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गोदरेज की अलमारी से SIP तक! जानिए कैसे 95 साल में पहली सैलरी और पैसे बचाने का तरीका पूरी तरह बदल गया

पहली सैलरी किसी ने माता-पिता को दी, तो किसी ने उसे भविष्य के लिए बचाया। कभी गोदरेज की अलमारी में रखा कैश और गोल्ड सुरक्षा की निशानी था, लेकिन आज एसआईपी और इक्विटी नई पसंद हैं। जानिए पीढ़ियों के साथ भारत का पैसे से रिश्ता कैसे बदल गया।

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In Short

  • पहले के समय में फाइनेंशियल सिक्योरिटी का मतलब गोदरेज की अलमारी में सुरक्षित रखा कैश और गोल्ड था।
  • बाद की पीढ़ियों ने पहली सैलरी परिवार को देकर एफडी, एलआईसी और एनएससी जैसे सुरक्षित ऑप्शन चुने।
  • आज के युवा परिवार की जिम्मेदारी के साथ एसआईपी, इक्विटी और इमरजेंसी फंड के जरिए वेल्थ बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।

पहली सैलरी हर किसी के लिए खास होती है। कोई इसे माता-पिता को देता है, कोई परिवार के लिए मिठाई खरीदता है और कोई अपनी पसंद की चीज पर खर्च करता है। समय के साथ पहली सैलरी से जुड़ी खुशी तो वही रही, लेकिन पैसे बचाने और बढ़ाने का तरीका पूरी तरह बदल गया। करीब एक सदी की इन अलग-अलग कहानियों से समझते हैं कि भारत की फाइनेंशियल सोच कैसे बदली।

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कभी गोदरेज की अलमारी ही थी सबसे बड़ी फाइनेंशियल सिक्योरिटी

इंडिया टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक 95 साल की प्रीतपाल कौर सेठी के समय में महिलाओं का घर से बाहर काम करना आम नहीं था। परिवार की कमाई और पैसों से जुड़े फैसले ज्यादातर पुरुष ही लेते थे। उस दौर में घर की संपत्ति किसी म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट या डीमैट अकाउंट में नहीं होती थी।

पैसे के बंडल और सोने के गहने कपड़े में लपेटकर स्टील की गोदरेज अलमारी के लॉकर में रखे जाते थे। यही परिवार की फाइनेंशियल सिक्योरिटी मानी जाती थी। उस पीढ़ी का मकसद पैसा तेजी से बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रखना था।

जब पहली सैलरी पर पूरे परिवार का हक माना जाता था

91 साल के रिटायर्ड इंडियन रेलवे कर्मचारी विद्या सागर शर्मा ने अपनी पहली सैलरी माता-पिता को सौंप दी थी। उनका मानना था कि माता-पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए मेहनत की है, इसलिए कमाई पर सबसे पहले उनका हक है।

उस समय पहली सैलरी किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सफलता मानी जाती थी। घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई पहली जरूरत होती थी। बचा हुआ पैसा सेविंग अकाउंट, पोस्ट ऑफिस स्कीम या बाद में फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाता था।

एफडी, एनएससी और एलआईसी बने मिडिल क्लास की पसंद

एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने भी अपनी पूरी पहली सैलरी माता-पिता को दे दी थी और अपने पास केवल थोड़ा सा पॉकेट मनी रखा था। उस समय फिक्स्ड डिपॉजिट खोलना, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट खरीदना और एलआईसी पॉलिसी लेना मिडिल क्लास परिवारों की आम फाइनेंशियल प्लानिंग थी।

इनका मकसद ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सुरक्षित रकम तैयार करना था। कैपिटल की सुरक्षा को तेजी से पैसा बढ़ाने से ज्यादा जरूरी माना जाता था।

नई पीढ़ी ने परिवार और इन्वेस्टमेंट के बीच बनाया बैलेंस

25 साल की श्रुति शर्मा ने भी पहली सैलरी मिलने पर सबसे पहले परिवार की मदद करने का फैसला लिया। हालांकि, उनके पास पिछली पीढ़ियों के मुकाबले इन्वेस्टमेंट के कई ज्यादा ऑप्शन मौजूद हैं।

वह इमरजेंसी फंड रखती हैं और मानती हैं कि सिर्फ सेविंग से इन्फ्लेशन को हराना मुश्किल है। इसलिए म्यूचुअल फंड और एसआईपी भी उनकी फाइनेंशियल जर्नी का हिस्सा हैं। उनकी सलाह है कि पहली सैलरी का आनंद जरूर लें, लेकिन छोटी रकम से ही इन्वेस्टमेंट शुरू कर दें।

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सपनों के साथ भविष्य की तैयारी भी जरूरी

33 साल की मनीषा शर्मा पहली सैलरी मिलने पर सेविंग और अपनी पसंद की चीजें खरीदने के बीच उलझी थीं। उस समय उन्हें लगता था कि इन्वेस्टमेंट केवल बड़ी उम्र के लोग करते हैं। बाद में उनकी फाइनेंशियल समझ बढ़ी।

28 साल की अस्मिता राज यादव ने अपनी पहली सैलरी बैंक अकाउंट में ही रखी थी। बाद में अपने फाइनेंशियल एडवाइजर भाई की सलाह पर उन्होंने इक्विटी और एसआईपी में इन्वेस्टमेंट शुरू किया। अब वह गोल्ड में भी पैसा लगाने की तैयारी कर रही हैं।

पहली सैलरी की खुशी वही, पैसे से रिश्ता बदल गया

पहले फाइनेंशियल सिक्योरिटी का मतलब गोदरेज लॉकर में रखा कैश और गोल्ड था। बाद में एफडी, एलआईसी और एनएससी ने जगह बनाई। अब युवा एसआईपी, इंडेक्स फंड, इक्विटी, इमरजेंसी फंड और फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस की बात करते हैं।

प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और फाइनेंस की भाषा बदल गई है, लेकिन हर पीढ़ी का सपना एक ही रहा है—अपने परिवार के लिए पहले से ज्यादा सुरक्षित भविष्य बनाना।

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।