scorecardresearch

सरकार क्यों चाहती है घरों में एलपीजी की जगह PNG हो? जानिए ये 4 बड़े कारण

नई गैस नीति के तहत सरकार का PNG पर फोकस ऊर्जा सुरक्षा, कम लागत और साफ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, अनिवार्य बदलाव से उपभोक्ताओं की सुविधा और विकल्पों को लेकर बहस भी तेज हो सकती है।

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • सरकार ने PNG नेटवर्क वाले इलाकों में 3 महीने के भीतर LPG से शिफ्ट अनिवार्य किया
  • ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने के लिए पाइप्ड गैस पर जोर
  • PNG सस्ता, सुविधाजनक और कम प्रदूषण वाला विकल्प माना जा रहा है

केंद्र सरकार ने घरेलू कुकिंग फ्यूल नीति में बड़ा बदलाव करते हुए LPG से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की ओर शिफ्ट को तेज कर दिया है। Natural Gas and Petroleum Products Distribution Order 2026 के तहत अब जिन इलाकों में PNG नेटवर्क मौजूद है, वहां नोटिस मिलने के तीन महीने के अंदर यूजर्स को पाइप्ड गैस अपनानी होगी, वरना LPG सप्लाई बंद की जा सकती है।

advertisement

सम्बंधित ख़बरें

सरकार ने साफ किया है कि केवल उन्हीं मामलों में छूट मिलेगी, जहां तकनीकी वजहों से PNG कनेक्शन देना संभव नहीं है और इसकी पुष्टि अधिकृत गैस एजेंसी करेगी।

ऊर्जा सुरक्षा बनी सबसे बड़ी वजह

इस नीति बदलाव के पीछे सबसे अहम कारण ऊर्जा सुरक्षा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास सप्लाई जोखिम ने भारत की आयात निर्भरता को उजागर किया है।

भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 60% और प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में पाइपलाइन आधारित सप्लाई को ज्यादा सुरक्षित और स्थिर विकल्प माना जा रहा है।

सरकार पीएनजी पर क्यों दे रही है इतना जोर?

1. LPG vs PNG: देश में करीब 33 करोड़ LPG उपभोक्ता हैं, जबकि PNG यूजर्स की संख्या सिर्फ 1.62 करोड़ है। हालांकि, सरकार के मुताबिक लगभग 60 लाख LPG उपभोक्ता ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां पहले से PNG नेटवर्क मौजूद है- यानी ये तुरंत शिफ्ट हो सकते हैं। हाल के हफ्तों में लाखों नए PNG कनेक्शन जारी हुए हैं, जिससे शहरी इलाकों में इस बदलाव की रफ्तार तेज हुई है।

2. खर्च और सब्सिडी पर असर: PNG को बढ़ावा देने के पीछे लागत भी बड़ी वजह है। LPG में आयात, बॉटलिंग, ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी जैसे कई चरण होते हैं, जिससे कीमत बढ़ती है। वहीं PNG पाइपलाइन से सीधे सप्लाई होने के कारण कई शहरों में सस्ता पड़ता है।

इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी कम होगा, खासकर प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं के तहत।

3. सुविधा और पर्यावरण पर फोकस: PNG में सिलेंडर बुकिंग, स्टोरेज और डिलीवरी की झंझट खत्म हो जाती है, जिससे यह ज्यादा सुविधाजनक है। साथ ही, यह LPG और कोयले की तुलना में ज्यादा क्लीन फ्यूल है, जो शहरी प्रदूषण कम करने में मदद करता है।

4. नेशनल गैस ग्रिड पर जोर: सरकार दिल्ली-NCR, गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी और हरियाणा जैसे राज्यों में पाइपलाइन नेटवर्क तेजी से बढ़ा रही है जिसका लक्ष्य एक मजबूत नेशनल गैस ग्रिड बनाना है जिससे सप्लाई कई स्रोतों से सुनिश्चित हो सके।