FoF में SIP करना चाहिए या नहीं? निवेश से पहले समझें खर्च, जोखिम और रिटर्न की पूरी जानकारी
FoF में SIP के जरिए एक ही स्कीम से कई तरह के फंडों में हर महीने निवेश किया जा सकता है। हालांकि यह सुविधा हर निवेशक के लिए सही नहीं होती। पैसा लगाने से पहले स्कीम का खर्च, उसमें शामिल फंड, जोखिम और अपने निवेश का लक्ष्य समझना जरूरी है।

In Short
- FoF में निवेशकों का पैसा सीधे शेयर या बॉन्ड के बजाय दूसरी म्यूचुअल फंड स्कीमों में लगाया जाता है।
- FoF में एक से ज्यादा स्तर पर खर्च हो सकता है, जिसका असर लंबे समय के रिटर्न पर पड़ सकता है।
- कई फंड शामिल होने के बावजूद एक ही कंपनी या सेक्टर में बार-बार निवेश होने का खतरा रह सकता है।
Fund of Funds: म्यूचुअल फंड में हर महीने तय रकम लगाने के लिए एसआईपी का तरीका काफी पसंद किया जाता है। निवेशक फंड ऑफ फंड्स यानी FoF में भी एसआईपी शुरू कर सकते हैं। FoF ऐसी म्यूचुअल फंड स्कीम है, जो आपका पैसा सीधे शेयर या बॉन्ड में लगाने के बजाय दूसरी म्यूचुअल फंड स्कीमों में लगाती है।
इसके जरिए एक ही स्कीम से शेयर बाजार, कर्ज से जुड़े फंड, सोना या विदेशी बाजारों में निवेश का मौका मिल सकता है। लेकिन लंबे समय के लिए FoF में एसआईपी करना हर व्यक्ति के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है। इसका फैसला आपके निवेश के मकसद, स्कीम के खर्च और उसमें मौजूद खतरे के आधार पर होना चाहिए।
हर महीने थोड़े पैसे से निवेश की शुरुआत
एसआईपी कोई अलग तरह का निवेश नहीं है। यह म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने का एक तरीका है। इसमें निवेशक हर महीने या तय समय पर एक निश्चित रकम लगाता है।
इससे एक साथ बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही हर महीने बचत और निवेश करने की आदत भी बन सकती है। FoF में एसआईपी करने पर पैसा अलग-अलग समय पर स्कीम में जाता है। बाजार नीचे होने पर ज्यादा यूनिट और बाजार ऊपर होने पर कम यूनिट मिल सकती हैं।
हालांकि केवल एसआईपी करने से मुनाफा पक्का नहीं हो जाता। बाजार में गिरावट आने पर निवेश की कीमत भी कम हो सकती है।
पहले तय करें पैसा किस काम के लिए चाहिए
FoF कई तरह के होते हैं। कुछ FoF सोने से जुड़े फंड में पैसा लगाते हैं, कुछ विदेशी बाजारों में और कुछ शेयर, कर्ज और सोने से जुड़े फंडों के बीच पैसा बांटते हैं।
इसलिए केवल यह देखकर FoF नहीं चुनना चाहिए कि उसमें एसआईपी की सुविधा मिल रही है। पहले यह तय करना जरूरी है कि पैसा बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदने या रिटायरमेंट जैसे किस लक्ष्य के लिए लगाया जा रहा है।
इसके बाद देखें कि चुना गया FoF आपके लक्ष्य और नुकसान सहने की क्षमता के हिसाब से सही है या नहीं।
एक नहीं, दो जगह लगता है खर्च
FoF का खर्च सामान्य म्यूचुअल फंड से थोड़ा अलग हो सकता है। पहला खर्च FoF स्कीम को चलाने का होता है। दूसरा खर्च उन फंडों का होता है, जिनमें FoF आपका पैसा लगाता है।
यह खर्च सीधे स्कीम के पैसे से काटा जाता है। इसलिए इसका असर निवेशक को मिलने वाले रिटर्न पर पड़ता है। लंबे समय तक एसआईपी चलाने पर खर्च में छोटा-सा फर्क भी आखिर में मिलने वाली रकम को कम कर सकता है।
कई फंड देखकर कम खतरा न मानें
FoF में कई फंड शामिल हो सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि आपका पैसा सच में अलग-अलग जगह बंटा हो। हो सकता है कि कई फंडों ने उन्हीं कंपनियों या कारोबार के हिस्सों में पैसा लगाया हो।
ऐसे में एक ही जगह बार-बार निवेश हो सकता है। सोने, शेयर या विदेशी बाजार से जुड़े FoF में खतरे का स्तर भी अलग-अलग होता है। इसलिए निवेश से पहले स्कीम का रिस्कोमीटर जरूर देखना चाहिए।
FoF में एसआईपी उन लोगों के लिए आसान तरीका हो सकता है, जो एक ही स्कीम से कई फंडों में हर महीने निवेश करना चाहते हैं। लेकिन पैसा लगाने से पहले स्कीम का खर्च, उसमें शामिल फंड, खतरा और अपना लक्ष्य समझना जरूरी है।

