क्या आप भी निवेश के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं?
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत 1986 में हुई थी और तबसे लेकर अब तक इसका पूरा सफर बेहद ही शानदार रहा है। 2006 में जब सेंसेक्स पहली बार 10,000 के लेवल तक पहुंचा था और इसे यह मुकाम हासिल करने में 2 दशक से अधिक का समय लगा था, 2007 में इसे दोगुना होने यानी 10 हजार से 20 हजार पहुंचने में सिर्फ एक साल लगा। एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स ने दिसंबर 2007 में 20 हजार का लेवल पार किया था।

लेखक- अजीत मेनन, सीईओ, पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत 1986 में हुई थी और तबसे लेकर अब तक इसका पूरा सफर बेहद ही शानदार रहा है। 2006 में जब सेंसेक्स पहली बार 10,000 के लेवल तक पहुंचा था और इसे यह मुकाम हासिल करने में 2 दशक से अधिक का समय लगा था, 2007 में इसे दोगुना होने यानी 10 हजार से 20 हजार पहुंचने में सिर्फ एक साल लगा। एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स ने दिसंबर 2007 में 20 हजार का लेवल पार किया था।
जैसे ही निवेशकों ने सेंसेक्स की इस उपलब्धि पर खुशी जताई, उनका पूरा उत्साह निराशा में बदल गया। वैश्विक स्तर पर वित्तीय मंदी का असर भारत सहित दुनिया भर में दिखा और 2008-10 के दौरान सेंसेक्स में 61 फीसदी (-61%) की गिरावट देखी गई। मैक्सिमम ड्रॉडाउन एक तय अवधि में किसी निवेश की वैल्यू में उसके पीक से लोएस्ट प्वॉइंट तक सबसे बड़ी गिरावट का माप (मीजर) है। यह दिखाता है कि अगर आपने हाइएस्ट प्वॉइंट यानी पीक पर खरीदारी की और सबसे कम पर बेचा तो आपको सबसे बड़ा नुकसान हो सकता था।
ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापक आर्थिक बदलावों में दिखती
मंदी के चलते बहुत से निवेशक डर गए और उस दौरान बाजार में नया निवेश करने या निवेश से बाहर निकलने को लेकर निर्णय करने से घबराने लगे। जब दुनिया मंदी के इस झटके से उबरी, 2 साल में यानी 2010 तक सेंसेक्स एक बार फिर अपने पिछले हाई लेवल पर पहुंच गया। 2007 में 20 हजार के लेवल से बढ़कर 2017 में 30 हजार के लेवल तक पहुंचने यानी 10 हजार अंक बढ़ने में सेंसेक्स को एक दशक लग गया। सितंबर 2024 में, सेंसेक्स ने 85000 का लेवल छूकर एक नई उपलब्धि हासिल की। यह ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापक आर्थिक बदलावों को दिखती है। MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेटेज एक दशक पहले के लगभग 6% से बढ़कर 2024 में 20% हो गया है। (सोर्स: MSCI)। हाल ही में, MSCI ग्लोबल इंडेक्स में भारत (2.35%) ने चीन (2.24%) को पीछे कर दिया और छठा सबसे बड़ा बाजार बन गया।
घरेलू निवेशकों द्वारा किए गए भारी निवेश
हाल के दिनों में लगातार घरेलू निवेशकों द्वारा किए गए भारी निवेश के चलते, गिरावट से उबरने में लगने वाले दिनों की संख्या कम होती जा रही है, इसलिए समय का इंतजार कर रहे निवेशकों के बाजार की रैली में चूक जाने का जोखिम है। बाजार के मूवमेंट को लेकर कोई भी भविष्यवाणी करना बेहद मुश्किल है, लेकिन यह अक्सर बात सही साबित हुई है कि बाजार में गिरावट आने पर निवेश करने से उन निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिल सकता है, जिनके पास अस्थिरता से निपटने के लिए धैर्य और बाजार के प्रति भरोसा है। इसलिए, सबसे अच्छा तरीका बाजार में गिरावट आने पर निवेश करना है।
जनवरी 2006 से लेकर सितंबर 2024 तक के कुछ डेटा
हमने जनवरी 2006 से लेकर सितंबर 2024 तक के कुछ डेटा की जांच की, जिसमें यह जानने का प्रयास किया कि सेंसेक्स के लिए सबसे अच्छे बेहतर प्रदर्शन वाले दिनों में किसी निवेशक के बाजार से गायब रहने की तुलना में इस पूरी अवधि में उसके द्वारा निवेश बनाए रहने का क्या प्रभाव पड़ा। नीचे दिया गया टेबल निवेशकों के अलग अलग ग्रुप द्वारा हासिल रिटर्न को दर्शाता है (बाजार से बाहर रहकर सबसे अच्छे दिन गंवाने की समय अवधि)। जाहिर है, जिन लोगों ने 18 साल की अवधि में निवेश बनाए रहकर धैर्य रखा है, उन्होंने 14% सीएजीआर से रिटर्न हासिल किया है।
