क्या LTCG टैक्स में कटौती से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की होगी वापसी?
भारत के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों पर लगने वाले टैक्स को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अमेरिका और सिंगापुर जैसे बड़े बाजारों से तुलना के बीच Ved Jain & Associates के पार्टनर अंकित जैन ने कई अहम सवाल उठाए हैं। क्या ज्यादा टैक्स विदेशी निवेश को प्रभावित कर रहा है और क्या सरकार राहत दे सकती है?

In Short
- अमेरिका और सिंगापुर जैसे बाजारों के मुकाबले भारत में विदेशी निवेशकों पर ज्यादा टैक्स का बोझ होने का दावा।
- कैपिटल गेन टैक्स, STT और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्च विदेशी निवेशकों के लिए बन सकते हैं बड़ी चुनौती।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान के बाद शेयर बाजार से जुड़े टैक्स में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा तेज।
भारत के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों पर लगने वाला टैक्स अब एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Ved Jain & Associates के पार्टनर अंकित जैन ने कहा कि अमेरिका, चीन, हांगकांग, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे बड़े बाजारों के मुकाबले भारत में विदेशी निवेशकों को ज्यादा टैक्स देना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार को अगले बजट से पहले कैपिटल गेन टैक्स और शेयर बाजार से जुड़े दूसरे टैक्स पर दोबारा विचार करना चाहिए?
विदेशी निवेशकों पर टैक्स का ज्यादा बोझ
अंकित जैन के मुताबिक, भारत उन बाजारों में शामिल है जहां विदेशी निवेशकों पर टैक्स का बोझ काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन, हांगकांग, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे बड़े बाजारों में विदेशी निवेशकों को इस तरह के टैक्स का सामना नहीं करना पड़ता।
भारत में कैपिटल गेन टैक्स के अलावा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, स्टांप ड्यूटी और दूसरे लेनदेन से जुड़े खर्च भी निवेशकों का बोझ बढ़ाते हैं। जैन का मानना है कि इन सभी को मिलाकर देखें तो भारत में निवेश करना दूसरे बाजारों के मुकाबले महंगा पड़ सकता है।
वित्त मंत्री के बयान से बाजार में दिखा असर
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बाजार से जुड़े टैक्स पर निवेशकों और दूसरे पक्षों की राय सुनने की बात कही थी। हालांकि, उन्होंने टैक्स घटाने या वापस लेने का कोई संकेत नहीं दिया।
इसके बावजूद बाजार में उनके बयान का सकारात्मक असर देखने को मिला। अंकित जैन के मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स पर दोबारा विचार करने की संभावना से जुड़े एक सामान्य बयान ने भी मुश्किल परिस्थितियों के बीच सेंसेक्स को अच्छी बढ़त दी।
विदेशी निवेश के फैसले में टैक्स कितना अहम?
अंकित जैन का कहना है कि विदेशी निवेशक किसी देश में पैसा लगाने से पहले सिर्फ टैक्स नहीं देखते। वे आर्थिक विकास, शेयरों की वैल्यूएशन, सरकारी नीतियों में स्थिरता और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी ध्यान देते हैं।
लेकिन जब दो देशों में निवेश से मिलने वाले रिटर्न का अंतर सिर्फ 150 बेसिस पॉइंट यानी 1.5 प्रतिशत अंक हो, तो टैक्स निवेश का फैसला बदल सकता है। ऐसे में ज्यादा टैक्स विदेशी पूंजी के लिए बड़ी रुकावट बन सकता है।
क्या सरकार को टैक्स में राहत देनी चाहिए?
अंकित जैन का मानना है कि सरकार को शेयर बाजार से जुड़े टैक्स में संतुलन बनाने की जरूरत है। पिछले कुछ वर्षों में इक्विटी निवेश पर टैक्स का बोझ बढ़ा है।
उनके मुताबिक, लंबे समय तक निवेश करने वालों या विदेशी निवेशकों को चुनिंदा टैक्स राहत देने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, सरकार को इससे मिलने वाले राजस्व का भी ध्यान रखना होगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि सरकार टैक्स से होने वाली कमाई और विदेशी निवेश आकर्षित करने के बीच संतुलन कैसे बनाती है। आने वाले बजट की चर्चाओं में यह मुद्दा अहम बन सकता है।

