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Nvidia AI मॉड्यूल दो हफ्ते तक कस्टम्स में फंसा रहा, स्टार्टअप फाउंडर ने बताई पूरी कहानी

हैदराबाद के स्टार्टअप फाउंडर रामकृष्ण कोम्पेला ने कस्टम्स प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि रिसर्च के लिए मंगाए गए Nvidia Jetson AI मॉड्यूल दो हफ्तों तक कस्टम्स में अटके रहे। सोशल मीडिया पोस्ट के बाद CBIC के जवाब से शिपमेंट को मंजूरी मिली।

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AI Generated Image

In Short

  • Godel Machines के फाउंडर ने कहा कि Nvidia Jetson AI मॉड्यूल के लिए EPR, WPC और BIS सर्टिफिकेट मांगे गए थे।
  • फाउंडर के अनुसार, मॉड्यूल दो हफ्तों तक कस्टम्स में अटके रहे और कई जवाब देने के बाद भी समस्या बनी रही।
  • CBIC की प्रतिक्रिया के बाद शिपमेंट रिलीज हुआ, जिसके बाद फाउंडर ने लोगों के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

Nvidia Jetson AI Module: हैदराबाद के स्टार्टअप फाउंडर रामकृष्ण कोम्पेला ने भारत में सामान मंगाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके स्टार्टअप Godel Machines के लिए मंगाए गए Nvidia Jetson AI मॉड्यूल करीब दो हफ्तों तक कस्टम्स में अटके रहे। ये मॉड्यूल रिसर्च और नए प्रोडक्ट तैयार करने के काम के लिए मंगाए गए थे। कोम्पेला की पोस्ट के बाद कस्टम्स विभाग ने जवाब दिया और इसके बाद सामान को मंजूरी मिल गई।

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Nvidia Jetson मॉड्यूल के लिए मांगे गए सर्टिफिकेट

रामकृष्ण कोम्पेला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उन्होंने अपने स्टार्टअप के लिए दो Nvidia Jetson AI मॉड्यूल मंगाए थे। इनका इस्तेमाल नए प्रोडक्ट की टेस्टिंग और रिसर्च के लिए किया जाना था।

उन्होंने कहा कि कस्टम्स की ओर से इस सामान को रिलीज करने के लिए EPR, WPC और BIS से जुड़े सर्टिफिकेट मांगे गए। कोम्पेला का कहना था कि रिसर्च और टेस्टिंग के लिए मंगाए गए सामान पर ये नियम लागू नहीं होने चाहिए।

उनके मुताबिक, EPR नियम आमतौर पर सामान बनाने वाली कंपनियों और बेचने वालों पर लागू होते हैं। वहीं, उन्होंने कहा कि इंटरनल इस्तेमाल के लिए इसमें छूट मिलती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि Nvidia Jetson पहले से ही BIS के साथ रजिस्टर्ड हैं।

दो हफ्ते तक कस्टम्स में अटका रहा सामान

कोम्पेला ने बताया कि Nvidia Jetson AI मॉड्यूल करीब दो हफ्तों तक कस्टम्स में फंसे रहे। उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से कई बार जवाब भेजे गए, लेकिन हर बार उन्हें बिना साफ वजह बताए रिजेक्ट कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि कस्टम्स की तरफ से बार-बार EPR, WPC और BIS से जुड़े दस्तावेज जमा करने को कहा गया। फाउंडर ने कहा कि अगर उन्हें बार-बार वहां जाना पड़ता तो वह खुद कस्टम्स अधिकारी से मिलने जाते।

उन्होंने इस परेशानी को बताते हुए कहा कि भारत में कुछ बनाना काफी मुश्किल हो जाता है।

CBIC के जवाब के बाद मिली मंजूरी

रामकृष्ण कोम्पेला की पोस्ट पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने जवाब दिया। CBIC ने बताया कि कस्टम्स ने उनके बिल ऑफ एंट्री को मंजूरी दे दी है। अब सिर्फ ड्यूटी भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी बाकी है।

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इसके बाद कोम्पेला ने जानकारी दी कि उनका सामान क्लीयर हो गया है। उन्होंने लोगों के समर्थन और मदद के लिए धन्यवाद भी दिया।

कस्टम्स व्यवस्था में सुधार की जरूरत

इस मामले पर कैपिटलमाइंड के फाउंडर और CEO दीपक शेनॉय ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला कस्टम्स प्रक्रिया में सुधार की जरूरत को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि अगर भारत को आगे बढ़ना है तो कस्टम्स की प्रक्रिया को आसान बनाना जरूरी है, ताकि स्टार्टअप और टेक कंपनियों को रिसर्च के लिए जरूरी सामान मंगाने में परेशानी न हो।