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₹3.28 लाख करोड़ पहुंचा माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का लोन पोर्टफोलियो! फिर भी क्यों बढ़ रही चिंता?

देश के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का लोन पोर्टफोलियो ₹3.28 लाख करोड़ पहुंच गया है, लेकिन CRIF की नई रिपोर्ट में कुछ ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जो सेक्टर की बदलती तस्वीर दिखाते हैं। नए लोन की रफ्तार और कर्ज लेने के तरीके में बदलाव आया है। जानिए रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ।

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In Short

  • सितंबर 2026 तक माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का कुल लोन पोर्टफोलियो ₹3.28 लाख करोड़ पहुंचा, लेकिन सालाना आधार पर 5% की गिरावट दर्ज हुई।
  • माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बड़े लोन का चलन बढ़ रहा है। एक लाख रुपये से ज्यादा के नए लोन की रकम सालाना आधार पर 41.3% बढ़ी।
  • NBFC-MFI की बाजार हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 44.7% रही, जबकि बिहार ₹51,100 करोड़ के पोर्टफोलियो के साथ सबसे बड़ा माइक्रोफाइनेंस बाजार बना।

देश के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का कुल लोन पोर्टफोलियो सितंबर 2026 तक 3.28 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। हालांकि, इस बड़े आंकड़े के पीछे एक दूसरी तस्वीर भी सामने आई है। सेक्टर में लोन पोर्टफोलियो घटा है और नए लोन बांटने की रफ्तार भी धीमी हुई है। क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी CRIF की तिमाही रिपोर्ट MicroLend के मुताबिक, माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बदलाव देखने को मिल रहा है।

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सितंबर 2026 तक सेक्टर का ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 5% और पिछली तिमाही के मुकाबले 1.4% घट गया। इस दौरान कुल 9.6 करोड़ एक्टिव लोन थे, जबकि कर्ज लेने वाले ग्राहकों की संख्या 6.4 करोड़ रही।

लोन की संख्या के बीच बढ़ रहा औसत कर्ज

रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में प्रति लोन औसत बकाया रकम बढ़ रही है। सितंबर 2026 में यह रकम 34,200 रुपये पहुंच गई। इसमें सालाना आधार पर 22.7% और तिमाही आधार पर 5.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कुल 56,956 करोड़ रुपये के लोन बांटे गए। यह पिछले साल की समान अवधि से 5.1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले 7.5% कम है। वहीं, नए लोन का औसत आकार 17.5% बढ़कर 63,100 रुपये हो गया।

अब बड़े लोन की तरफ बढ़ रहा रुझान

माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बड़े लोन का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। दूसरी तिमाही में 50,000 से 80,000 रुपये के लोन की हिस्सेदारी कुल नए लोन की रकम में 41.3% रही।

वहीं, 80,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के लोन की हिस्सेदारी पिछले साल के 14.7% से बढ़कर 18.5% हो गई। एक लाख रुपये से ज्यादा के लोन का हिस्सा भी 11.2% से बढ़कर 15.1% पहुंच गया। इस कैटेगरी में बांटे गए लोन की रकम सालाना आधार पर 41.3% बढ़ी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

NBFC-MFI की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोफाइनेंस लोन देने के मामले में NBFC-MFI सबसे आगे हैं। इनकी बाजार हिस्सेदारी 44.7% यानी करीब 1.46 लाख करोड़ रुपये रही। इनके लोन पोर्टफोलियो में सालाना 9.4% की बढ़ोतरी हुई।

दूसरी ओर, बैंकों का माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो घटता रहा। इसकी एक वजह कुछ माइक्रोफाइनेंस लोन को रिटेल लोन की कैटेगरी में शामिल करना भी है।

कर्ज की वसूली में सुधार, बिहार सबसे आगे

लोन की गुणवत्ता के मामले में सुधार देखने को मिला है। सितंबर 2026 में 31 से 180 दिन तक बकाया रहने वाले लोन का PAR 1.6% रहा, जो एक साल पहले 4.6% था।

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दो या उससे कम लेंडर्स से जुड़े ग्राहकों की पोर्टफोलियो में हिस्सेदारी 81.2% रही। इनका PAR 1.9% था, जबकि तीन लेंडर्स वाले ग्राहकों का 4.1% और तीन से ज्यादा लेंडर्स वाले ग्राहकों का 6.6% रहा।

राज्यों की बात करें तो बिहार 51,100 करोड़ रुपये के लोन पोर्टफोलियो के साथ सबसे बड़ा माइक्रोफाइनेंस बाजार बना रहा। देश के टॉप 10 राज्यों की कुल हिस्सेदारी 82.3% रही।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।