के आरोपों पर भी EOW की रिपोर्ट में कहा गया कि तत्कालीन प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं में किए गए निवेश संबंधित कंपनियों से लोन लेने से 17 महीने से लेकर दो साल से ज्यादा पहले किए गए थे। इसलिए लोन की रकम का इस्तेमाल उन निवेशों के लिए किए जाने का आरोप साबित नहीं हुआ। जांच में कंपनी से लिए गए लोन और इन संस्थाओं के बीच कोई वित्तीय ट्रेल या दस्तावेजी सबूत भी नहीं मिला। प्रोफेशनल फीस से जुड़े एक भुगतान के मामले में टैक्स इनवॉइस, बैंक रिकॉर्ड, लेजर एंट्री और ऑडिटेड वित्तीय विवरण मिले। SEBI ने भी यह निष्कर्ष नहीं निकाला कि यह भुगतान प्रमोटर के निजी फायदे के लिए किया गया था। Americorp से जुड़ी दोनों NBFC संस्थाओं के निवेश भी FY2018-19 तक पूरी तरह वापस हो चुके थे।
Reliance ADA Group से जुड़े सभी 7 लोन, जिनकी कुल रकम 1,574 करोड़ रुपये थी, भी पूरी तरह चुका दिए गए हैं और बंद हो चुके हैं। हालांकि, EOW ने कहा है कि इस समूह से जुड़ी जांच अभी जारी है।
Yes Bank मामले को लेकर कंपनी और याचिका में कथित संबंध का भी जिक्र किया गया था। इस मामले में CBI ने Mumbai की Special PMLA Court में आगे की जांच करने की अनुमति मांगी है और यह आवेदन अभी लंबित है। CBI ने 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में दिए शॉर्ट एफिडेविट में कहा था कि Yes Bank के पूर्व प्रमोटरों से जुड़े दोनों मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और संबंधित अदालतों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। CBI के मुताबिक, इन मामलों में Indiabulls Housing Finance या उसके पूर्व प्रमोटरों की ओर से फंड डायवर्ट या siphon करने का कोई सीधा आरोप नहीं था।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित लोन सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत Credit Committee ने मंजूर किए थे। इस कमेटी में कंपनी के अधिकारी शामिल थे और इसकी अध्यक्षता CEO करते थे। तत्कालीन चेयरमैन Sameer Gehlaut इस Credit Committee के सदस्य नहीं थे और लोन की मंजूरी या सैंक्शन प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। वह 2023 में कंपनी के प्रमोटर पद से हट चुके हैं।
कंपनी ने कहा है कि Indiabulls Ltd इस PIL में शामिल नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में बाकी बिंदुओं से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट पर विचार कर सकता है। जरूरत के मुताबिक कंपनी स्टॉक एक्सचेंजों को Regulation 30 के तहत आगे की जानकारी देती रहेगी।

