रुपया कमजोर, बॉन्ड यील्ड तेज! सरकार की ₹7.9 लाख करोड़ की उधारी से बढ़ी बाजार की टेंशन
सरकार की अक्टूबर-मार्च अवधि की उधारी में लंबी अवधि के बॉन्ड की हिस्सेदारी बढ़ने से भारतीय बॉन्ड बाजार पर दबाव बढ़ा है। 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 7.19% तक पहुंच गई, जबकि 15 साल की यील्ड भी तेजी से बढ़ी। RBI की बॉन्ड बिक्री और कच्चे तेल की कीमतों ने भी दबाव बढ़ाया।

सरकार की अक्टूबर-मार्च अवधि की उधारी में लंबी अवधि के बॉन्ड की हिस्सेदारी बढ़ने से भारतीय बॉन्ड बाजार पर दबाव बढ़ गया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 7 बेसिस पॉइंट बढ़कर 7.19% पहुंच गई, जो अप्रैल 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, रुपये पर भी दबाव रहा और डॉलर के मुकाबले यह 0.2% कमजोर होकर 95.9850 पर आ गया।
15 साल की यील्ड में 10 बेसिस पॉइंट की तेजी
15 साल के बॉन्ड की यील्ड 10 बेसिस पॉइंट बढ़कर 7.37% हो गई। सरकार अक्टूबर से मार्च के बीच 7.9 लाख करोड़ रुपये की उधारी करेगी, जो तय लक्ष्य के करीब है। हालांकि, बाजार में आने वाली उधारी की औसत अवधि पहली छमाही के मुकाबले कुछ ज्यादा है।
Jana Small Finance Bank के हेड ऑफ ट्रेजरी गोपाल त्रिपाठी ने कहा, “दूसरी छमाही (H2) में सरकार की उधारी का आकार लगभग उम्मीद के मुताबिक है, लेकिन बाजार में आने वाली बॉन्ड की अवधि पहली छमाही (H1) की तुलना में थोड़ी ज्यादा है। इसका दबाव बॉन्ड बाजार पर पड़ रहा है।”
RBI ने 25,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे
बॉन्ड बाजार पर एक और दबाव RBI की बॉन्ड बिक्री से आया। केंद्रीय बैंक ने अपनी लिक्विडिटी-ड्रेन ऑपरेशन के तहत 25,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे। यह 17 सितंबर को घोषित बिक्री की आखिरी किश्त थी।
RBI ने बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त लिक्विडिटी घटाने के लिए रातभर के वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑक्शन के जरिए भी 1.1 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त बैंकिंग लिक्विडिटी अस्थायी रूप से वापस ली। हालांकि, इसके लिए 2 लाख करोड़ रुपये की योजना बनाई गई थी।
अमेरिकी यील्ड और कच्चे तेल से भी दबाव
भारतीय बॉन्ड पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भी असर पड़ा। US Treasury यील्ड फिर 5.20% तक पहुंच गई है। छोटी अवधि के बॉन्ड पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद का दबाव बना हुआ है।
