जिस UPI ने भारत को बदला, अब जिम्बाब्वे की नजर! NPCI से डील होते ही होंगे ये बड़े फायदे
जिम्बाब्वे अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए भारत के UPI मॉडल पर नजर गड़ाए हुए है। इसके लिए NPCI International Payments Ltd. के साथ बातचीत चल रही है। इस साझेदारी से पेमेंट की लागत घटाने, ट्रांजैक्शन की रफ्तार बढ़ाने और बैंकों-फिनटेक को एक प्लेटफॉर्म से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

जिम्बाब्वे का केंद्रीय बैंक अपने पेमेंट सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए NPCI International Payments Ltd. के साथ बातचीत कर रहा है। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक इसका मकसद ट्रांजैक्शन की लागत घटाना और भुगतान की रफ्तार बढ़ाना है। रिजर्व बैंक ऑफ जिम्बाब्वे के गवर्नर जॉन मुशायवनहु (John Mushayavanhu) के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच बातचीत 31 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है।
UPI से बनेगा कॉमन पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर
जिम्बाब्वे में NPCI का Unified Payments Interface (UPI) इस्तेमाल कर ऐसा कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना है, जिससे बैंक, मोबाइल-मनी ऑपरेटर, Fintech कंपनियां और दूसरे पेमेंट प्रोवाइडर एक-दूसरे से जुड़कर रियल टाइम में ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर सकें।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक अफ्रीका के कई देशों में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम करने के साथ ज्यादा कंपनियों और लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना और कैश पर निर्भरता घटाना है।
छोटे कारोबारियों को भी मिल सकता है फायदा
गवर्नर जॉन मुशायवनहु के मुताबिक, UPI जैसी तकनीक से नए वित्तीय उत्पाद तैयार करने के अवसर बढ़ सकते हैं। बैंक कारोबारियों को कम लागत में सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगे। Account-to-account ट्रांसफर बढ़ने से छोटे घरेलू भुगतान के लिए कार्ड पर निर्भरता भी घट सकती है।
इस सिस्टम से सरकार को Small and Medium Businesses से जुड़ा ज्यादा भरोसेमंद डेटा भी मिल सकता है। इससे अर्थव्यवस्था में इन कारोबारों के योगदान को अधिक सटीक तरीके से मापने में मदद मिलेगी।
आगे Cross-Border पेमेंट की भी तैयारी
NPCI के UPI का इस्तेमाल 700 से ज्यादा बैंक कर रहे हैं और यह दुनिया के करीब 49% रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करता है। जिम्बाब्वे आगे चलकर UPI का इस्तेमाल Cross-Border और Remittance Payments के लिए भी कर सकता है।
