
Mutual Fund में पैसा लगाने की कर रहे हैं प्लानिंग? सिर्फ रिटर्न देखकर न करें निवेश, पहले जान लें ये 7 बातें
म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सोच रहे हैं तो सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर फैसला लेना सही नहीं होगा। बाजार में कई तरह की स्कीम मौजूद हैं, लेकिन हर स्कीम आपके लिए सही नहीं होती। जानिए निवेश से पहले किन जरूरी बातों की जांच करनी चाहिए और सही फंड कैसे चुनें।

In Short
- म्यूचुअल फंड चुनते समय सिर्फ पुराने रिटर्न नहीं, निवेश के लक्ष्य और जोखिम पर भी ध्यान देना जरूरी।
- इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और इंडेक्स फंड की अलग-अलग कैटेगरी निवेशकों की जरूरतों के मुताबिक होती हैं।
- निवेश से पहले एक्सपेंस रेशियो, बेंचमार्क प्रदर्शन और स्कीम के रिस्कोमीटर की जांच करना जरूरी।
भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प है। लेकिन इतने सारे म्यूचुअल फंड होने के कारण सही स्कीम चुनना आसान नहीं होता। अक्सर निवेशक ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड की तलाश करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि पिछले कुछ सालों में अच्छा प्रदर्शन करने वाला फंड आपके लिए भी सही हो। दरअसल, हर निवेशक के वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि अलग होती है। ऐसे में म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है।
म्यूचुअल फंड चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान?
निवेश के लिए कोई एक म्यूचुअल फंड सभी लोगों के लिए सबसे अच्छा नहीं हो सकता। सही फंड चुनने के लिए उसके पिछले रिटर्न के अलावा कई चीजों की जांच करनी चाहिए।
सबसे पहले यह देखें कि फंड आपके वित्तीय लक्ष्य के मुताबिक है या नहीं। उदाहरण के लिए, आप रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं या घर खरीदने के लिए पैसा जुटाना चाहते हैं।
इसके अलावा निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। आपको यह समझना होगा कि बाजार में उतार-चढ़ाव और संभावित नुकसान कितना सह सकते हैं।
निवेश से पहले इन 7 बातों की करें जांच
म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले इन सात बातों पर ध्यान देना चाहिए।
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वित्तीय लक्ष्य: फंड आपके निवेश के उद्देश्य से मेल खाना चाहिए।
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निवेश की अवधि: लक्ष्य पूरा करने के लिए आपके पास कितना समय है, यह देखें।
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जोखिम उठाने की क्षमता: बाजार में उतार-चढ़ाव और नुकसान सहने की क्षमता समझें।
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फंड की कैटेगरी: इक्विटी, डेट, हाइब्रिड या इंडेक्स फंड में से सही विकल्प चुनें।
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बेंचमार्क से तुलना: अलग-अलग अवधि में फंड के रिटर्न की तुलना उसके बेंचमार्क से करें।
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एक्सपेंस रेशियो: फंड चलाने के खर्च की जांच करें, क्योंकि इसका असर रिटर्न पर पड़ सकता है।
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एसेट एलोकेशन: देखें कि फंड का पैसा इक्विटी, डेट, कमोडिटी और दूसरे निवेश विकल्पों में कितना लगा है।

कितने तरह के होते हैं म्यूचुअल फंड?
म्यूचुअल फंड की अलग-अलग कैटेगरी होती हैं। इक्विटी फंड लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए होते हैं, लेकिन इनमें बाजार से जुड़ा जोखिम रहता है।
हाइब्रिड फंड में इक्विटी, डेट और दूसरे एसेट का मिश्रण होता है। डेट फंड स्कीम के आधार पर कम अवधि की जरूरतों या आय से जुड़े उद्देश्यों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
लाइफ साइकिल फंड में समय के साथ निवेश का बंटवारा बदलता है। वहीं इंडेक्स फंड और ETF किसी खास मार्केट इंडेक्स को ट्रैक करते हैं। फंड ऑफ फंड्स दूसरे म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं।
कहां से करें म्यूचुअल फंड में निवेश?
निवेशक सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC), फिनटेक प्लेटफॉर्म या वित्तीय सलाहकार की मदद से म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं।
निवेश से पहले स्कीम का रिस्कोमीटर, ऑफर डॉक्यूमेंट और निवेश की सुझाई गई अवधि जरूर देखें। रिस्कोमीटर समझने के लिए SEBI की गाइड भी पढ़ सकते हैं। साथ ही, एक ही कैटेगरी में अलग-अलग AMC की स्कीम की तुलना करना बेहतर रहेगा।

