Nippon India vs SBI Hybrid Fund: नए NFO में कहां मिलेगा बेहतर मौका, निवेश से पहले समझें बड़ा अंतर
नए हाइब्रिड फंड एनएफओ निवेशकों के लिए बाजार में आ गए हैं, लेकिन दोनों की रणनीति एक-दूसरे से काफी अलग है। एक तरफ डेट और आर्बिट्राज का कॉम्बिनेशन है, तो दूसरी ओर इक्विटी और डेट का संतुलन। जानिए कौन सा फंड किस तरह के निवेशकों के लिए बेहतर हो सकता है।

In Short
- निप्पॉन इंडिया और एसबीआई के नए हाइब्रिड फंड की रणनीति में बड़ा अंतर
- डेट आर्बिट्राज और इक्विटी डेट मॉडल को समझें आसान भाषा में
- निवेश से पहले जोखिम टैक्स और रिटर्न की पूरी जानकारी जानें
म्यूचुअल फंड मार्केट में दो नए हाइब्रिड फंड एनएफओ निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड और एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अलग-अलग रणनीति के साथ अपने नए फंड लॉन्च किए हैं। जहां निप्पॉन इंडिया का फंड डेट और आर्बिट्राज को मिलाकर रिटर्न देने की कोशिश करेगा, वहीं एसबीआई का फंड इक्विटी और डेट के संतुलन पर काम करेगा। दोनों फंड की रणनीति और जोखिम अलग हैं, इसलिए निवेश से पहले इनके अंतर को समझना जरूरी है।
निवेश रणनीति में क्या है अंतर
निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंड अपने कुल एसेट का 95 से 100 फीसदी हिस्सा घरेलू आर्बिट्राज स्कीम और एक्टिव व पैसिव डेट आधारित म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करेगा। बाकी 0 से 5 फीसदी रकम डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में लगाई जा सकेगी।
वहीं एसबीआई बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड में 40 से 60 फीसदी निवेश इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट में किया जाएगा। बाकी 40 से 60 फीसदी हिस्सा डेट सिक्योरिटीज और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाएगा। इस फंड में आर्बिट्राज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
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जोखिम और रिटर्न का तरीका भी अलग
निप्पॉन इंडिया का फंड डेट निवेश से मिलने वाली स्थिरता के साथ आर्बिट्राज रणनीति को जोड़ता है। यह उन निवेशकों के लिए बनाया गया है जो कम से कम दो साल के निवेश में बेहतर रिस्क एडजस्टेड रिटर्न की उम्मीद रखते हैं।
दूसरी तरफ एसबीआई बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड एक पारंपरिक इक्विटी और डेट आधारित रणनीति अपनाएगा। इसमें मिलने वाला रिटर्न शेयर बाजार की चाल, फिक्स्ड इनकम निवेश और फंड मैनेजर के एसेट एलोकेशन पर निर्भर करेगा।
निवेश का तरीका भी है अलग
निप्पॉन इंडिया का फंड फंड ऑफ फंड स्ट्रक्चर पर आधारित है। यानी यह सीधे शेयर या बॉन्ड में निवेश नहीं करेगा, बल्कि दूसरे म्यूचुअल फंड की यूनिट खरीदकर निवेश करेगा। इसमें फंड मैनेजर एक्टिव डेट, पैसिव डेट और आर्बिट्राज स्कीम के बीच पैसा बांटेंगे।
वहीं एसबीआई बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड सीधे इक्विटी, इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट, डेट सिक्योरिटीज, सिक्योरिटाइज्ड डेट, डेट डेरिवेटिव और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करेगा। तय सीमा के तहत यह ओवरसीज सिक्योरिटीज और ईटीएफ में भी निवेश कर सकता है।
न्यूनतम निवेश और एग्जिट लोड में अंतर
निप्पॉन इंडिया के एनएफओ में न्यूनतम निवेश 500 रुपये रखा गया है। इसके बाद निवेशक 100 रुपये से अतिरिक्त निवेश कर सकते हैं। इस फंड में एग्जिट लोड नहीं लगेगा।
वहीं एसबीआई बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड में न्यूनतम आवेदन राशि 5,000 रुपये है। अगर निवेशक एक साल के अंदर खरीदी गई यूनिट के 10 फीसदी से ज्यादा हिस्से को रिडीम या स्विच आउट करते हैं तो 1 फीसदी एग्जिट लोड लगेगा। एक साल बाद एग्जिट लोड नहीं लगेगा।
बेंचमार्क और टैक्स नियमों में अंतर
निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंड का बेंचमार्क 60 फीसदी क्रिसिल शॉर्ट टर्म बॉन्ड इंडेक्स और 40 फीसदी निफ्टी 50 आर्बिट्राज इंडेक्स होगा। स्कीम की जानकारी के अनुसार, कुछ शर्तें पूरी होने पर 24 महीने से ज्यादा के निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स 12.5 फीसदी हो सकता है।
एसबीआई बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड का बेंचमार्क निफ्टी 50 हाइब्रिड कंपोजिट डेट 50:50 इंडेक्स होगा। इसका फोकस इक्विटी और डेट निवेश के बीच संतुलन बनाना है।
दोनों नए एनएफओ अलग-अलग तरह के निवेशकों के लिए तैयार किए गए हैं। निप्पॉन इंडिया का फंड डेट और आर्बिट्राज आधारित रणनीति पर काम करता है, जबकि एसबीआई का फंड इक्विटी और डेट के संतुलन पर आधारित है। इसलिए निवेश करने से पहले निवेशकों को अपने रिस्क, निवेश अवधि, टैक्स और पोर्टफोलियो की जरूरत को समझना चाहिए। निप्पॉन इंडिया एनएफओ 17 अगस्त से 31 अगस्त तक खुला रहेगा, जबकि एसबीआई एनएफओ 24 अगस्त को बंद होगा।

