5 लाख का हेल्थ कवर पड़ेगा भारी? एक्सपर्ट बोले बीमारी आई तो बढ़ सकता है बड़ा खर्च
हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर कई लोग सिर्फ कंपनी से मिलने वाली पॉलिसी पर निर्भर रहते हैं। लेकिन एक्सपर्ट आदित्य शाह के मुताबिक यह पर्याप्त नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि सीमित बजट में भी रिटेल हेल्थ पॉलिसी, सुपर टॉपअप और सही प्लानिंग के जरिए मेडिकल खर्च के बड़े जोखिम से बचा जा सकता है।

In Short
- एक्सपर्ट आदित्य शाह ने कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस पर पूरी तरह निर्भर न रहने की सलाह दी
- 5 लाख रुपये का कवर गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कम पड़ सकता है
- सीमित बजट में सुपर टॉपअप और बेस पॉलिसी से बढ़ा सकते हैं हेल्थ कवर
आज के समय में मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस हर व्यक्ति के लिए जरूरी वित्तीय सुरक्षा बन गया है। कई लोगों के पास कंपनी की तरफ से मिलने वाला कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस होता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ इसी कवर पर निर्भर रहना पर्याप्त है या फिर अलग से रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Hercules Advisors के फाउंडर आदित्य शाह ने बताया कि सीमित बजट होने के बावजूद लोगों को अपनी अलग रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जरूर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस की अपनी सीमाएं होती हैं, जो आगे चलकर बड़ी परेशानी पैदा कर सकती हैं।
आदित्य शाह ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास सिर्फ 5 लाख रुपये का कॉरपोरेट हेल्थ कवर है और उसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता चलता है तो यह रकम पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी बीमारियों में बार-बार इलाज की जरूरत पड़ सकती है और खर्च कई सालों तक जारी रह सकता है।
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट पॉलिसी में नौकरी बदलने या कंपनी छोड़ने के बाद कवर खत्म होने जैसी चुनौतियां हो सकती हैं। ऐसे में व्यक्ति के पास अपनी व्यक्तिगत हेल्थ पॉलिसी होना जरूरी है, ताकि भविष्य में मेडिकल जरूरतों के समय आर्थिक सुरक्षा बनी रहे।
आदित्य शाह के मुताबिक, जिन लोगों का बजट सीमित है वे प्रीमियम कम रखने के लिए कुछ विकल्प अपना सकते हैं। उन्होंने बताया कि लोग कम प्रीमियम के लिए सुपर टॉप-अप पॉलिसी ले सकते हैं या फिर 10 लाख रुपये की बेस हेल्थ पॉलिसी से शुरुआत कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पॉलिसी में डिडक्टिबल जोड़ने से प्रीमियम कम किया जा सकता है। डिडक्टिबल का मतलब है कि क्लेम की एक तय राशि तक का खर्च व्यक्ति खुद उठाता है और उसके बाद इंश्योरेंस कंपनी भुगतान करती है।
आदित्य शाह ने कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस को पूरी तरह टालना अपने वित्तीय भविष्य के साथ बड़ा जोखिम लेने जैसा है। उन्होंने कहा कि एक बड़ा अस्पताल बिल किसी भी परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है, इसलिए कम बजट में भी सही हेल्थ कवर लेना जरूरी है।
उन्होंने सलाह दी कि लोग अपनी जरूरत, उम्र और आर्थिक स्थिति के हिसाब से हेल्थ इंश्योरेंस प्लान चुनें और सिर्फ कंपनी की ओर से मिलने वाले कवर पर पूरी तरह निर्भर न रहें।

