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हर महीने खर्चों के बाद खाली हो जाता है अकाउंट? एक्सपर्ट्स ने बताया बड़ा फंड बनाने का आसान तरीका

किराए के घर में रहने का मतलब यह नहीं कि बड़ा फंड नहीं बन सकता। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सैलरी आते ही निवेश करना, किराए और बाकी खर्चों को काबू में रखना और लंबे समय तक निवेश जारी रखना बड़ी रकम बनाने में मदद कर सकता है।

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In Short

  • सैलरी का 25% से 30% हिस्सा पहले निवेश के लिए रखें।
  • घर का किराया हाथ में आने वाली सैलरी के 30% से ज्यादा न हो।
  • कम से कम छह महीने के खर्च जितना इमरजेंसी फंड बनाएं।

Personal Finance Tips: शहरों में रहने वाले बहुत से लोगों की कमाई का बड़ा हिस्सा हर महीने घर के किराए में चला जाता है। इसी वजह से कई लोगों को लगता है कि किराए पर रहते हुए बड़ा फंड बनाना मुश्किल है। लेकिन फाइनेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ ज्यादा सैलरी ही जरूरी नहीं होती। सही समय पर निवेश शुरू करना, खर्च पर नजर रखना और हर साल अपने पैसे का हिसाब देखना ज्यादा काम आता है।

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सैलरी आते ही पहले निवेश करें

आर्बर इन्वेस्टमेंट्स के फाउंडर चिराग मेहता का कहना है कि निवेश के लिए महीने के आखिर में बची रकम का इंतजार नहीं करना चाहिए। सैलरी आते ही 25% से 30% हिस्सा निवेश के लिए अलग कर देना बेहतर है।

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हर महीने निवेश को ऑटोमैटिक करने से यह आदत बन जाती है। इससे पैसा खर्च होने से पहले ही निवेश में चला जाता है और लंबे समय में बड़ा फंड बनने का मौका बढ़ता है।

किराया और इमरजेंसी फंड संभालें

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि घर का किराया हाथ में आने वाली सैलरी के 30% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर किराया कम रखा जाए, तो बची रकम को महंगी लाइफस्टाइल पर खर्च करने के बजाय निवेश में लगाया जा सकता है।

इसके साथ कम से कम छह महीने के खर्च जितना इमरजेंसी फंड भी होना चाहिए। इससे नौकरी जाने या बाजार गिरने पर लंबे समय का निवेश बीच में तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

जल्दी शुरू करें और पैसा बांटकर लगाएं

चिराग मेहता के मुताबिक, 25 साल की उम्र में हर महीने ₹20,000 निवेश करने वाला व्यक्ति 45 साल तक उस इंसान से ज्यादा रकम बना सकता है, जो 35 साल की उम्र में दोगुना निवेश शुरू करता है। इसकी वजह कंपाउंडिंग है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सारा पैसा सिर्फ सेविंग अकाउंट, सोना या शेयर में नहीं लगाना चाहिए। चिराग मेहता ने रियल एस्टेट से जुड़े NCDs और SEBI के नियमों के तहत चलने वाले AIFs का भी जिक्र किया। इनके जरिए बिना सीधे प्रॉपर्टी खरीदे रियल एस्टेट में पैसा लगाया जा सकता है।

हर साल खर्च और निवेश का हिसाब देखें

RentenPe की CEO और को-फाउंडर सारिका शेट्टी का कहना है कि हर रुपये का हिसाब रखना जरूरी है। इसके लिए 50-30-20 नियम अपनाया जा सकता है, जिसमें जरूरत, पसंद के खर्च और बचत के लिए अलग-अलग हिस्सा रखा जाता है।

किराया, EMI, बीमा और सब्सक्रिप्शन जैसे खर्चों को हर साल देखना चाहिए। साथ ही निवेश का पोर्टफोलियो भी साल में एक बार जांचना बेहतर है। लगातार निवेश, कम खर्च और सही जगह पैसा लगाना लंबे समय में बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकता है।

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।