scorecardresearch

Target Maturity Funds: डेट निवेश का ऐसा विकल्प, जहां तय समय के साथ घट सकता है ब्याज दर का जोखिम

डेट मार्केट में निवेश करने वाले लोगों के लिए Target Maturity Funds एक ऐसा विकल्प हैं जो तय समय सीमा और इंडेक्स आधारित निवेश की सुविधा देते हैं। ये फंड G-Secs, SDLs और PSU बॉन्ड्स जैसी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकते हैं। हालांकि इनमें रिटर्न की गारंटी नहीं होती और निवेश से पहले जोखिम को समझना जरूरी है।

Advertisement
Target Maturity Funds क्या हैं?
Target Maturity Funds क्या हैं?

In Short

  • Target Maturity Funds तय बॉन्ड इंडेक्स को ट्रैक करने वाले डेट म्यूचुअल फंड होते हैं
  • मैच्योरिटी के करीब आने पर पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन और ब्याज दर संवेदनशीलता घट सकती है
  • निवेश से पहले YTM, ड्यूरेशन, क्रेडिट क्वालिटी और अपने वित्तीय लक्ष्य को समझना जरूरी है

आज के समय में निवेशक सिर्फ रिटर्न ही नहीं बल्कि सुरक्षा, समय सीमा और लक्ष्य के हिसाब से निवेश विकल्प तलाशते हैं। ऐसे निवेशकों के लिए Target Maturity Funds (TMF) डेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी का एक विकल्प हो सकते हैं। ये फंड किसी तय बॉन्ड इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और उसी की मैच्योरिटी प्रोफाइल के अनुसार पोर्टफोलियो तैयार करते हैं।

advertisement

इन फंड्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनकी एक तय मैच्योरिटी डेट होती है। जैसे-जैसे फंड उस तारीख के करीब पहुंचता है, पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन आमतौर पर कम होती जाती है। इससे ब्याज दरों में बदलाव का असर घट सकता है। हालांकि, Target Maturity Funds को फिक्स्ड डिपॉजिट जैसा गारंटीड रिटर्न वाला निवेश नहीं माना जा सकता, क्योंकि इनके रिटर्न बाजार की स्थिति से जुड़े होते हैं।

कैसे काम करते हैं Target Maturity Funds?

Target Maturity Funds किसी खास बॉन्ड इंडेक्स को फॉलो करते हैं। यह इंडेक्स तय करता है कि फंड किन सिक्योरिटीज में निवेश करेगा, उनका वजन कितना होगा और उनकी मैच्योरिटी कितनी होगी। इन फंड्स में सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs), स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs), PSU बॉन्ड्स और अन्य योग्य डेट सिक्योरिटीज शामिल हो सकती हैं।

फंड का पोर्टफोलियो समय के साथ अपने टारगेट मैच्योरिटी की ओर बढ़ता रहता है। जैसे-जैसे बॉन्ड्स की बची हुई अवधि कम होती है, पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन भी घटती जाती है। इससे ब्याज दरों में बदलाव से NAV पर पड़ने वाला असर कम हो सकता है।

इन फंड्स में कहां होता है निवेश?

Target Maturity Funds का निवेश उनके इंडेक्स की संरचना पर निर्भर करता है। कुछ फंड सरकारी बॉन्ड्स पर आधारित होते हैं, जबकि कुछ में SDL और PSU बॉन्ड्स का मिश्रण हो सकता है।

G-Secs यानी सरकारी सिक्योरिटीज भारत सरकार की ओर से जारी की जाती हैं और इनमें क्रेडिट या डिफॉल्ट रिस्क काफी कम माना जाता है। हालांकि, इनमें भी ब्याज दरों में बदलाव का असर हो सकता है।

SDL यानी State Development Loans राज्य सरकारों द्वारा जारी किए जाते हैं। इनमें क्रेडिट रिस्क कम हो सकता है, लेकिन ब्याज दर, लिक्विडिटी और बाजार में स्प्रेड बदलाव का असर बना रहता है।

वहीं PSU और अन्य बॉन्ड्स में निवेश करने वाले फंड्स में क्रेडिट क्वालिटी, रेटिंग में बदलाव और लिक्विडिटी जैसे जोखिमों को समझना जरूरी है।

Roll Down क्या होता है?

