
10 साल में बड़ा कॉर्पस बनाना है? एक्सपर्ट ने दी पोर्टफोलियो में इन ट्रेंड्स को शामिल करने की सलाह
अगले 5 से 10 साल में निवेश से बड़ी वेल्थ बनाना चाहते हैं? मार्केट एक्सपर्ट शरद टंडन ने भारत की आर्थिक ग्रोथ से जुड़े कुछ ऐसे सेक्टर्स और निवेश की रणनीति बताई है, जो लंबी अवधि में बड़े अवसर दे सकते हैं। जानिए किन सेक्टर्स पर रखें नजर और कैसे बनाएं अपना पोर्टफोलियो।

In Short
- शरद टंडन के मुताबिक, अगले 5 से 10 साल में वेल्थ बनाने के लिए भारत की आर्थिक ग्रोथ से जुड़े सेक्टर्स पर नजर रखना जरूरी है।
- एक्सपर्ट ने फिनटेक, एयरोस्पेस, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर्स में लंबी अवधि के निवेश के अवसर बताए।
- शरद टंडन ने पोर्टफोलियो में 20-30% मिड-कैप, 20-30% स्मॉल-कैप और बाकी सेक्टोरल फंड्स में लगाने की रणनीति बताई।
म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि आखिर पैसा कहां लगाया जाए, जिससे आने वाले 5 से 10 साल में अच्छी वेल्थ बनाई जा सके। मार्केट में हर छोटी-बड़ी गिरावट या तेजी के पीछे भागने के बजाय भारत की आर्थिक ग्रोथ से जुड़े सेक्टर्स पर ध्यान देना एक रणनीति हो सकती है।
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए इन्वेस्ट एट ईज के फाउंडर शरद टंडन ने कहा कि निवेशकों को पहले अपनी इमरजेंसी सेविंग्स, टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके बाद लंबी अवधि का पोर्टफोलियो भारत की आर्थिक तरक्की से जुड़े बड़े बदलावों को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए।
भारत की ग्रोथ पर क्यों है एक्सपर्ट का भरोसा?
शरद टंडन के अनुसार, भारत के पास लंबी अवधि में आर्थिक विकास के कई बड़े अवसर हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में शामिल है और यहां की आबादी की संरचना भी देश के पक्ष में है।
इसके अलावा देश में नियमों को आसान बनाने यानी डीरेगुलेशन की दिशा में भी काम शुरू हुआ है। एक्सपर्ट के मुताबिक, ये बदलाव आने वाले एक से दो दशकों में निवेश के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
क्या है एक्सपर्ट का 'सेवन D' फॉर्मूला?
शरद टंडन ने भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ को समझाने के लिए 'सेवन D' फ्रेमवर्क का जिक्र किया।
इसमें डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डीरेगुलेशन के अलावा IT से आगे दूसरे सेक्टर्स में डायवर्सिफिकेशन, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI से मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, डिफेंस और डिजिटाइजेशन जैसे बड़े बदलाव शामिल हैं।
उनके मुताबिक, निवेशकों को इन बदलावों से जुड़े कारोबारों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि आने वाले वर्षों में इनसे नए निवेश के अवसर बन सकते हैं।
किन सेक्टर्स में बन सकते हैं बड़े मौके?
एक्सपर्ट के अनुसार, भारत में कंपनियों और बैंकों की बैलेंस शीट बेहतर हो रही है। सरकारी वित्तीय स्थिति में सुधार और नए कारोबारों के लिए जोखिम उठाने वाली पूंजी की उपलब्धता भी अवसर पैदा कर रही है।

शरद टंडन ने फिनटेक, एयरोस्पेस, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर्स का जिक्र किया।
उनका मानना है कि अगले दौर की वेल्थ क्रिएशन केवल पुराने और बड़े कारोबारों तक सीमित नहीं रहेगी। नए सेक्टर्स से जुड़ी कंपनियां भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।
अगले 10 साल के लिए कैसे बनाएं पोर्टफोलियो?
शरद टंडन ने निवेशकों के लिए दो तरीके बताए। पहला तरीका ऐसे फंड मैनेजर को चुनना है, जिसका पोर्टफोलियो लंबी अवधि के इन बड़े ट्रेंड्स पर आधारित हो और जिसकी रणनीति निवेशक के समय के हिसाब से सही हो।
दूसरा तरीका अलग-अलग कैटेगरी में निवेश बांटना है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि निवेशक 20 से 30 फीसदी पैसा मिड-कैप, 20 से 30 फीसदी स्मॉल-कैप और बाकी पैसा फार्मा, ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टोरल फंड्स में लगाने की रणनीति पर विचार कर सकते हैं।
लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का क्या है फॉर्मूला?
शरद टंडन के मुताबिक, निवेशकों को बाजार के हर उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय भारत की आर्थिक तरक्की से जुड़े बड़े ट्रेंड्स को समझना चाहिए।
उनका मानना है कि सही सेक्टर्स और फंड रणनीतियों के साथ लंबे समय तक निवेश बनाए रखने से अगले 10 साल में सामान्य से अधिक रिटर्न यानी 'एबनॉर्मल अल्फा' हासिल करने के अवसर बन सकते हैं।

