रिटायरमेंट या नौकरी छूटने के बाद कब बंद होता है EPF पर ब्याज? जानिए पूरा नियम
क्या आपका EPF अकाउंट अब भी ब्याज कमा रहा है या चुपचाप इनऑपरेटिव हो चुका है? रिटायरमेंट, नौकरी छूटने या विदेश जाने के बाद EPF से जुड़े कुछ नियम बदल जाते हैं, जिनकी जानकारी नहीं होने पर नुकसान हो सकता है। जानिए किन परिस्थितियों में EPF पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है।

In Short
- हर EPF खाते पर हमेशा ब्याज नहीं मिलता, कुछ मामलों में यह बंद हो सकता है।
- रिटायरमेंट या विदेश बसने के बाद कुछ समय बीतने पर EPF अकाउंट इनऑपरेटिव हो सकता है।
- नौकरी बदलने या कुछ समय बेरोजगार रहने से EPF पर ब्याज तुरंत बंद नहीं होता।
EPF Interest Rules: EPF खाते में पैसा जमा होने का मतलब यह नहीं कि उस पर हमेशा ब्याज मिलता रहेगा। कुछ खास परिस्थितियों में पैसा खाते में रहने के बावजूद ब्याज मिलना बंद हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि EPFO के नियम क्या कहते हैं और किन स्थितियों में आपका EPF अकाउंट इनऑपरेटिव माना जाता है।
कब इनऑपरेटिव हो जाता है EPF अकाउंट?
EPFO के नियमों के मुताबिक, अगर रिटायरमेंट, स्थायी रूप से विदेश जाने या सदस्य की मृत्यु के बाद लगातार तीन साल तक EPF खाते में कोई दावा नहीं किया जाता और कोई नया योगदान भी नहीं आता, तो खाते को इनऑपरेटिव (Inoperative) माना जाता है। इसके बाद उस खाते पर ब्याज मिलना बंद हो सकता है।
रिटायरमेंट की उम्र से तय होता है ब्याज मिलने का समय
अगर कोई सदस्य 55 वर्ष या उससे अधिक उम्र में रिटायर होता है, तो उसके EPF खाते पर रिटायरमेंट के बाद अगले तीन साल तक ब्याज मिलता रहता है। इसके बाद खाता इनऑपरेटिव होने पर ब्याज बंद हो सकता है।
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वहीं, अगर कोई सदस्य 55 साल से पहले रिटायर होता है, तो उसके खाते पर 58 वर्ष की उम्र तक ब्याज मिलता रहेगा। इसके बाद तीन साल की अवधि पूरी होने पर खाता इनऑपरेटिव माना जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति 60 साल की उम्र में रिटायर होता है, तो उसके खाते पर 63 साल की उम्र तक ब्याज मिलता रहेगा।
क्या नौकरी बदलने या बेरोजगार होने पर ब्याज बंद हो जाता है?
नहीं। सिर्फ नौकरी बदलने, कुछ समय के लिए बेरोजगार रहने या करियर ब्रेक लेने से EPF पर ब्याज बंद नहीं होता। जब तक खाता इनऑपरेटिव होने की तय अवधि तक नहीं पहुंचता, तब तक उस पर ब्याज मिलता रहता है।
NRI के लिए क्या है नियम?
सिर्फ NRI बन जाने से ब्याज बंद नहीं होता। लेकिन अगर कोई सदस्य स्थायी रूप से विदेश चला जाता है और तय अवधि तक EPF की राशि पर दावा नहीं करता, तो नियमों के अनुसार खाता इनऑपरेटिव होने के बाद ब्याज मिलना बंद हो सकता है। इसलिए विदेश जाने के बाद अपने EPF खाते की स्थिति की जांच करना जरूरी है।
EPF पर ब्याज कैसे जोड़ा जाता है?
EPF पर ब्याज हर महीने खाते के क्लोजिंग बैलेंस के आधार पर जोड़ा जाता है। नया योगदान जिस महीने जमा होता है, उसी महीने से उस पर ब्याज मिलना शुरू हो जाता है। वहीं, निकासी होने पर उसी महीने से बैलेंस कम माना जाता है। पूरे वित्त वर्ष का ब्याज जोड़कर बाद में खाते में क्रेडिट किया जाता है।
हर बार EPF निकालना सही फैसला नहीं
अगर आप नौकरी बदल रहे हैं या कुछ समय के लिए नौकरी से बाहर हैं, तो हर बार EPF निकालना जरूरी नहीं है। ऐसे समय में EPF ट्रांसफर करने या खाते में पैसा रहने देने से रिटायरमेंट फंड बना रहता है और उस पर ब्याज भी मिलता रहता है। हालांकि, जब खाता इनऑपरेटिव होने की स्थिति के करीब पहुंच जाए, तब यह सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए कि पैसा खाते में रहने देना बेहतर है या किसी दूसरे निवेश विकल्प में लगाना।

