दूसरा घर खरीदना सिर्फ कीमत का खेल नहीं, निवेश से पहले समझें पूरी गणित
दूसरा घर खरीदना सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत चुकाने का फैसला नहीं है। इसमें स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, लोन की ईएमआई, किराये से कमाई और भविष्य में बेचने की संभावना जैसी कई बातें जुड़ी होती हैं। निवेश से पहले अगर पूरी गणित समझ ली जाए तो बड़ा आर्थिक नुकसान टाला जा सकता है।

In Short
- दूसरा घर खरीदने से पहले सिर्फ कीमत नहीं बल्कि पूरा खर्च जोड़ना जरूरी है।
- किराये की कमाई के साथ मेंटेनेंस, टैक्स और खाली रहने का खर्च भी देखें।
- लोन लेकर प्रॉपर्टी खरीदने से पहले ईएमआई का असर अपनी आय पर समझें।
दूसरा घर खरीदना कई लोगों के लिए निवेश का अच्छा विकल्प माना जाता है, लेकिन सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होता। इसमें खरीदने का पूरा खर्च, किराये से होने वाली कमाई, लोन की ईएमआई और आगे बेचने की संभावना जैसी कई बातें जुड़ी होती हैं। सही फैसला लेने के लिए इन सभी पहलुओं को समझना जरूरी है, क्योंकि असली फायदा इन्हीं गणनाओं पर निर्भर करता है।
प्रॉपर्टी खरीदने की पूरी लागत जोड़ें
दूसरा घर खरीदते समय सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत को ही खर्च न मानें। इसके साथ स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, ब्रोकर फीस, इंटीरियर का काम, मेंटेनेंस डिपॉजिट और तुरंत होने वाली मरम्मत का खर्च भी जोड़ना चाहिए।
श्याम ग्रुप के डायरेक्टर सुधीर ए पटेल के मुताबिक, घर खरीदना सिर्फ बजट और कीमत देखने तक सीमित नहीं है। निवेशकों को खरीदारी से जुड़े सभी खर्चों को जोड़कर देखना चाहिए। साथ ही उसी इलाके की दूसरी प्रॉपर्टी से तुलना करनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि कीमत सुविधाओं, लाइफस्टाइल और भविष्य के विकास के हिसाब से सही है या नहीं।
सिर्फ किराया नहीं रेंटल इनकम देखें
अगर दूसरा घर किराये से कमाई के लिए खरीदा जा रहा है तो सिर्फ महीने का किराया देखना काफी नहीं है। सालभर में मिलने वाले किराये की तुलना प्रॉपर्टी की कुल लागत से करनी चाहिए, जिससे रेंटल यील्ड का पता चलता है।
इसके अलावा यह भी देखना जरूरी है कि प्रॉपर्टी कितने समय तक खाली रह सकती है, उसकी मरम्मत का खर्च कितना होगा, मैनेजमेंट फीस और टैक्स जैसी जिम्मेदारियां कितनी होंगी। कई बार कम किराये वाली लेकिन हमेशा किरायेदारों से भरी प्रॉपर्टी ज्यादा फायदा दे सकती है।
कीमत बढ़ने की उम्मीद से आगे सोचें
दूसरे घर में निवेश करते समय सिर्फ इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि आने वाले समय में कीमत कितनी तेजी से बढ़ सकती है। इलाके की असली मांग, सड़क और ट्रांसपोर्ट की सुविधा, रोजगार केंद्रों की दूरी और भविष्य के विकास को भी देखना जरूरी है।
किसी जगह की कीमत थोड़े समय में बढ़ जाना हमेशा लंबे समय के अच्छे निवेश की गारंटी नहीं देता। इसलिए ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां लंबे समय तक रहने वालों की मांग बनी रहे।
लोन की ईएमआई का असर समझें
अगर दूसरा घर लोन लेकर खरीदा जा रहा है तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर महीने की ईएमआई आपकी आर्थिक स्थिति पर कितना असर डालेगी।
तीर्थ रियल्टीज के डायरेक्टर विजय रौंदल के अनुसार, निवेशकों को प्रॉपर्टी की कीमत से पहले लोन की राशि, ब्याज दर, लोन की अवधि और डाउन पेमेंट पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ईएमआई चुकाने के बाद अन्य जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा बचा रहे।
क्योंकि किराये से मिलने वाली कमाई हर महीने एक जैसी नहीं हो सकती और कई बार प्रॉपर्टी खाली भी रह सकती है।
किराये और खर्च का सही हिसाब लगाएं
दूसरे घर से होने वाली कमाई का सही अंदाजा लगाने के लिए किराये की तुलना प्रॉपर्टी के सभी खर्चों से करनी चाहिए। इसमें मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, इंश्योरेंस, मरम्मत और खाली रहने के समय का नुकसान शामिल है।
इसके बाद उसी इलाके की दूसरी प्रॉपर्टी से तुलना करनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि निवेश की कीमत सही है या नहीं।
भविष्य में बेचने की संभावना भी देखें
दूसरा घर आमतौर पर लंबे समय के निवेश के लिए खरीदा जाता है, इसलिए भविष्य में उसे बेचना कितना आसान होगा यह भी देखना जरूरी है।
प्रॉपर्टी की लोकेशन, आने-जाने की सुविधा, बिल्डर का रिकॉर्ड और आसपास आने वाले नए प्रोजेक्ट उसकी मांग को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों को ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां असली लोगों की रहने की जरूरत हो, न कि सिर्फ कीमत बढ़ने की उम्मीद।
आखिर में अच्छा दूसरा घर निवेश वही माना जाएगा जिसमें बिना ज्यादा कीमत बढ़े भी खर्च और कमाई का हिसाब आपके पक्ष में बना रहे।

