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म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय इन 4 बातों का रखें ध्यान, जानिए कैसे चुनें सही फंड

म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो क्या आप जानते हैं कि आपका पैसा वास्तव में कितना रिटर्न दे रहा है? सिर्फ सालाना रिटर्न देखकर खुश होना काफी नहीं है। निवेश का सही प्रदर्शन समझने के लिए कुछ खास पैमाने हैं। जानिए ये कैसे काम करते हैं और इनमें क्या अंतर है।

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In Short

  • म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन समझने के लिए सिर्फ सालाना रिटर्न देखना काफी नहीं है।
  • CAGR सालाना चक्रवृद्धि बढ़ोतरी बताता है, जबकि TWR निवेश और निकासी के समय का असर अलग रखता है।
  • निवेश की रकम और समय को ध्यान में रखकर रिटर्न समझने में मदद करते हैं ये पैमाने।

म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि सही फंड चुनना भी उतना ही जरूरी है। कई बार निवेशक किसी फंड के पिछले रिटर्न को देखकर उसमें निवेश कर देते हैं, लेकिन निवेश का फैसला करते समय सिर्फ रिटर्न देखना सही तरीका नहीं है। फंड के प्रदर्शन के साथ उसकी जोखिम क्षमता, निवेश की अवधि और बाजार के उतार-चढ़ाव को समझना भी जरूरी है। ऐसे में कुछ खास पैमाने हैं, जिनकी मदद से निवेशक किसी म्यूचुअल फंड का आकलन कर सकते हैं।

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CAGR: लंबे समय में फंड ने कितना रिटर्न दिया?

म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन समझने के लिए CAGR यानी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट एक अहम पैमाना है। यह बताता है कि निवेश ने शुरुआत से अंत तक औसतन सालाना चक्रवृद्धि दर से कितनी बढ़ोतरी की है।

इसकी मदद से निवेशक यह समझ सकते हैं कि किसी फंड में लगाए गए पैसे की वैल्यू समय के साथ किस रफ्तार से बढ़ी है। हालांकि, सिर्फ CAGR देखकर फंड का चुनाव करना पर्याप्त नहीं है।

TWR: निवेश के सही प्रदर्शन का पता कैसे चलेगा?

TWR यानी टाइम वेटेड रिटर्न भी म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन समझने का एक तरीका है। यह निवेश के दौरान पैसा लगाने और निकालने के समय के असर को अलग रखकर फंड के प्रदर्शन की जानकारी देता है।

इसका मतलब है कि निवेशक ने कब पैसा लगाया या कब निकाला, उससे अलग फंड ने कैसा प्रदर्शन किया, यह TWR से समझा जा सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

MWR: निवेशक को वास्तव में कितना रिटर्न मिला?

MWR यानी मनी वेटेड रिटर्न निवेशक के लिए एक और महत्वपूर्ण पैमाना है। यह निवेश की रकम और उसके समय को ध्यान में रखकर निवेशक को मिले रिटर्न का आकलन करता है।

इसमें निवेशक ने कब और कितना पैसा लगाया या निकाला, इसका असर शामिल होता है। इसलिए अलग-अलग समय पर निवेश करने वाले लोगों का रिटर्न अलग हो सकता है। MWR से निवेशक अपने निवेश के वास्तविक प्रदर्शन को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

IRR और XIRR: अलग-अलग समय पर किए निवेश का हिसाब

IRR और XIRR भी निवेश का रिटर्न निकालने के काम आते हैं। IRR अलग-अलग समय पर हुए निवेश और निकासी के आधार पर रिटर्न की गणना करता है।

वहीं, XIRR अनियमित तारीखों वाले कैश फ्लो के लिए उपयोगी होता है। यानी जब निवेशक अलग-अलग तारीखों पर पैसा लगाता या निकालता है, तो XIRR की मदद से रिटर्न का आकलन किया जा सकता है।

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फंड चुनते समय सिर्फ रिटर्न देखना सही नहीं

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय यह समझना जरूरी है कि हर पैमाना अलग जानकारी देता है। CAGR सालाना चक्रवृद्धि बढ़ोतरी दिखाता है, TWR फंड के प्रदर्शन को समझने में मदद करता है, जबकि MWR निवेशक के अपने रिटर्न की तस्वीर सामने रखता है।

इसलिए किसी फंड को चुनते समय सिर्फ अच्छे रिटर्न के आंकड़ों पर भरोसा करने के बजाय समय और रकम को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।