डेटा सेंटर और AI से रियल एस्टेट में आएगी नई तेजी? REITs के जरिए निवेशकों को कैसे मिल सकता है फायदा, जानें
AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग अब रियल एस्टेट सेक्टर की तस्वीर बदल रही है। कंपनियां पारंपरिक ऑफिस की जगह आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस बड़े कैंपस तैयार कर रही हैं। लेकिन क्या आम निवेशक बिना करोड़ों रुपये खर्च किए इस बदलाव का फायदा उठा सकते हैं? बिजनेस टुडे से बातचीत में एक्सपर्ट संचिता मुखर्जी ने REITs के अवसरों और निवेश से जुड़े जरूरी जोखिमों पर बात की।

In Short
- AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश के नए अवसर उभर रहे हैं।
- GCCs, बैंक और मल्टीनेशनल कंपनियां आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ा रही हैं।
- REITs को बढ़ती लीजिंग और किराये की आय से फायदा मिल सकता है, लेकिन निवेश से पहले लागत और कैश फ्लो समझना जरूरी है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब कमर्शियल रियल एस्टेट सिर्फ ऑफिस और दुकानों तक सीमित नहीं रह गया है। कंपनियां AI से लैस बड़े ऑफिस कैंपस, डेटा सेंटर और आधुनिक टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या बिना डेटा सेंटर खरीदे या बनाए भी इस बढ़ते कारोबार से कमाई की जा सकती है?
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए टॉक द वॉक एलएलपी की मैनेजिंग पार्टनर संचिता मुखर्जी ने कहा कि भारत समेत दुनियाभर में डेटा सेंटर कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहे हैं। हालांकि, निवेशकों को सिर्फ इस सेक्टर की बढ़ती मांग देखकर पैसा लगाने के बजाय उसकी लागत, कमाई और संभावित रिटर्न को भी समझना चाहिए।
डेटा सेंटर बनाने में क्यों लगता है इतना पैसा?
संचिता मुखर्जी के मुताबिक, AI से जुड़े डेटा सेंटर तैयार करने के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है। इनमें बिजली, कूलिंग सिस्टम, आधुनिक उपकरण और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर काफी खर्च आता है।
ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इतने बड़े निवेश से कितनी कमाई होगी, कितना कैश फ्लो आएगा और आखिर में निवेशकों को कितना पैसा मिल पाएगा।
भारत में कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग क्यों बढ़ रही है?
मुखर्जी ने बताया कि भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बैंकों, वित्तीय संस्थानों और मल्टीनेशनल कंपनियों की ओर से आधुनिक ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ रही है।
इसके अलावा AI से जुड़े डेटा सेंटर भी कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत इस क्षेत्र में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
अब कंपनियों को सिर्फ ऑफिस नहीं, स्मार्ट कैंपस चाहिए
पहले कंपनियों को कर्मचारियों के बैठने के लिए ऑफिस स्पेस की जरूरत होती थी, लेकिन अब उनकी प्राथमिकताएं बदल रही हैं।
कंपनियां बड़े कैंपस, AI से लैस वर्कस्पेस और आधुनिक टेक्नोलॉजी सुविधाओं वाली इमारतों को महत्व दे रही हैं। इसी वजह से रियल एस्टेट कंपनियां नए तरह के कमर्शियल प्रोजेक्ट तैयार कर रही हैं।
REITs में निवेश करने वालों को क्या फायदा?
संचिता मुखर्जी के मुताबिक, आधुनिक कमर्शियल प्रॉपर्टी की बढ़ती मांग से अच्छी लीजिंग और किराये की कमाई के अवसर बन रहे हैं।
इसका फायदा रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REITs को भी मिल सकता है। REITs ऐसी निवेश व्यवस्था है, जिसके जरिए निवेशक सीधे पूरी कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदे बिना किराये से कमाई करने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों में हिस्सेदारी ले सकते हैं।
हालांकि, AI और डेटा सेंटर सेक्टर में बढ़ोतरी का फायदा हर REIT को एक जैसा नहीं मिलेगा। निवेश से पहले उसकी संपत्तियों, किराये की आय, खर्च और निवेशकों को मिलने वाले वितरण का आकलन करना जरूरी है।

