
UPI MDR चार्ज घटाने की सिफारिश! IIT बॉम्बे ने दी बड़ी सलाह, बैंकों की कमाई को लेकर भी उठाए सवाल
UPI से ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करने पर लगने वाले चार्ज को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में एमडीआर घटाने और बैंकों की कमाई को लेकर अहम सुझाव दिए गए हैं। जानिए नए नियम से व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट कंपनियों पर क्या असर पड़ सकता है।

In Short
- IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में यूपीआई पर एमडीआर को 0.40% से घटाकर 0.08% करने की सिफारिश।
- ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.40% MDR का नियम 15 अक्टूबर से लागू होना प्रस्तावित।
- रिपोर्ट में बैंकों को यूपीआई सिस्टम बेहतर बनाने के लिए करीब ₹15,000 करोड़ खर्च करने की सलाह।
UPI से पेमेंट करने वाले दुकानदारों और व्यापारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। IIT बॉम्बे की एक रिपोर्ट में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट को 0.40% से घटाकर 0.08% करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों को डिजिटल पेमेंट सिस्टम चलाने के लिए एमडीआर से कमाई करने के बजाय अपने सेविंग और करंट अकाउंट से होने वाली कमाई का एक हिस्सा इस्तेमाल करना चाहिए।
यह रिपोर्ट IIT बॉम्बे के गणित विभाग के प्रोफेसर आशीष दास और RBI की पूर्व अधिकारी प्रज्ञा दास ने तैयार की है।
15 अक्टूबर से लागू होना है नया MDR नियम
UPI स्टीयरिंग कमेटी ने 15 सितंबर को ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR तय किया था। यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना है। हालांकि, व्यापारिक संगठनों ने सरकार से इस चार्ज को वापस लेने की मांग की है।
इसी बीच IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में एमडीआर को कम करने और इसकी रकम अलग-अलग पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों के बीच बांटने का सुझाव दिया गया है।
PhonePe और Google Pay को कितना मिलेगा हिस्सा?
रिपोर्ट के मुताबिक, PhonePe और Google Pay जैसे थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स के लिए एमडीआर की दर 0.06% रखी जानी चाहिए। जबकि NPCI ने इनके लिए 0.08% का प्रस्ताव दिया था।
वहीं, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स, जिनमें ज्यादातर बैंक शामिल हैं, के लिए 0.02% हिस्सा बनाए रखने का सुझाव दिया गया है।
बैंकों को ₹15,000 करोड़ खर्च करने की सलाह
रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों को एमडीआर से मिलने वाली कमाई में अपना हिस्सा छोड़ देना चाहिए। इसकी वजह यह है कि बैंक पहले से ही करंट और सेविंग अकाउंट में जमा रकम पर कम ब्याज देकर अच्छी कमाई करते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों ने CASA डिपॉजिट के जरिए ₹4.85 लाख करोड़ से ज्यादा का नेट इंटरेस्ट मार्जिन कमाया था।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बैंक इस रकम से जुड़े लाभ का करीब 3%, यानी लगभग ₹15,000 करोड़, यूपीआई सिस्टम को चलाने और बेहतर बनाने पर खर्च करें।

₹75,000 के पेमेंट पर ₹300 चार्ज को लेकर सवाल
रिपोर्ट में ₹75,000 या उससे ज्यादा के इलेक्ट्रॉनिक मर्चेंट पेमेंट पर अधिकतम ₹300 चार्ज तय करने पर भी सवाल उठाया गया है।
इसके मुताबिक, RBI के नियमों के अनुसार सर्विस चार्ज भुगतान सेवा देने की औसत लागत के हिसाब से होना चाहिए।
रिपोर्ट में RBI और सरकार से यूपीआई को बैंकों के लिए जरूरी सेवा बनाने की भी सिफारिश की गई है, जैसे कोर बैंकिंग सिस्टम जरूरी है।
ऑनलाइन पेमेंट और क्रेडिट कार्ड पर भी सुझाव
रिपोर्ट में ई-कॉमर्स कंपनियों से सामान या सेवाएं खरीदने के दौरान होने वाले ऑनलाइन पेमेंट पर अलग से 'डिजिटल पेमेंट फीस' लगाने का सुझाव दिया गया है।
इसके अलावा क्रेडिट कार्ड पर एमडीआर घटाने की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई व्यापारी पहले से ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज लेते हैं और क्रेडिट कार्ड भी स्वीकार करते हैं। ऐसे में क्रेडिट कार्ड एमडीआर कम करने से यूपीआई यूजर्स पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को लेकर चिंताएं दूर हो सकती हैं।

