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ट्रैवल इंश्योरेंस लेते समय इन गलतियों से बचें, वरना विदेश में फंस सकता है बड़ा खर्च

विदेश यात्रा के दौरान ट्रैवल इंश्योरेंस लेना आसान लगता है, लेकिन क्लेम के समय इसकी असली अहमियत सामने आती है। पॉलिसीबाजार के बिजनेस हेड कपाड़िया ने यात्रियों को सलाह दी है कि सिर्फ कवर राशि नहीं बल्कि सब-लिमिट, मेडिकल हिस्ट्री और इवैक्यूएशन जैसी सुविधाओं को भी अच्छी तरह समझें।

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In Short

  • ट्रैवल इंश्योरेंस खरीदते समय सिर्फ बड़ा कवर अमाउंट देखना काफी नहीं है। पॉलिसी की सब-लिमिट, शर्तें और क्लेम नियमों को समझना जरूरी है।
  • प्री-एग्जिस्टिंग बीमारी की जानकारी देना बेहद अहम है। जानकारी छिपाने पर विदेश में इमरजेंसी के दौरान इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
  • मेडिकल इवैक्यूएशन और बैगेज कवर पर ध्यान दें। सही पॉलिसी चुनने से आपात स्थिति, सामान खोने और यात्रा में देरी जैसी परेशानियों में मदद मिल सकती है।

विदेश यात्रा के दौरान ट्रैवल इंश्योरेंस एक जरूरी सुरक्षा कवच माना जाता है, लेकिन कई बार कम कीमत वाली पॉलिसी बाद में परेशानी खड़ी कर सकती है। सही इंश्योरेंस चुनने के लिए सिर्फ बड़े कवर अमाउंट को देखना काफी नहीं है। पॉलिसी के नियम, सब-लिमिट, पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े क्लॉज और मेडिकल इवैक्यूएशन जैसी सुविधाओं को समझना भी जरूरी है।

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पॉलिसीबाजार के बिजनेस हेड कपाड़िया ने यात्रियों को सलाह दी है कि ट्रैवल इंश्योरेंस खरीदने से पहले उसके छोटे-छोटे नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि कई बार ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों और बुकिंग प्लेटफॉर्म से मिलने वाली इंश्योरेंस पॉलिसी देखने में आकर्षक लगती हैं, लेकिन उनमें कई सीमाएं और शर्तें हो सकती हैं।

बड़े कवर के पीछे छिपी हो सकती हैं सीमाएं

कपाड़िया के मुताबिक, कई यात्री मान लेते हैं कि सामान्य ट्रैवल इंश्योरेंस बड़ी मेडिकल परेशानी, सामान खोने और यात्रा रद्द होने जैसी सभी समस्याओं को कवर कर लेगा। लेकिन कई बेसिक पॉलिसी में सब-लिमिट और अलग-अलग शर्तें होती हैं।

उन्होंने कहा कि पॉलिसी में कुल कवर राशि भले ही बड़ी दिखाई जाए, लेकिन क्लेम के समय दैनिक खर्च, अस्पताल के कमरे का किराया या दूसरी सीमाओं के कारण पूरी राशि नहीं मिल सकती।

पहले से मौजूद बीमारी की जानकारी देना जरूरी

ट्रैवल इंश्योरेंस में सबसे अहम बातों में से एक है पहले से मौजूद बीमारी यानी प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज की जानकारी देना। कपाड़िया ने बताया कि हार्ट से जुड़ी बीमारी, ब्लड प्रेशर या पहले हुई किसी मेडिकल प्रक्रिया जैसी स्थितियों को पॉलिसी लेते समय बताना जरूरी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

अगर यात्री अपनी बीमारी की जानकारी नहीं देता है तो विदेश में इमरजेंसी के दौरान भी इंश्योरेंस कंपनी क्लेम को अस्वीकार कर सकती है। ऐसी स्थिति में यात्री को भारी मेडिकल खर्च खुद उठाना पड़ सकता है।

मेडिकल इवैक्यूएशन कवर क्यों जरूरी?

कपाड़िया ने मेडिकल इवैक्यूएशन को भी ट्रैवल इंश्योरेंस का अहम हिस्सा बताया। खासकर उन जगहों पर जहां प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति का खतरा रहता है, वहां यह सुविधा काफी मददगार हो सकती है।

उन्होंने नेपाल में आई हालिया बाढ़ का उदाहरण देते हुए बताया कि ऐसी परिस्थितियों में तुरंत मेडिकल मदद और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए इवैक्यूएशन कवर महत्वपूर्ण हो जाता है।

बैगेज और देरी वाले क्लेम भी समझें

यात्रियों को सामान खोने, फ्लाइट में देरी या कनेक्शन मिस होने से जुड़े क्लेम की शर्तों को भी समझना चाहिए। कुछ पॉलिसी में तय राशि दी जाती है, जबकि कुछ में बिल और दस्तावेज जमा करने के बाद भुगतान किया जाता है।

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कुल मिलाकर ट्रैवल इंश्योरेंस खरीदते समय सबसे सस्ती पॉलिसी चुनने के बजाय उसकी शर्तों और सीमाओं को समझना ज्यादा जरूरी है। खासकर बुजुर्ग यात्रियों, परिवार के साथ यात्रा करने वालों और मेडिकल हिस्ट्री वाले लोगों के लिए सही पॉलिसी का चुनाव बेहद अहम हो जाता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।