scorecardresearch

Mutual Fund SIP में दिखा बड़ा बदलाव, अब छोटी अवधि नहीं लंबे निवेश पर भरोसा कर रहे हैं निवेशक

SIP निवेशकों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब ज्यादा लोग बाजार में लंबे समय तक बने रहना पसंद कर रहे हैं। पांच साल से ज्यादा समय वाले SIP निवेश की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। जानिए इस बदलाव का आपके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो पर क्या असर पड़ सकता है।

Advertisement

In Short

  • 5 साल से ज्यादा समय तक रखे गए SIP निवेश की हिस्सेदारी मार्च 2026 में बढ़कर 31% हुई, जो मार्च 2021 में 12.3% थी।
  • SIP AUM पांच साल में करीब चार गुना बढ़कर ₹14.83 लाख करोड़ पहुंच गया और इंडस्ट्री AUM में इसकी हिस्सेदारी भी बढ़ी।
  • रिटेल निवेशकों के बीच SIP का भरोसा बढ़ा, उनके कुल AUM में SIP की हिस्सेदारी 33.5% से बढ़कर 45% हुई।

भारतीय म्यूचुअल फंड निवेशकों का नजरिया धीरे-धीरे बदलता दिख रहा है। SIP से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि अब ज्यादा निवेशक लंबे समय तक अपना पैसा बाजार में बनाए रख रहे हैं। AMFI-Crisil Factbook 2026 के मुताबिक, मार्च 2026 में 5 साल से ज्यादा समय तक रखे गए SIP एसेट्स की हिस्सेदारी बढ़कर 31% हो गई है, जो मार्च 2021 में सिर्फ 12.3% थी।

advertisement

वहीं, एक साल से कम समय वाले SIP निवेश की हिस्सेदारी घटकर 21.1% रह गई है, जो मार्च 2021 में 37% थी। यह बदलाव दिखाता है कि निवेशक अब SIP को सिर्फ छोटी अवधि के विकल्प की तरह नहीं, बल्कि लंबे समय में संपत्ति बनाने के तरीके के तौर पर देख रहे हैं।

SIP AUM में करीब चार गुना बढ़ोतरी

SIP का महत्व म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में लगातार बढ़ा है। मार्च 2021 से मार्च 2026 के बीच SIP AUM करीब चार गुना बढ़कर ₹14.83 लाख करोड़ पहुंच गया। कुल म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री AUM में SIP की हिस्सेदारी भी 13.5% से बढ़कर 20.1% हो गई।

मासिक SIP योगदान में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। मार्च 2026 में यह आंकड़ा ₹32,087 करोड़ पहुंच गया, जबकि मार्च 2017 में यह ₹4,335 करोड़ था। अप्रैल 2021 से मार्च 2026 के बीच मासिक SIP योगदान में 30.7% की दर से बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड के बाद निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से इसमें तेजी आई।

रिटेल निवेशकों में बढ़ा SIP का भरोसा

SIP में बढ़ती दिलचस्पी सबसे ज्यादा रिटेल निवेशकों के बीच देखने को मिली है। रिटेल निवेशकों के कुल AUM में SIP AUM की हिस्सेदारी FY21 के 33.5% से बढ़कर FY26 में 45% हो गई।

वहीं HNI निवेशकों के लिए यह हिस्सेदारी 15% से बढ़कर 20.9% और NRI निवेशकों के लिए 20.8% से बढ़कर 26.7% हो गई। इसके उलट, बैंक और कॉरपोरेट निवेशकों के बीच SIP निवेश अभी भी काफी कम है और उनका SIP AUM कुल AUM के 2% से नीचे है।

इक्विटी स्कीम में सबसे ज्यादा निवेश

SIP निवेशकों की पहली पसंद अब भी इक्विटी फंड बने हुए हैं। FY26 में कुल ₹3.40 लाख करोड़ के SIP फ्लो में से ₹2.87 लाख करोड़ इक्विटी आधारित स्कीम में गए।

हालांकि, निवेशकों की पसंद धीरे-धीरे दूसरी कैटेगरी में भी बढ़ रही है। मार्च 2021 से मार्च 2026 के बीच हाइब्रिड SIP AUM ₹0.33 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.11 लाख करोड़ हो गया। वहीं पैसिव SIP AUM भी ₹0.03 लाख करोड़ से बढ़कर ₹0.46 लाख करोड़ पहुंच गया।

पांच साल के ट्रेंड से क्या संकेत मिलते हैं?

SIP डेटा बताता है कि निवेशक अब बाजार में बार-बार बदलाव करने के बजाय लंबे समय तक बने रहने की रणनीति अपना रहे हैं। पांच साल से ज्यादा समय तक SIP निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी इस बात का संकेत है कि निवेशकों के बीच अनुशासन और लंबी अवधि की सोच मजबूत हो रही है।

advertisement

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर निवेशक को हर हाल में पांच साल तक निवेश जारी रखना चाहिए। यह ट्रेंड सिर्फ यह दिखाता है कि SIP अब भारत में लंबे समय के लिए वेल्थ क्रिएशन का एक अहम माध्यम बनता जा रहा है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।