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FD, बॉन्ड या डेब्ट फंड... कहां पैसा लगाना रहेगा सुरक्षित? निवेश से पहले समझ लें फायदे

अगर आप अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखते हुए अच्छा रिटर्न पाना चाहते हैं, तो FD, बॉन्ड और डेब्ट फंड आपके लिए विकल्प हो सकते हैं। लेकिन तीनों में से किसमें पैसा लगाना समझदारी होगी? एक्सपर्ट्स ने बताया कि निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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In Short

  • FD, बॉन्ड और डेब्ट फंड में निवेश करने से पहले समझें तीनों के फायदे और जोखिम।
  • एक्सपर्ट्स ने बताया कि कम जोखिम लेने वाले निवेशक ₹10 लाख का निवेश कैसे बांट सकते हैं।
  • निवेश की अवधि, टैक्स और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा को ध्यान में रखना जरूरी।

अगर आप अपनी मेहनत की कमाई को ऐसी जगह निवेश करना चाहते हैं, जहां जोखिम कम हो और पैसा सुरक्षित रहे, तो आपके सामने FD, बॉन्ड और डेब्ट म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प हैं। लेकिन सवाल है कि इनमें से किसमें पैसा लगाना बेहतर रहेगा? तीनों में रिटर्न, सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा अलग-अलग है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि निवेश करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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FD, बॉन्ड और डेब्ट फंड में क्या है अंतर?

वाइज फिनसर्व की डायरेक्टर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर चारू पाहुजा के मुताबिक, कम जोखिम लेने वाले निवेशकों को तीन बातों पर ध्यान देना चाहिए। पहला पैसा सुरक्षित रहे, दूसरा नियमित कमाई हो और तीसरा जरूरत पड़ने पर पैसा मिल सके।

फिलहाल RBI की रेपो रेट 5.25% है। एक साल से ज्यादा की FD पर करीब 6% से 6.75% ब्याज मिल रहा है। वहीं, 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड लगभग 6.8% से 6.9% है।

FD में पैसा लगाना कितना सुरक्षित?

FD में ब्याज दर पहले से तय होती है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम का अंदाजा रहता है। हालांकि, समय से पहले पैसा निकालने पर पेनल्टी लग सकती है।

बैंक में जमा रकम पर DICGC के तहत प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा मिलता है। इसमें मूल रकम और ब्याज दोनों शामिल हैं।

बॉन्ड और डेब्ट फंड में क्या है जोखिम?

सरकारी बॉन्ड को सरकार का समर्थन मिलता है, जबकि कॉरपोरेट बॉन्ड में कंपनी के भुगतान नहीं कर पाने का जोखिम रहता है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 6.5% ब्याज वाली FD के मुकाबले 8.5% रिटर्न वाला बॉन्ड जरूरी नहीं कि बेहतर हो। ज्यादा रिटर्न के साथ जोखिम भी बढ़ सकता है।

डेब्ट म्यूचुअल फंड अलग-अलग डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। इनमें पैसा निकालने की सुविधा और विविधता मिलती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता। ब्याज दरें बढ़ने पर खासकर लंबी अवधि वाले डेब्ट फंड की NAV गिर सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

10 लाख रुपये का निवेश कैसे बांटें?

चारू पाहुजा ने कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए 30:35:35 का एक उदाहरण दिया है।

  • 3 लाख रुपये: बैंक FD या डिपॉजिट में।

  • 3.5 लाख रुपये: अच्छी क्वालिटी के सुरक्षित बॉन्ड में।

  • 3.5 लाख रुपये: बेहतर क्वालिटी वाले डेब्ट म्यूचुअल फंड में।

हालांकि, यह कोई तय फॉर्मूला नहीं है। निवेश का बंटवारा जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करेगा।

कितने समय के लिए कहां करें निवेश?

एक साल के लिए FD, ट्रेजरी बिल और बहुत कम अवधि वाले डेब्ट फंड विकल्प हो सकते हैं। तीन साल के लिए FD, अच्छी क्वालिटी के बॉन्ड और उपयुक्त डेब्ट फंड का मिश्रण देखा जा सकता है।

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पांच साल के निवेश में बॉन्ड और डेब्ट फंड की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेश का फैसला सिर्फ ज्यादा ब्याज देखकर नहीं करना चाहिए। टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न, पैसा निकालने की सुविधा और जोखिम भी समझना जरूरी है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।