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ETF vs FoF: दोनों में क्या है अंतर? जानिए आपके लिए कौन सा ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद और बेहतर

ETF और FoF दोनों म्यूचुअल फंड के लोकप्रिय विकल्प हैं। ETF कम खर्च में इंडेक्स को ट्रैक करता है, जबकि FoF आसान निवेश के लिए दूसरे फंड्स में पैसा लगाता है। सही चुनाव आपकी जरूरत, लागत, सुविधा और निवेश के तरीके पर निर्भर करता है।

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AI Generated Image

ETF vs FoF: म्यूचुअल फंड की दुनिया में ETF (Exchange Traded Fund) और FoF (Fund of Funds) दो ऐसे ऑप्शन हैं जो निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन ज्यादातर लोगों को इनके बीच का अंतर नहीं पता या फिर अगर पता भी है तो काफी उलझन रहती है। इस आर्टिकल में हम आपको इन दोनों के बारे में बताएंगे और साथ ही यह भी बताएंगे की इनमें से आपके लिए क्या सही है? 

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क्या है ETF और कैसे काम करता है?

ETF का मतलब है एक्सचेंज ट्रेडेड फंड। यह एक ऐसा फंड है जो किसी इंडेक्स (जैसे निफ्टी या सेंसेक्स) को ट्रैक करता है। इसे आप शेयर बाजार (Stock Exchange) पर ठीक वैसे ही खरीद या बेच सकते हैं जैसे आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं।

ETF का एक्सपेंस रेशियो (मैनेजमेंट फीस) बहुत कम होता है। चूंकि यह इंडेक्स को फॉलो करता है, इसलिए इसका रिटर्न भी इंडेक्स के आसपास ही रहता है। इसके लिए आपके पास डीमैट खाता होना अनिवार्य है।

क्या है FoF और इसकी खासियत?

FoF यानी 'फंड ऑफ फंड्स'। जैसा कि नाम से पता चलता है, यह एक ऐसा म्यूचुअल फंड है जो सीधे शेयरों में पैसा लगाने के बजाय दूसरे म्यूचुअल फंड्स में निवेश करता है।

FoF में निवेश करने के लिए आपको डीमैट खाते की जरूरत नहीं होती। आप इसे किसी भी सामान्य म्यूचुअल फंड की तरह ऐप या वेबसाइट से खरीद सकते हैं। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो निवेश को बहुत सरल रखना चाहते हैं।

ETF vs FoF: खर्च और मुनाफे का गणित (पैसा में समझें)

जब हम निवेश करते हैं, तो सबसे जरूरी यह देखना होता है कि हमारी जेब से कितना पैसा जा रहा है और कितना बच रहा है।

कम लागत (ETF): मान लीजिए आपने ₹10,000 निवेश किए। ETF का एक्सपेंस रेशियो बहुत कम (लगभग 0.05% से 0.15%) होता है। यानी साल भर में आपके सिर्फ ₹5 से ₹15 खर्च होंगे। लेकिन याद रहे, इसे खरीदने पर आपको ब्रोकरेज और ट्रांजैक्शन चार्ज भी देना होगा।

थोड़ा महंगा (FoF): वहीं FoF में एक्सपेंस रेशियो थोड़ा ज्यादा हो सकता है (लगभग 0.50% से 1%)। यानी ₹10,000 के निवेश पर आपके ₹50 से ₹100 तक कट सकते हैं। हालांकि, इसमें कोई ब्रोकरेज या डीमैट का झंझट नहीं होता।

टैक्स और लिक्विडिटी का मामला

लिक्विडिटी: ETF को आप मार्केट टाइमिंग के हिसाब से कभी भी बेचकर पैसा निकाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए बाजार में खरीदार होना जरूरी है। FoF में आप फंड हाउस को यूनिट्स वापस करते हैं, जिसमें पैसा आने में 1-3 दिन का समय लग सकता है।

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टैक्सेशन: दोनों पर टैक्स के नियम अब लगभग एक समान हैं। आपके मुनाफे पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है (खासकर अगर वे डेट या इंटरनेशनल फंड्स हैं)।

आपके लिए क्या सही?

अगर आपके पास डीमैट अकाउंट है और आप बाजार की हलचल पर नजर रखते हुए कम से कम खर्च में निवेश करना चाहते हैं, तो ETF आपके लिए एक सस्ता और सटीक विकल्प है।

लेकिन, अगर आप डीमैट अकाउंट के झंझट से बचना चाहते हैं और हर महीने SIP के जरिए अनुशासित तरीके से निवेश करना चाहते हैं, तो FoF आपके लिए सबसे आसान और सुविधाजनक हो सकता है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।