भारत को रूस से तेल खरीदने पर दी थी टैरिफ की धमकी, अब खुद रूसी डीजल मंगाएंगे ट्रंप! जानें क्यों बदला रुख
रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर भारी टैरिफ लगाने और प्रतिबंधों की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब खुद रूस से डीजल मंगाने की तैयारी में हैं। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रंप के इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर अमेरिका को रूसी डीजल की जरूरत क्यों पड़ी और इस कदम से भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?

In Short
- रूस से तेल खरीदने पर भारत को 100% तक टैरिफ लगाने की धमकी दी गई थी।
- ट्रंप ने रूस से चरणबद्ध तरीके से 18 लाख टन डीजल उपलब्ध कराने की घोषणा की।
- यूक्रेन ने फैसले पर नाराजगी जताई, अमेरिकी नीति पर भी उठे सवाल।
रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर भारी टैरिफ लगाने और प्रतिबंधों की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब खुद रूस से डीजल मंगाने की तैयारी में हैं। इस फैसले के बाद अमेरिका की व्यापार नीति पर सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि जिस वजह से भारत पर दबाव बनाया गया, अब अमेरिका खुद उसी रास्ते पर चल रहा है।
भारत को दी थी 100% तक टैरिफ की धमकी
सितंबर 2026 में ट्रंप ने एक कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया।
इससे पहले रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारतीय सामान पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था, जिससे कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा तय होने के बाद अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया गया।
अब रूस से डीजल क्यों खरीदना चाहता है अमेरिका?
मिडिल ईस्ट में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावटों के कारण अमेरिका में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल संघर्ष शुरू होने के बाद से डीजल करीब 70% महंगा हुआ है।
इसका सबसे ज्यादा असर किसानों, ट्रक चालकों और सामान की ढुलाई पर पड़ रहा है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप सरकार पर ईंधन की कीमतें कम करने का दबाव भी है।
रूस से कितना डीजल आएगा?

ट्रंप ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद Truth Social पर बताया कि रूस तत्काल 3 लाख टन डीजल अमेरिकी और वैश्विक बाजार में उपलब्ध कराएगा।
इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और आगे 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत अमेरिका अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल निर्यात पर प्रतिबंधों में छूट दे सकता है।
यूक्रेन ने जताई कड़ी नाराजगी
ट्रंप के फैसले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे रूस के लिए आर्थिक मदद जैसा कदम बताया। जेलेंस्की का कहना है कि रूसी तेल उत्पादों की बिक्री को अनुमति देने से यूक्रेन में युद्ध लंबा खिंच सकता है।
भारत और अमेरिका की नीतियों पर सवाल
भारत लगातार कहता रहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और आम लोगों को किफायती ईंधन उपलब्ध कराने के लिए रूस से तेल खरीदता है।
अब ट्रंप ने भी अमेरिकी किसानों, ट्रक चालकों और आम लोगों को महंगे ईंधन से राहत देने के लिए रूस से डीजल आपूर्ति का फैसला किया है।
ऐसे में आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि जब भारत ने अपनी जरूरतों के लिए रूस से तेल खरीदा तो उस पर टैरिफ लगाया गया, लेकिन अमेरिका अपनी जरूरतों के लिए रूसी ईंधन पर प्रतिबंधों में छूट दे रहा है।
अमेरिकी प्रशासन ने रूसी डीजल की आपूर्ति के लिए अस्थायी प्रतिबंध छूट जारी की है। हालांकि, इससे ईंधन की कीमतों में लंबे समय तक कितनी राहत मिलेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