यहां तक कि 5 सबसे अच्छे दिन भी चूकने से आपके पोर्टफोलियो को 3 फीसदी कम रिटर्न के साथ नुकसान हो सकता है, जबकि जो लोग 50 सबसे अच्छे दिन निवेश बनाए रहने से चूक गए, उन्हें निगेटिव 1 फीसदी (-1%) रिटर्न मिला, यानी उनका रिटर्न निगेटिव में चला गया। इस तरह की चुनौती से उबरने का एक आसान तरीका सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के माध्यम से निवेश करना है, ताकि आप बाजार के लिए सबसे अच्छे दिनों में फायदा उठाने से न चूकें। ज्यादातर निवेशकों के लिए, निवेश का यह तरीका "टाइमिंग द मार्केट" ("बाजार के समय निर्धारण") वाले पहलू को पूरे समीकरण से बाहर ले जाता है।
इस तरह हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ऐसे निवेशक जिन्होंने बाजार से जुड़ी खबरों या घटनाओं पर तुरंत कोई एक्शन लेकर प्रतिक्रिया नहीं दी, उन्होंने उन लोगों की तुलना में बेहतर रिटर्न हासिल किया है, जो बाजार में गिरावट के डर से बाजार से बाहर रहे या निवेश के लिए 'सही' समय का इंतजार कर रहे थे।
बाजार में निवेश का सही समय अभी है
एक निवेशकों के रूप में, आपने भी बाजार के आलटाइम पीक पर पहुंचने को लेकर खूब चर्चा सुनी होगी। लेकिन बाजार ने पहले भी कई बार अपना पीक बनाया है और इन स्तरों पर आपके निवेश के निर्णयों को आधार बनाना आपको नुकसान पहुंचा सकता है।
आपने एक कहावत सुनी होगी कि पेड़ लगाने का सबसे अच्छा समय 20 साल पहले था, दूसरा सबसे अच्छा समय अब है। यही बात बाजार में निवेश को लेकर भी लागू होती है। अगर आपने कभी इक्विटी में निवेश नहीं किया है और बाजार में गिरावट आने पर निवेश के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं, तो हो सकता है कि आप इंतजार में रह जाएं। इसके बजाय, आप अपने भरोसेमंद वित्तीय सलाहकार से परामर्श करके और जीवन में एक लक्ष्य बनाकर उसे पूरा करने के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं। निवेश शुरू करने के लिए हर समय सही है, इसलिए सही समय का इंतजार करना गलत रणनीति है।
निवेशकों को किन बातों पर रखना चाहिए ध्यान:
पहला, बाजार में क्या हो रहा है, इसकी परवाह किए बिना, एक लक्ष्य बनाकर निवेश करने की रणनीति का पालन करने से आपको अपनी पूरी निवेश यात्रा पर फोकस करने में मदद मिलती है। अगर आपका वर्तमान एसेट एलोकेशन अपने लक्ष्य से भटक गया है या भटक रहा है, तो एक फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेकर अपने एसेट एलोकेशन में जरूरी बदलाव कर बेहतर रिजल्ट हासिल कर सकते हैं।
दूसरा, जब आप किसी लक्ष्य के करीब होते हैं तो अपने पोर्टफोलियो को फिर से बैलेंस कर सकते हैं। जब आपका लक्ष्य पूरा होता दिख रहा है तो लक्ष्य तक पहुंचने से लगभग 6 से 12 महीने पहले, आप अपने फंड को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए कन्जर्वेटिव हाइब्रिड फंड में ट्रांसफर करना शुरू कर सकते हैं।
तीसरा, आप अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने पर उस समय विचार कर सकते हैं, जब आपका पोर्टफोलियो बेहतर प्रदर्शन न कर रहा हो या उसी कैटेगरी की दूसरी स्कीम या अपने बेंचमार्क की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर रहा हो. पोर्टफोलियो में नए फंड जोड़ने और कुछ पुराने फंड हटाने से न सिर्फ मार्केट कैप के माध्यम से डाइवर्सिफिकेशन के जरिए वैल्यू में ग्रोथ होगी, बल्कि वैल्यू, ग्रोथ, मोमेंटम और क्वालिटी जैसी इन्वेस्टमेंट स्टाइल में भी ग्रोथ होगी। जो निवेशक अस्थिरता का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें एसेट एलोकेशन में बदलाव के लिए अपने पास कुछ कैश रिजर्व रखने पर भी विचार करना चाहिए।
जो लोग जियो-पॉलिटिकल टेंशन के मिले जुले संकेतों, सेंसेक्स के हाइएस्ट लेवल पर पहुंचने और रह रहकर होने वाली अस्थिरता से चिंतित हैं, उनके लिए बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स/डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंड्स या यहां तक कि मल्टी एसेट फंड्स के माध्यम से इक्विटी में निवेश करना अच्छा विकल्प होगा। क्योंकि इन फंडों में आपकी ओर से एसेट एलोकेशन लेने और डाइवर्सिफिकेशन का लाभ देने के लिए इन-बिल्ट मॉडल है।
संक्षेप में कहें तो, बाजार अपनी जर्नी में समय समय पर उतार चढ़ाव के बीच इनोवेशन और ग्रोथ से प्रेरित होते रहेंगे। इस तरह, एक बार जब आप अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और लक्ष्य के आधार पर निवेश कर लेते हैं, तो आपको एक भरोसेमंद सलाहकार की मदद से समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और तब तक निवेश जारी रखने का प्रयास करना चाहिए जब तक कि आपके लक्ष्य पूरे न हो जाएं।
( ये लेखक के निजी विचार है बिजनेस टु़डे बाजार किसी भी विचार के लिए उत्तरदायी नहीं होगा)
