
UPI पेमेंट पर 0.4% MDR चार्ज को लेकर बढ़ा विवाद, व्यापारियों ने सरकार से फैसला बदलने की अपील की
UPI पेमेंट पर प्रस्तावित MDR चार्ज को लेकर व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लग सकता है। व्यापारी इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि ग्राहकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

In Short
- 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR चार्ज लागू होने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
- व्यापारियों ने MDR लागू करने के फैसले पर चिंता जताई है और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है।
- सरकार का कहना है कि MDR का भुगतान व्यापारी करेंगे, ग्राहकों पर इसका बोझ नहीं डाला जाएगा और ज्यादातर UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे।
UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लगने वाले MDR को वापस लिया जाए।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कहा है कि इस फैसले से देश के करीब 6 करोड़ दुकानदारों, व्यापारियों और उद्यमियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
प्रस्तावित नियम के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के योग्य Person-to-Merchant UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
किन UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?
नए नियमों के तहत व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। वहीं छोटे व्यापारी, जिन्हें UPI QR कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक का भुगतान मिलता है, उन्हें इस चार्ज से छूट दी गई है।
सरकार का कहना है कि इस चार्ज का भुगतान ग्राहकों को नहीं बल्कि व्यापारियों को करना होगा। साथ ही रोजमर्रा के ज्यादातर UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।
बड़े पेमेंट पर असर की चिंता
CTI का कहना है कि चिंता सिर्फ ट्रांजैक्शन की संख्या को लेकर नहीं है, बल्कि 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट की वैल्यू को लेकर है।
संगठन के मुताबिक, FY2025-26 में UPI के जरिए करीब 314 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन हुए, जिसमें लगभग 198 लाख करोड़ रुपये के मर्चेंट पेमेंट शामिल थे।
CTI ने कहा कि 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन संख्या के हिसाब से करीब 4% हैं, लेकिन इनकी वैल्यू लगभग 131 लाख करोड़ रुपये है।
CTI का कहना है कि MDR लागू होने के बाद व्यापारी बड़े पेमेंट के लिए UPI का इस्तेमाल कम कर सकते हैं और कुछ ग्राहक व व्यापारी बड़े लेनदेन के लिए कैश की ओर लौट सकते हैं।

MDR चार्ज कितना होगा?
0.4% MDR के हिसाब से 3,000 रुपये के UPI पेमेंट पर 12 रुपये, 10,000 रुपये के पेमेंट पर 40 रुपये और 50,000 रुपये के पेमेंट पर 200 रुपये चार्ज लगेगा।
75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर यह चार्ज अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसे जरूरी सेक्टर के 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लगेगा। वहीं म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकिंग जैसे कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन पर 0.02% MDR लागू होगा।
सरकार ने कहा ग्राहक नहीं देंगे चार्ज
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि MDR कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है और इसका पैसा सरकार के पास नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह चार्ज NPCI, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, POS मशीन उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और मर्चेंट बैंक से जुड़ा है। इसका भुगतान व्यापारी करेंगे और इसे ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, MDR से मिलने वाली राशि का 40% ग्राहकों के बैंक, 30% पेमेंट गेटवे, 20% UPI ऐप और 10% UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को मिलेगा।
GST और छोटे व्यापारियों के लिए फंड पर चर्चा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI MDR पर लगने वाले 18% GST पर चर्चा हो सकती है।
इसके अलावा छोटे व्यापारियों के बीच UPI को बढ़ावा देने के लिए कुल MDR कलेक्शन का 5% हिस्सा एक अलग फंड में रखने की बात भी कही गई है।
15 अक्टूबर की समय सीमा नजदीक आने के साथ व्यापारी संगठन इस फैसले पर दोबारा विचार की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि ज्यादातर UPI पेमेंट पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

