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कहां चलेगा बुलडोजर, कहां होगी रोक: सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 मुख्य बातें

बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी या दोषी का घर तोड़ना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा, "कोई अधिकारी मनमाने तरीके से कार्य नहीं कर सकता। बिना सुनवाई के किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

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बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी या दोषी का घर तोड़ना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा, "कोई अधिकारी मनमाने तरीके से कार्य नहीं कर सकता। बिना सुनवाई के किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।" न्यायमूर्ति गवई ने कहा, "हर व्यक्ति का अपने घर का सपना होता है। घर परिवार की सुरक्षा और उम्मीद का प्रतीक है। क्या कार्यपालिका को किसी के घर को छीनने का अधिकार है, यह विचारणीय प्रश्न है।"

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क्या हो सकता है, क्या नहीं?

केवल आरोपी होने के कारण किसी का घर नहीं गिराया जा सकता है।
राज्य आरोपी या दोषी के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकता।
बुलडोजर एक्शन एक तरह से सामूहिक दंड जैसा है, जिसकी अनुमति संविधान में नहीं है।
निष्पक्ष सुनवाई के बिना किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
कानून का शासन मनमाने निर्णय की अनुमति नहीं देता।
आरोपी और दोषियों को भी आपराधिक कानून के तहत सुरक्षा दी गई है।
संवैधानिक लोकतंत्र में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता की सुरक्षा आवश्यक है।
कार्यपालिका द्वारा किसी नागरिक के घर को बिना ठोस कारण ध्वस्त करना संविधान के नियमों का उल्लंघन है।
अधिकारियों को सत्ता के दुरुपयोग के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
अनधिकृत निर्माण होने पर भी, यह देखना आवश्यक है कि नगर निगम के कानूनों के अनुसार क्या कार्यवाही की जा सकती है और संभवतः केवल घर के कुछ हिस्से को गिराने पर भी विचार किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 15 दिन का कारण बताओ नोटिस जारी होना चाहिए। इसके अलावा, नोटिस जारी होते ही कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट को ऑटो-जेनरेटेड ईमेल भेजा जाना चाहिए ताकि पिछली तारीख का नोटिस देने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सके।