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भारत में घर खरीदना बेहतर या किराए पर रहना? EMI, किराया, HRA और टैक्स छूट का समझें पूरा गणित

अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन क्या किराए पर रहना आर्थिक रूप से ज्यादा फायदेमंद हो सकता है? नई टैक्स व्यवस्था और होम लोन के बदलते फायदों के बीच यह सवाल अहम हो गया है। टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा ने इस पर जरूरी सलाह दी है।

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In Short

  • घर खरीदना या किराए पर रहना, किसमें ज्यादा फायदा?
  • पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में कैसे बदलता है गणित?
  • होम लोन लेने से पहले इन खर्चों पर दें ध्यान।

घर खरीदना बेहतर है या किराए पर रहना? यह सवाल खासकर उन युवाओं के मन में रहता है, जो नौकरी कर रहे हैं और भविष्य के लिए अपना घर खरीदने की योजना बना रहे हैं। प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों और टैक्स नियमों में बदलाव के बीच यह फैसला और मुश्किल हो गया है। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा ने कहा कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था में कई लोगों के लिए घर खरीदने के मुकाबले किराए पर रहना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, सिर्फ टैक्स बचाने के लिए घर खरीदने का फैसला करना सही नहीं है।

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किराए पर रहने में कैसे मिल सकता है ज्यादा फायदा?

गौरी चड्ढा के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में किराए पर रहना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है। खासकर उन नौकरीपेशा लोगों के लिए, जिन्हें कंपनी की तरफ से हाउस रेंट अलाउंस मिलता है।

पुरानी टैक्स व्यवस्था में HRA के जरिए टैक्स में राहत मिल सकती है। इससे किराए पर रहने वाले कर्मचारियों का टैक्स बोझ कम हो सकता है।

वहीं, नई टैक्स व्यवस्था में खुद के रहने के लिए खरीदे गए घर पर होम लोन से जुड़े कई टैक्स फायदे सीमित हो गए हैं। ऐसे में सिर्फ घर खरीदने के कारण पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनना हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होगा।

सिर्फ टैक्स बचाने के लिए घर खरीदना कितना सही?

गौरी चड्ढा का कहना है कि घर खरीदने का फैसला कभी भी सिर्फ टैक्स बचत के आधार पर नहीं करना चाहिए।

घर खरीदने के बाद हर महीने EMI चुकानी पड़ती है। इसके अलावा ब्याज, मेंटेनेंस और प्रॉपर्टी से जुड़े दूसरे खर्च भी होते हैं।

उनके मुताबिक, घर खरीदना एक भावनात्मक और व्यक्तिगत वित्तीय फैसला है। इसमें आपकी कमाई, बचत, नौकरी की स्थिति, रहने का शहर और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

होम लोन लेना कब हो सकता है फायदेमंद?

गौरी चड्ढा ने बताया कि कुछ परिस्थितियों में होम लोन लेना भी अच्छा विकल्प हो सकता है।

मान लीजिए, किसी व्यक्ति को होम लोन पर करीब 8 से 8.5 फीसदी ब्याज देना पड़ रहा है। वहीं, अगर वह अपनी बचत को म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में निवेश करके संभावित रूप से 12 से 13 फीसदी रिटर्न हासिल कर सकता है, तो लोन लेना उसके लिए फायदेमंद हो सकता है।

हालांकि, निवेश से इतना रिटर्न मिलना निश्चित नहीं है। चड्ढा के मुताबिक, यह रणनीति हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होती।

घर खरीदें या किराए पर रहें?

गौरी चड्ढा के मुताबिक, दोनों विकल्पों की तुलना करते समय सिर्फ टैक्स बचत नहीं देखनी चाहिए। किराया, EMI, ब्याज, मेंटेनेंस, टैक्स और निवेश के संभावित फायदे को भी समझना जरूरी है।

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मौजूदा टैक्स नियमों में कई लोगों के लिए किराए पर रहना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। लेकिन घर खरीदने का अंतिम फैसला आपकी आर्थिक स्थिति, जरूरतों और लंबे समय तक खर्च उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।