रियल एस्टेट के बाजार में सबसे बड़ी डील! सुभाष चंद्रा ने बेचा लुटियंस दिल्ली का बंगला, मिला 4 गुना मुनाफा
सूत्रों के अनुसार, इस संपत्ति को एक प्रमुख दिल्ली स्थित कारोबारी परिवार ने खरीदा है, हालांकि खरीदार की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। भगवान दास रोड पर स्थित यह 2.8 एकड़ का प्राइम प्रॉपर्टी प्लॉट देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण स्थलों जैसे भारत मंडपम और मंडी हाउस के बेहद करीब स्थित है।

In Short
- सुभाष चंद्रा ने दिल्ली के लुटियंस बंगला जोन में स्थित अपना 2.8 एकड़ का बंगला करीब 1,260 करोड़ रुपये में बेच दिया, जो देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डील्स में से एक मानी जा रही है।
- 2015 में करीब 304 करोड़ रुपये में खरीदी गई इस संपत्ति की कीमत 11 साल में चार गुना से ज्यादा बढ़ी, जिससे निवेश पर लगभग 314% रिटर्न और करीब 14.9% CAGR मिला।
- लुटियंस बंगला जोन में केवल करीब 600 बंगले निजी स्वामित्व में हैं, यही सीमित उपलब्धता और प्रीमियम लोकेशन इसे भारत के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित रियल एस्टेट बाजारों में शामिल करती है।
भारत के रियल एस्टेट बाजार में एक और रिकॉर्डतोड़ डील सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने दिल्ली के प्रतिष्ठित लुटियंस बंगला जोन (LBZ) में स्थित अपना बंगला करीब 1,260 करोड़ रुपये में बेचा है।
सूत्रों के अनुसार, इस संपत्ति को एक प्रमुख दिल्ली स्थित कारोबारी परिवार ने खरीदा है, हालांकि खरीदार की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। भगवान दास रोड पर स्थित यह 2.8 एकड़ का प्राइम प्रॉपर्टी प्लॉट देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण स्थलों जैसे भारत मंडपम और मंडी हाउस के बेहद करीब स्थित है।
11 साल में चार गुना से ज्यादा बढ़ी कीमत
सूत्रों के मुताबिक, सुभाष चंद्र ने यह संपत्ति 2015 में करीब 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी। यदि मौजूदा सेलिंग प्राइस को आधार माना जाए तो इस निवेश पर करीब 314% का रिटर्न मिला है।
इस अवधि में निवेश की CAGR लगभग 14.9% बैठती है, जो देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों में से एक में इस संपत्ति की बढ़ती कीमत को दर्शाती है। डील के आधार पर प्रति वर्ग फुट कीमत लगभग 1.03 लाख रुपये निकलती है, जो लुटियंस जोन की प्रीमियम स्थिति को एक बार फिर साबित करती है।
क्यों इतना खास है लुटियंस बंगला जोन?
दिल्ली का लुटियंस बंगला जोन करीब 28 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसमें लगभग 3,000 बंगले शामिल हैं। इनमें से अधिकांश संपत्तियां सरकारी स्वामित्व में हैं और केंद्रीय मंत्रियों, न्यायाधीशों, वरिष्ठ नौकरशाहों और विदेशी दूतावासों को आवंटित हैं।
बताया जाता है कि पूरे क्षेत्र में केवल करीब 600 बंगले निजी स्वामित्व में हैं। इन्हें प्रमुख उद्योगपति, कारोबारी परिवार और पूर्व शाही परिवारों के सदस्य रखते हैं। यही सीमित उपलब्धता इस इलाके को देश के सबसे विशिष्ट और महंगे रियल एस्टेट बाजारों में शामिल करती है।
हाल के वर्षों में कई बड़े डील
यह डील ऐसे समय में सामने आया है जब लुटियंस जोन में लगातार हाई-वैल्यू डील्स देखने को मिल रही हैं। हाल ही में टिहरी गढ़वाल के महाराजा मनुजेंद्र शाह के 3.2 एकड़ के बंगले की बिक्री करीब 1,000 करोड़ रुपये में होने की खबर आई थी।
वहीं पिछले वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पहले आधिकारिक आवास 17, मोतीलाल नेहरू मार्ग का सौदा करीब 1,100 करोड़ रुपये में हुआ था।
इसके अलावा 2025 में एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित 95 साल पुराने बंगले की बिक्री 310 करोड़ रुपये और फिरोज शाह रोड स्थित एक बंगले की बिक्री 241 करोड़ रुपये में हुई थी।
निर्माण नियम बढ़ाते हैं प्रीमियम
लुटियंस जोन की कीमतें केवल लोकेशन की वजह से नहीं, बल्कि कड़े निर्माण नियमों के कारण भी ऊंची बनी रहती हैं। यहां ऊंची इमारतों, व्यावसायिक परियोजनाओं और घनी आवासीय प्रोजेक्ट की अनुमति नहीं है।
लुटियंस जोन को जानिए
लुटियंस जोन देश का सबसे प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी रेजिडेंशियल इलाका माना जाता है, जिसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एडविन लुटियंस ने 20वीं सदी की शुरुआत में दिल्ली की नई राजधानी के तौर पर डिजाइन किया था।
आजादी के बाद यह इलाका धीरे-धीरे भारत के सबसे बड़े राजनीतिक, कारोबारी और वीआईपी पते में बदल गया। यहां के विशाल बंगले, चौड़ी सड़कें और हरियाली इसे बाकी दिल्ली से अलग पहचान देते हैं।
लुटियंस जोन में प्रॉपर्टी की डील्स बेहद कम होती हैं, लेकिन जब होती हैं तो रिकॉर्ड तोड़ कीमतों पर होती हैं। इसकी खास बात यह है कि यहां जमीन की उपलब्धता बेहद सीमित है, और ज्यादातर संपत्तियां दशकों पुरानी विरासत वाली हैं, जिनकी वैल्यू समय के साथ कई गुना बढ़ चुकी है।