Target Maturity Funds में एक महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट Roll Down होता है। इसका मतलब है कि समय बीतने के साथ बॉन्ड की बची हुई मैच्योरिटी कम होती जाती है। इससे पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन घट सकती है और ब्याज दरों में बदलाव के प्रति संवेदनशीलता कम हो सकती है।

advertisement

हालांकि, Roll Down को गारंटीड रिटर्न का जरिया नहीं माना जाना चाहिए। बाजार की स्थिति, बॉन्ड की कीमत और अन्य फैक्टर रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या मैच्योरिटी तक रखने से जोखिम खत्म हो जाता है?

कई निवेशक मानते हैं कि Target Maturity Fund को मैच्योरिटी तक रखने पर जोखिम खत्म हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। मैच्योरिटी तक निवेश बनाए रखने से बीच के NAV उतार-चढ़ाव का असर कम हो सकता है, लेकिन क्रेडिट रिस्क, लिक्विडिटी, खर्च और री-इन्वेस्टमेंट जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं।

अगर निवेशक मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालता है तो उसे उस समय के NAV के आधार पर पैसा मिलेगा, जो बाजार की स्थिति के अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है।

Target Maturity Funds के फायदे

तय निवेश अवधि: इनकी मैच्योरिटी डेट किसी खास वित्तीय लक्ष्य के साथ मिलाई जा सकती है। पोर्टफोलियो में पारदर्शिता: इंडेक्स आधारित होने के कारण निवेशक समझ सकते हैं कि फंड किस तरह की सिक्योरिटीज में निवेश करता है। बॉन्ड्स में डायवर्सिफाइड निवेश: एक म्यूचुअल फंड के जरिए कई बॉन्ड्स में निवेश का मौका मिलता है।

advertisement

ओपन एंडेड सुविधा: कई TMF में मैच्योरिटी से पहले भी रिडीम करने की सुविधा होती है, हालांकि पैसा निकालने पर उस समय के NAV का असर पड़ेगा।


निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

Target Maturity Fund चुनते समय सिर्फ ज्यादा YTM यानी Yield to Maturity देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को फंड की मैच्योरिटी, ड्यूरेशन, पोर्टफोलियो में शामिल सिक्योरिटीज, लागत और जोखिम को समझना चाहिए।

YTM सिर्फ उस समय के पोर्टफोलियो यील्ड को दिखाता है, यह निवेशक के अंतिम रिटर्न की गारंटी नहीं होता। बाजार में बदलाव, बॉन्ड की कीमत, खर्च और पोर्टफोलियो में बदलाव से वास्तविक रिटर्न अलग हो सकता है।

किन निवेशकों के लिए हो सकते हैं सही?

Target Maturity Funds उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं जिनका कोई तय वित्तीय लक्ष्य है और जिनका निवेश समय फंड की मैच्योरिटी अवधि से मेल खाता है। निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता, लिक्विडिटी की ज़रूरत और डेट मार्केट की समझ के आधार पर फैसला लेना चाहिए।

वहीं जो निवेशक पूरी तरह सुरक्षित निवेश या गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, उन्हें यह समझना जरूरी है कि TMF बाजार से जुड़े निवेश हैं और इनमें उतार-चढ़ाव संभव है।

advertisement

कुल मिलाकर, Target Maturity Funds डेट निवेश में एक स्ट्रक्चर्ड और इंडेक्स-आधारित विकल्प देते हैं। लेकिन निवेश से पहले अपने लक्ष्य, समय सीमा और जोखिम को समझना जरूरी है।
 

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।