
किराए से होने वाली कमाई पर कैसे लगता है टैक्स? पुराने और नए टैक्स रिजीम के नियम समझें
अगर आपने अपना घर किराए पर दे रखा है, तो रेंटल इनकम पर लगने वाले टैक्स के नियम आपके लिए बेहद जरूरी हैं। पुराने और नए टैक्स रिजीम में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे टैक्स का बोझ कम हो सकता है। टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा ने इसका पूरा गणित समझाया है।

In Short
- किराए से होने वाली कमाई पर पुराने और नए टैक्स रिजीम में टैक्स गणना का तरीका काफी हद तक समान है।
- रेंटल इनकम पर मकान मालिकों को 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलता है।
- किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के होम लोन के ब्याज से भी टैक्स योग्य आय कम हो सकती है।
अगर आपने कोई घर या फ्लैट किराए पर दे रखा है और उससे हर महीने कमाई होती है, तो आपके लिए टैक्स से जुड़े नियम समझना जरूरी है। भारत में पुराने और नए टैक्स रिजीम को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहते हैं। खासकर उन लोगों के लिए यह जानना जरूरी है, जिन्होंने किराए से कमाई करने के मकसद से प्रॉपर्टी खरीदी है। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा ने कहा कि, रेंटल इनकम पर टैक्स की गणना का तरीका दोनों टैक्स रिजीम में काफी हद तक एक जैसा है। हालांकि, नए टैक्स रिजीम में होम लोन से जुड़े कई फायदे सीमित हो गए हैं।
किराए से होने वाली कमाई पर कैसे लगता है टैक्स?
गौरी चड्ढा के मुताबिक, रेंटल इनकम पर टैक्स की गणना करते समय सबसे पहले प्रॉपर्टी से मिलने वाले वास्तविक किराए को देखा जाता है। इसके बाद उस रकम से म्युनिसिपल टैक्स यानी नगर निगम को चुकाया गया टैक्स घटाया जा सकता है।
हालांकि, यहां एक जरूरी शर्त है। म्युनिसिपल टैक्स की कटौती तभी मिलेगी, जब उसका भुगतान वास्तव में किया गया हो। सिर्फ टैक्स की देनदारी होने से कटौती का फायदा नहीं मिलता। ऐसे में अगर मकान मालिक नगर निगम का टैक्स समय पर नहीं चुकाते हैं, तो संबंधित साल में इस कटौती का लाभ नहीं मिल सकता।
होम लोन के ब्याज पर भी मिलती है राहत
अगर किसी व्यक्ति ने किराए पर देने के लिए घर खरीदा है और उस पर होम लोन चल रहा है, तो ब्याज की रकम भी टैक्स की गणना में महत्वपूर्ण होती है।
गौरी चड्ढा ने बताया कि किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के होम लोन पर चुकाए गए ब्याज को टैक्स योग्य रेंटल इनकम की गणना करते समय घटाया जा सकता है। इससे लोन लेकर प्रॉपर्टी खरीदने वाले निवेशकों को टैक्स के मामले में राहत मिल सकती है।

30% स्टैंडर्ड डिडक्शन का क्या है नियम?
किराए से होने वाली कमाई पर मकान मालिकों को 30% का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है। यह कटौती प्रॉपर्टी की देखभाल और रखरखाव जैसे खर्चों को ध्यान में रखकर दी जाती है।
गौरी चड्ढा के मुताबिक, अगर किसी मकान मालिक का वास्तविक रखरखाव खर्च 50% भी है, तब भी वह केवल 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन ही क्लेम कर सकता है। यानी वास्तविक खर्च ज्यादा होने के आधार पर अतिरिक्त कटौती नहीं मिलेगी।
प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों के लिए क्या है जरूरी?
पुराने और नए टैक्स रिजीम में रेंटल इनकम की गणना का बुनियादी ढांचा काफी हद तक समान रहने से निवेशकों को कुछ राहत मिलती है। हालांकि, नए टैक्स रिजीम में खुद के रहने वाले घर से जुड़े कई होम लोन टैक्स फायदे सीमित हैं।
एक्सपर्ट की चर्चा से यह भी साफ होता है कि सिर्फ टैक्स बचाने के लिए प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को घर खरीदने की लागत, होम लोन का बोझ, रखरखाव का खर्च और लंबे समय में मिलने वाले रिटर्न को भी ध्यान में रखना चाहिए। रेंटल इनकम पर मिलने वाली टैक्स कटौती खर्च का बोझ कम कर सकती है, लेकिन प्रॉपर्टी में निवेश से जुड़े सभी खर्चों की भरपाई नहीं करती।

