एक नहीं कुल 7 प्रकार की होती है SIP! आपको कितनों के बारे में पता है?
SIP के जरिए निवेशक तय रकम को हर महीने या किसी निश्चित अंतराल पर म्यूचुअल फंड में लगाकर लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की कोशिश करते हैं। एसबीआई म्यूचुअल फंड ब्लॉग के मुताबिक SIP सिर्फ एक तरह की नहीं बल्कि कुल 7 प्रकार की होती है।

In Short
- SIP सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई तरह की होती है। रेगुलर, स्टेप-अप, फ्लेक्सी, परपेचुअल, ट्रिगर और मल्टी SIP अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से बनाई गई हैं।
- अगर आपकी आय समय के साथ बढ़ती है तो स्टेप-अप SIP, जबकि बाजार के हिसाब से निवेश बदलना चाहते हैं तो फ्लेक्सी SIP बेहतर विकल्प हो सकती है।
- सही SIP का चुनाव आपके वित्तीय लक्ष्य, आय, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश की अवधि पर निर्भर करता है।
Types of SIP: म्यूचुअल फंड में निवेश की बात आते ही सबसे पहले सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का नाम सामने आता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी आसान प्रक्रिया और नियमित निवेश की सुविधा है।
SIP के जरिए निवेशक तय रकम को हर महीने या किसी निश्चित अंतराल पर म्यूचुअल फंड में लगाकर लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की कोशिश करते हैं। एसबीआई म्यूचुअल फंड ब्लॉग के मुताबिक SIP सिर्फ एक तरह की नहीं बल्कि कुल 7 प्रकार की होती है।
1) रेगुलर एसआईपी
रेगुलर या फिक्स्ड SIP सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ऑप्शन है। इसमें निवेशक हर महीने या तिमाही एक तय राशि निवेश करता है। यह तरीका निवेश में अनुशासन बनाए रखता है और रुपये की लागत औसत (Rupee Cost Averaging) का फायदा देता है। बाजार में गिरावट के दौरान ज्यादा और तेजी के समय कम यूनिट मिलने से लंबे समय में औसत खरीद लागत कम हो सकती है।
2) स्टेप-अप एसआईपी
स्टेप-अप या टॉप-अप SIP उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है जिनकी इनकम समय के साथ बढ़ती है। इसमें निवेशक हर साल या तय अवधि के बाद अपनी SIP राशि बढ़ा सकता है। इससे महंगाई के असर को संतुलित करने और वित्तीय लक्ष्य जल्दी हासिल करने में मदद मिल सकती है।
3) फ्लेक्सी एसआईपी
फ्लेक्सी SIP निवेशकों को अपनी वित्तीय स्थिति या बाजार के हालात के अनुसार SIP राशि बढ़ाने या घटाने की सुविधा देता है। बाजार में गिरावट आने पर निवेश बढ़ाया जा सकता है, जबकि नकदी की जरूरत होने पर राशि कम की जा सकती है। हालांकि, इसके लिए बाजार की समझ और नियमित निगरानी जरूरी होती है।
4) परपेचुअल एसआईपी
परपेचुअल SIP में निवेश तब तक जारी रहता है, जब तक निवेशक खुद इसे बंद नहीं करता। इसमें बार-बार SIP रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होती। लंबे समय तक लगातार निवेश करने वाले लोगों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है।
5) ट्रिगर एसआईपी
ट्रिगर SIP में निवेश पहले से तय बाजार स्तर, इंडेक्स या नेट एसेट वैल्यू (NAV) जैसे संकेतकों के आधार पर होता है। यह विकल्प अनुभवी निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इसमें बाजार की अच्छी समझ और सक्रिय निगरानी की जरूरत होती है।
6) मल्टी एसआईपी
मल्टी SIP के जरिए निवेशक एक ही ट्रांजैक्शन से कई म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश कर सकता है। इससे पोर्टफोलियो में विविधता लाना आसान हो जाता है और अलग-अलग एसेट क्लास या फंड कैटेगरी में निवेश को सरल बनाया जा सकता है।

