
REIT में निवेश से होने वाली कमाई पर कैसे लगता है टैक्स?
REIT में निवेश करने वालों के लिए टैक्स समझना बेहद जरूरी है। क्या इससे होने वाली कमाई पर शेयर बाजार की तरह टैक्स लगता है या नियम अलग हैं? बिजनेस टुडे के शो में एक्सपर्ट संचिता मुखर्जी ने REIT के टैक्स सिस्टम से जुड़ी अहम बातें समझाईं। जानें पूरी डिटेल।

In Short
- REIT से होने वाली कमाई पर टैक्स का सिस्टम इक्विटी और डेट निवेश से अलग है।
- REIT में किराये, डिविडेंड और लोन रिपेमेंट से जुड़ी रकम मिल सकती है।
- एक्सपर्ट ने निवेशकों को टैक्स देनदारी समझने के लिए सलाहकार से चर्चा करने को कहा।
रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REIT में निवेश करने वाले लोगों के मन में एक बड़ा सवाल होता है कि इससे होने वाली कमाई पर कितना टैक्स देना पड़ता है? क्या REIT पर भी शेयर बाजार या दूसरे कैपिटल मार्केट प्रोडक्ट्स की तरह टैक्स लगता है या इसके नियम अलग हैं? बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Talk The Walk LLP की मैनेजिंग पार्टनर संचिता मुखर्जी ने कहा कि REIT में टैक्स का मामला थोड़ा अलग है। इसमें निवेशकों को कई तरह से कमाई हो सकती है। इसलिए इसकी टैक्स देनदारी समझने के लिए टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है।
REIT पर टैक्स के नियम क्यों हैं अलग?
संचिता मुखर्जी ने बताया कि REIT एक कैपिटल मार्केट प्रोडक्ट जरूर है, लेकिन इसका टैक्स सिस्टम सीधे तौर पर इक्विटी या डेट निवेश जैसा नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह REIT से मिलने वाली कमाई के अलग-अलग स्रोत हैं।
उन्होंने समझाया कि जब कोई निवेशक REIT में पैसा लगाता है, तो उसे मिलने वाली रकम केवल एक ही तरह की इनकम नहीं होती। इसमें अलग-अलग स्रोतों से पैसा आ सकता है। यही वजह है कि इसके टैक्स को समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
किराये से भी होती है कमाई
संचिता मुखर्जी के मुताबिक, REIT में कमाई का एक प्रमुख जरिया किराये से मिलने वाला पैसा है। REIT की प्रॉपर्टी से किराये के रूप में जो कैश फ्लो आता है, वह इसकी इनकम का हिस्सा होता है।
इस तरह REIT में निवेश करने वालों को मिलने वाली रकम का एक हिस्सा किराये से होने वाली कमाई से जुड़ा हो सकता है।

डिविडेंड और लोन रिपेमेंट से भी मिलता है पैसा
एक्सपर्ट ने बताया कि REIT से मिलने वाली रकम का दूसरा स्रोत डिविडेंड भी हो सकता है।
इसके अलावा REIT में लोन रिपेमेंट यानी कर्ज की वापसी से जुड़ी रकम भी निवेशकों को बांटी जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस तरह की रकम भी कैश डिस्ट्रीब्यूशन का हिस्सा बन सकती है।
यानी REIT से मिलने वाला पैसा केवल किराये या डिविडेंड तक सीमित नहीं है। इसमें लोन रिपेमेंट से जुड़ी रकम भी शामिल हो सकती है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
संचिता मुखर्जी ने साफ कहा कि REIT के टैक्स को लेकर निवेशकों को किसी टैक्स स्पेशलिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।
उनके मुताबिक, चूंकि REIT से मिलने वाली रकम के स्रोत अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए इसके टैक्स ट्रीटमेंट को सामान्य इक्विटी या डेट निवेश की तरह नहीं समझना चाहिए।
उन्होंने खुद कोई विशेष टैक्स सलाह देने के बजाय निवेशकों को अपने टैक्स एडवाइजर से चर्चा करने की सलाह दी। इससे निवेशक REIT से मिलने वाली अलग-अलग तरह की कमाई और उससे जुड़ी टैक्स देनदारी को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

