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Gold vs Silver Investment Strategy: एक्सपर्ट ने बताया पोर्टफोलियो में कितना रखें सोना और चांदी

सोना और चांदी में निवेश करने वालों के लिए अजय केडिया ने पोर्टफोलियो एलोकेशन का खास फॉर्मूला बताया है। उनका मानना है कि निवेशकों को बुलियन में पूरा पैसा लगाने से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में सोने और चांदी में से किस पर उनका भरोसा ज्यादा है।

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In Short

  • अजय केडिया ने निवेशकों को पूरा पैसा बुलियन में लगाने से बचने की सलाह दी।
  • कुल पोर्टफोलियो में करीब 20% तक बुलियन एक्सपोजर रखने की बात कही।
  • बुलियन पोर्टफोलियो में सोने के मुकाबले चांदी को ज्यादा हिस्सा देने की सलाह दी।

सोना और चांदी में निवेश करने वाले निवेशकों को अपना पूरा पैसा बुलियन में लगाने से बचना चाहिए। बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Kedia Advisory के अजय केडिया ने कहा कि निवेशकों को अपने कुल पोर्टफोलियो का करीब 20% हिस्सा ही बुलियन में रखना चाहिए। इस 20% में भी उन्होंने सोने के मुकाबले चांदी को ज्यादा हिस्सा देने की बात कही है।

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चांदी में 65-70% रखने की सलाह

अजय केडिया ने कहा कि निवेशकों को अपनी पूरी पूंजी बुलियन में लगाने की गलती नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, निवेश में डायवर्सिफिकेशन जरूरी है। अगर कोई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में बुलियन को जगह देता है तो इसमें 65% से 70% हिस्सा चांदी में और बाकी हिस्सा सोने में रखा जा सकता है।

अजय केडिया का चांदी पर ज्यादा भरोसा इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड की वजह से है। उन्होंने कहा कि वह चांदी को लेकर ज्यादा बुलिश हैं क्योंकि इसकी इंडस्ट्रियल खपत है।

चांदी पर क्यों ज्यादा भरोसा?

चांदी का इस्तेमाल सिर्फ निवेश के लिए नहीं होता, बल्कि EVs, सोलर, सेमीकंडक्टर और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में भी इसकी मांग है। इसी वजह से चांदी एक तरफ निवेश का जरिया है तो दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल कमोडिटी भी है। अजय केडिया का मानना है कि मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड की वजह से चांदी सोने के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

गिरावट के बीच क्या हो रणनीति?

हाल के समय में मजबूत डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड और आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं के बीच कीमती धातुओं में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हालांकि, अजय केडिया की रणनीति के मुताबिक इस करेक्शन को बुलियन से पूरी तरह बाहर निकलने की वजह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय निवेशकों को अपने एक्सपोजर को बेहतर तरीके से बैलेंस करने पर ध्यान देना चाहिए।

सोने पर भी भरोसा बरकरार

चांदी को ज्यादा वेटेज देने का मतलब यह नहीं है कि केडिया सोने को लेकर बेयरिश हैं। उन्होंने सोने के लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स पर भरोसा जताया है। इसके पीछे उन्होंने सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी, डी-डॉलराइजेशन ट्रेंड और फिजिकल डिमांड जैसे कारण बताए।

हालांकि, सोने और चांदी में से ज्यादा हिस्सा चुनने की बात आए तो केडिया की पसंद चांदी है। उनके मुताबिक, बुलियन को लॉन्ग टर्म पोर्टफोलियो में जगह दी जा सकती है, लेकिन इसमें चांदी का हिस्सा सोने के मुकाबले ज्यादा रखा जा सकता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।