
1 अप्रैल 2026 से सैलरी पाने वाले लोगों के लिए क्या-क्या बदलने वाला है? जानिए पूरी डिटेल
1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स सिस्टम लागू होगा, जिसमें नए फॉर्म, ज्यादा पारदर्शिता और सख्त नियम शामिल हैं। नौकरीपेशा लोगों को सैलरी व सुविधाओं की पूरी जानकारी देनी होगी, जबकि सीनियर सिटीजंस के लिए प्रक्रिया आसान बनाई गई है। टैक्स चोरी पर भी सख्ती बढ़ेगी।

In Short
- 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स सिस्टम लागू, फॉर्म 16 की जगह फॉर्म 130 और 123 आएंगे
- सैलरी, भत्तों और सुविधाओं की पूरी जानकारी देना अनिवार्य, टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी
- सीनियर सिटीजंस के लिए प्रक्रिया आसान, 15G/15H की जगह नया फॉर्म 121 लागू
1 अप्रैल 2026 से देश की टैक्स व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 और इसके नियम अब पूरी तरह लागू हो जाएंगे। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों और सीनियर सिटीजंस पर पड़ने वाला है।
सरकार का मकसद टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, लेकिन साथ ही अब आय की हर छोटी-बड़ी जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। टैक्स एक्सपर्ट सीए अमित खन्ना का कहना है कि अब सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा ट्रांसपेरेंट हो गया है, जिससे टैक्स चोरी की गुंजाइश कम होगी।
सैलरी और भत्तों पर अब पैनी नजर?
नौकरीपेशा लोगों के लिए अब 'फॉर्म 16' इतिहास बन जाएगा। इसकी जगह अब 'फॉर्म 130' लेगा, जिसमें आपकी सैलरी और टैक्स की पूरी जानकारी होगी। इसके साथ ही एक नया 'फॉर्म 123' भी जोड़ा गया है, जो कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं जैसे घर, गाड़ी, मुफ्त खाना या तोहफों का हिसाब रखेगा।
इसके अलावा अगर आपकी कंपनी आपको इलेक्ट्रिक कार (EV) देती है, तो उस पर भी अब छोटी पेट्रोल-डीजल कारों की तरह ही टैक्स लगेगा। राहत की बात यह है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाला भत्ता बढ़ाकर 3,000 रुपये और हॉस्टल के लिए 9,000 रुपये महीना कर दिया गया है। साथ ही, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में रहने वालों को अब दिल्ली-मुंबई की तरह 50% एचआरए (HRA) का फायदा मिलेगा।

मकान मालिक की जानकारी देना जरूरी
अगर आप 1 लाख रुपये से ज्यादा सालाना किराया देते हैं, तो अब मकान मालिक का पैन (PAN) देना अनिवार्य होगा। फाइनेंस एक्सपर्ट डॉ. एस. पी. सिंह बताते हैं कि एचआरए क्लेम करने के लिए अब अलग से फॉर्म भरना होगा। इसके अलावा, अगर आप साल के बीच में नौकरी बदलते हैं, तो पुरानी कंपनी में आपने कौन सा टैक्स रिजीम चुना था, इसकी जानकारी नई कंपनी को देना जरूरी होगा ताकि टीडीएस (TDS) की गणना सही हो सके।
बुजुर्गों के लिए कागजी कार्रवाई कम
सीनियर सिटीजंस के लिए राहत की खबर यह है कि अब उन्हें फॉर्म 15G और 15H के चक्कर में नहीं पड़ना होगा। इन दोनों को मिलाकर अब एक नया 'फॉर्म 121' बना दिया गया है। सिस्टम खुद ही पहचान लेगा कि फॉर्म भरने वाला व्यक्ति सीनियर सिटीजन है या नहीं। इसके अलावा, प्रॉपर्टी बेचने, किराया मिलने या क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर टीडीएस काटने के लिए अब अलग-अलग फॉर्म की जरूरत नहीं होगी, एक ही चालान से काम चल जाएगा।

