
Dhanteras 2026: धनतेरस पर सोना खरीदने जा रहे हैं? ज्वेलरी शॉप जाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
धनतेरस पर सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ कीमत देखकर फैसला न लें। पिछले 10 साल में सोने ने शेयर बाजार से ज्यादा रिटर्न दिया है, लेकिन खरीदारी से जुड़े कुछ खर्च आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। जानिए खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखें।

In Short
- पिछले 10 साल में सोने ने दिया करीब 353% रिटर्न
- सोना खरीदते समय मेकिंग चार्ज और टैक्स का रखें ध्यान
- डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF में निवेश के नियम अलग
धनतेरस पर सोना खरीदना भारत में शुभ माना जाता है। इस दिन लोग गहने, सिक्के और दूसरे रूप में सोना खरीदते हैं। लेकिन इस बार सोने की ऊंची कीमतों के बीच खरीदारी से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। खासकर अगर आप सोना निवेश के लिए खरीद रहे हैं, तो उसकी शुद्धता, टैक्स, अतिरिक्त खर्च और भविष्य में बेचने के नियम समझ लेना फायदेमंद हो सकता है।
10 साल में सोने ने शेयर बाजार को छोड़ा पीछे
पिछले 10 साल में सोने ने शेयर बाजार से ज्यादा रिटर्न दिया है। MCX पर सोने की कीमत करीब 353% बढ़ी है। यानी सालाना औसतन 16.3% का रिटर्न मिला है।
वहीं, इसी दौरान सेंसेक्स और निफ्टी 50 में करीब 178% की तेजी आई। दोनों ने लगभग 10.8% सालाना रिटर्न दिया। इसमें करीब 1.3% डिविडेंड शामिल नहीं है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में निवेश का समय और निवेश का तरीका भी रिटर्न पर असर डालता है।
महंगा होने के बावजूद सोने की मांग बढ़ी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान भारत में सोने की मांग पिछली तिमाही के मुकाबले 24% बढ़कर करीब 162 टन पहुंच गई। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें 29% की गिरावट आई।
इस दौरान सोने की औसत घरेलू कीमत 1,48,891 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जो पिछले साल से 45% ज्यादा थी।
ज्वेलरी की मांग तिमाही आधार पर 33% बढ़कर करीब 100 टन पहुंची। वहीं, गोल्ड ETF की मांग 3.6 टन से बढ़कर 5.3 टन हो गई।

सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ज्वेलरी खरीद रहे हैं, तो सिर्फ सोने का भाव देखकर फैसला न करें। मेकिंग चार्ज, वेस्टेज चार्ज और GST भी कुल कीमत बढ़ाते हैं।
गहने या सिक्के खरीदते समय BIS हॉलमार्क, शुद्धता और जहां लागू हो, HUID नंबर जरूर जांचें।
पुराना सोना बेचने या एक्सचेंज करने से पहले ज्वेलर की बायबैक पॉलिसी समझ लें। अलग-अलग दुकानों पर कटौती के नियम अलग हो सकते हैं।
डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF में क्या बेहतर?
डिजिटल गोल्ड में छोटी रकम से निवेश किया जा सकता है। WGC के मुताबिक, जनवरी-सितंबर 2026 में डिजिटल गोल्ड की कुल खरीद 76% बढ़कर 16.3 टन पहुंच गई।
हालांकि, डिजिटल गोल्ड के लिए अलग से SEBI का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क नहीं है। इसलिए प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, सोने की स्टोरेज व्यवस्था और रिडेम्पशन नियम जांचना जरूरी है।
दूसरी ओर, गोल्ड ETF सेबी के म्यूचुअल फंड नियमों के तहत आते हैं। इनमें एक्सपेंस रेशियो और ब्रोकरेज जैसे खर्च हो सकते हैं।
खरीदारी से पहले टैक्स और जरूरत समझें
फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF पर टैक्स के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले टैक्स के बाद मिलने वाले रिटर्न पर भी ध्यान दें।
WGC के सर्वे में 77% लोगों ने कम शुद्धता वाली ज्वेलरी खरीदने और 76% ने पुराने सोने को एक्सचेंज करने पर विचार किया।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ त्योहार या कीमतों में तेजी देखकर सोना नहीं खरीदना चाहिए। गहने पहनने और गिफ्ट देने के लिए उपयोगी हैं, जबकि लंबी अवधि में निवेश के लिए गोल्ड ETF एक विकल्प हो सकता है।

